शिक्षकों की गैर शिक्षकीय कार्य में ड्यूटी का मुद्दा,कोरोना काल में जोखिम के साथ कर रहे काम, सुरक्षा व्यवस्था जरूरी

बिलासपुर(मनीष जायसवाल) वैश्विक महामारी कोरोना की आपदा के दौर में बहुत से शिक्षक दिन रात कर रहे हैं विशेष ड्यूटी जो गैर शिक्षकिय कार्य है उंसमें अपनी सेवाएं दे रहे है। इस बीच …शिक्षक भविष्य में गैर शिक्षकिय कार्यो से दूर रहने के लिए कदम बढ़ा चुके हैं, जिसके लिए वे संगठित होना शुरू कर दिये हैं, जिसकी एक वजह कोरोना काल मे शिक्षकों को कोरोना योद्धा बना कर  सुरक्षा अस्त्र शस्त्र के बगैर कोविड 19 नामक वैश्विक महामारी से लड़ने के लिए मैदान में उतार दिया गया है।….चूंकि कोरोना काल में सौपा गया कार्य राष्ट्रीय आपदा से जुड़ा हुआ है व इसका  विधिक रूप में पालन करना है।… शिक्षको में रोष की दूसरी वजह सोशल मीडिया में वायरल हुआ छत्तीसगढ़ के शिक्षा सचिव  का एक पुराना लेख है जिसकी कुछ लाइन अब शिक्षको के लिए एक महत्वपूर्ण लाईन अब टैग लाइन बन गई है ..!सीजीवालडॉटकॉम न्यूज़ के व्हाट्सएप ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

शिक्षको में यह धारणा बन गई है कि पद में आते ही सबके सुर बदल जाते है। ज्ञान का प्रसार करने वाला गुरु..शिक्षक बहुत जल्द शासन प्रशासन को कमियां या सरकारी मुलाजिम लगने लगता है। तीसरी एक वजह शिक्षक इसे मनोविज्ञान से जोड़ कर देख रहे है। चुनाव और जनगणना को छोड़ जब भी किसी विशेष कार्य के लिए योग्य मानव श्रम बल की आवश्यकता होती है।प्रशासन की ओर से  शिक्षको को आगे कर दिया जाता है ….! कोरोना काल में शिक्षको के कार्य कुशलता देखते हुए प्रशासन से लेकर सरपंच, सचिव तक शिक्षको से भविष्य से गैर शिक्षकिय कार्यो में सहयोग की उम्मीद का मनोवैज्ञानिक आधार शिक्षको को दिखाई दे रहा है।

नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास राजपूत  एक चर्चा में बताते हैं कि शिक्षकों में अपने शिक्षा विभाग से रोष इसलिए भी सबसे अधिक है क्योंकि कोरोना काल मे जब  लॉक डाउन का दूसरा चरण शुरू हुआ था तब शिक्षकों ने बहुत ही कठिन परिस्थितियों में पूरे प्रदेश स्तर पर मध्यान भोजन का सूखा अनाज पहले इकट्ठा किया ..फिर उसे तौल- तौल कर उसके पैकेट बनाये फिर छात्रों के घर- घर जाकर बांटे है। शिक्षक अनाज ढो कर  गाँव की गलियों के चक्कर लगाने के बाद भी मामूली चूक की वजह से सस्पेंड हुआ है। 

 लॉक डाऊन में जब सार्वजनिक यातायात के साधन नही थे तब शिक्षक घर से स्कूल आने जाने में ही बहुत ही संघर्ष पूर्ण परिस्थितियों से गुजरा हैं। स्कूल शिक्षा विभाग चाहता तो इस कार्य ग्राम स्तर पर बहुत ही सरलता के करवा सकता था..!  कोरोना के साये में शिक्षक  शासन के कई अव्यवहारिक निर्णयों से दुखी है। 

शिक्षक नेता विकास राजपूत  का कहना है कि वैश्विक महामारी के दौर में शिक्षक ही असली कोरोना वारियर्स बनकर सामने आया है। वैसे तो करोना को रोकने के लिए प्रदेश के अनेक अमला कार्य कर रहे हैं जैसे कि पुलिस प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग किंतु यह उनका मूल कार्य ही है पुलिस का काम है लॉ एवं आर्डर को बनाए रखना और स्वास्थ्य विभाग का कार्य है मरीजों की देखभाल करना लोगों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना किंतु एक शिक्षक जिसका मूल कार्य होता है बच्चों को शिक्षा देना वह अपने मूल कार्य से आगे बढ़कर इस आपदा काल में लोगों की सेवा कर रहा है वह मजदूरों को बस में बैठाकर घर तक छोड़ने जा रहा है क्वॉरेंटाइन सेंटर में रह रहे लोगों की देखभाल कर रहा है उनकी सुविधाओं का ध्यान रख रहा है कहीं चेक पोस्ट पर तो कहीं राशन वितरण में हर जगह शिक्षक अपने मूल कार्य को छोड़कर दूसरे कार्य वह भी बड़े सहज और सरल तरीके से कर रहा है ऐसा करते हुए शिक्षक के माथे पर कोई शिकन नहीं होती है।

विकास राजपूत का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग और शासन ने  शिक्षको की सुविधाओं का एवं सुरक्षा का ध्यान रखने की जरूरत है  इस महामारी में हमारा पूरा शिक्षक समुदाय शासन प्रशासन के साथ है हर विषम परिस्थिति में भी कार्य करने को तैयार हैं किंतु हमारी और हमारे परिवार की सुरक्षा भी आवश्यक है जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। कोरोना काल में कार्य के दौरान मृत हुए शिक्षकों के परिवार को 50 लाख का बीमा कवर मिलना चाहिए। कोरोना डियूटी के दौरान जिस शिक्षक की मृत्यु हुई है उसके परिजनों को तत्काल अनुकम्पा नियुक्ति  व  50 लाख मिलना चाहिए ।आपको बताते चले कि  सोशल मीडिया में वायरल हुआ छत्तीसगढ़ के शिक्षा सचिव  का एक पुराना लेख है जिसकी कुछ लाइन अब शिक्षको के लिए एक महत्वपूर्ण लाईन अब टैग लाइन बन गई है ..!

जिसमें वे लिखते है कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम में कहा गया है कि शिक्षकों से निर्वाचन और जनगणना को छोड़ किसी भी तरह का कोई भी गैर शिक्षकिय कार्य नही करवाया जा सकता है।फिर भी यह काम करवाया जा रहा है। वे इस विषय पर शिक्षकों से बहुत सहानुभूति रखते है।इसके अलावा उन्होंने कई और बाते कही है।

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