शिक्षाकर्मियों की वरिष्ठता सूची में भारी खामियां…नियमों का नहीं हो रहा पालन

रायपुर।शिक्षकर्मियों के संविलियन पश्चात भी अभी अनेक खामिया प्रदर्शित हो रही है।स्थानांतरण एवं वरिष्ठता ऐसे तमाम विषयों पर अभी भी सही नियम स्थापित नहीं है।विभिन्न जिलो में व्यख्याता(पं) की जो वरिष्ठता सूची जारी की है उनका अवलोकन करने पर पाया गया कि  अभी भी बहुत सारी विसंगति एवम् अपूर्ण जानकारी है ।नियम कायदों की धज्जिया उड़ा दी गयी है।बता दे कि पहली विसंगति तो वरिष्ठता तिथि वर्तमान पद पर कार्यभार ग्रहण तिथि को मानना है वहां नियुक्ति तिथि को अंकित कर दिया गया है ।एक ही तिथि में कार्यभार ग्रहण करने पर जन्म तिथि के आधार पर वरिष्ठता तय करनी है ,लेकिन इसका पालन नही किया गया है चूँकि व्यख्याता(एल बी) राज्य कैडर का पद है उनकी वरिष्ठता राज्य स्तर पर तय होगी अर्थात एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण से आये व्यख्याता (पं) की वरिष्ठता समाप्त नही होगी ।वहीँ दूसरी ओर म.प्र.से 2008 में छ.ग. में नियुक्त शिक्षा कर्मी 1 को जिले में प्रथम क्रम में रखा गया है जबकि उनकी वरिष्ठता छ.ग.में पदस्थापना तिथि 2008से मान्य होगी (राजनादगांव में ये प्रकरण है) ।निम्न से उच्च पद में सीधी भर्ती से नियुक्त एवम् पदोन्नति से नियुक्त व्यख्याता(पं) को निम्न पद की प्रथम नियुक्ति को वरिष्ठता दे दी गयी है और उनके नाम के सम्मुख रिमार्क कालम में निम्न से उच्च पद या पदोन्नति नही दर्शया गया है ।वरिष्ठता सूची बनाते समय जिला पंचायत के लिपीक एवम् अधिकारीयो दुवारा जवाबदारी के साथ वरिष्ठता की प्राविधिक सूची जारी नही की है ।

इसके अलावा राज्य शासन के मनशानुरूप 1 अगस्त को संविलयन किये गए शिक्षक (एल बी) का वेतन आहरण किये जाने के दबाव में 30 जून की स्थिति में अंतिम वेतन देयक प्रदान करने में भारी गड़बड़ी कर रहे है किसी शिक्षा कर्मी कोएक से दो वेतन वृद्धि ज्यादा तो किसी को कम दे दिया गया है ।परिवार कल्याण कार्यक्रम का वेतन वृद्धि देने के नियम समाप्त कर दिए गए है फिर भी 2007 के पश्चात् 2013 में भी दिए गए है और दिए जा रहे है । शिक्षक (एल बी)को 1.7.2018 या पूर्व में में 8 वर्ष पूर्ण करने पर संविलयन कर दिया गया है उनको भी 30 जून की स्थिति में पांचवा वेतनमान के समकक्ष वेतन देयक का प्रमाण पत्र दे दिया गया है जबकि उनका वेतन निर्धारण 17.5.2013 के आदेशनुसार शासकीय शिक्षको के समतुल्य वेतन निर्धारण कर वेतन देयक प्रदान करना चाहिए था ।

इस तरह की विसंगति पूर्ण वरिष्ठता सूची एवम् वेतन देयक प्रदान करने की जिला पंचायत एवम् जनपद पंचायत की कार्यशैली का व्यख्याता(पं)संघ के प्रान्ताध्यक्ष कमलेश्वर सिंह ने निंदा की है तथा ये सभी त्रुटिया गम्भीरता पूर्वक जवाबदारी के साथ सूधार करने की मांग की है यदि तृटिपूर्ण सेवा पुस्तिका का संधारण हुआ तो संविलयन के बाद भी अपने पूर्व नियोक्ता के पास सुधरवाने के लिए आना जाना पड़ेगा और भ्रस्टाचार को बढ़वा मिलेगा ।उन्होंने मांग की है सेवा पुस्तिका का संधारण एवम् वेतन निर्धारण के कार्य में शासन दुवारा नियुक्त लेखा शास्त्र में अनुभवी लिपिक संवर्ग को लगाया जाये ।किसी भी परिस्थिति में शिक्षक सवर्ग के कर्मचारियों को सलग्न न किया जाये ।क्योकि कई विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी अपने चहेते शिक्षक एवम् शिक्षा कर्मियो को अपने कार्य में सलग्न कर इस कार्य हेतु कर लिए गए है ये शिक्षक एवम् शिक्षा कर्मी अपने ही साथियो से काम के एवज में राशि वसूलते है ।

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