हमार छ्त्तीसगढ़

शिक्षाकर्मीःस्थायी समाधान की कोशिश..मप्र में संविलयन तो छत्तीसगढ़ में क्यो नहीं-परिचर्चा 25 फरवरी को

Shikshakarmi,virendra dubeyरायपुर।वृंदावन हॉल रायपुर में  25 फरवरी को एक अनूठा कार्यक्रम  ” एक परिचर्चा-मप्र में संविलियन तो छत्तीसगढ़ में क्यो नहीं..”   आयोजित किया जा रहा ह जिसमें  संविलियन के मुद्दे  पर खुली बहस  होगी। इस कार्यक्रम में भागीदारी प्रदान करने के लिए प्रदेश के शिक्षाविदों, मीडिया जगत के जाने माने पत्रकारों, सेवानिवृत हो चुके IAS एवम सचिव स्तर के अधिकारियों एवं समस्त शिक्षाकर्मियों सहित विभिन्न संगठन प्रमुखों को न्योता दिया जाएगा। इस  समारोह के लिए शासन-प्रशासन को भी आमंत्रण दिया जावेगा ।ताकि वे भी संविलियन पर अपना पक्ष रख सकें।यह जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षा कर्मी संघ के प्राताध्यक्ष वीरेन्द्र दुबे ने बताया कि छत्तीसगढ़  के शिक्षाकर्मी विगत 1998 से शिक्षक का अधिकार पाने के लिए संघर्षरत हैं। इन्ही संघर्षों के बदौलत शिक्षाकर्मियों की सेवा, सुविधा और वेतनमान में आंशिक सुधार आया । किन्तु आज भी यह वर्ग उपेक्षा,दोहरा मापदण्ड और शोषण का शिकार है।आज भी संवर्ग भेद के कारण 3 से 4 महीने तक वेतन ना मिलने से सड़क पर उतरकर वेतन की फरियाद करनी पड़ती है। अब समय आ गया है कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान किया जावे। इसी सिलसिले में 25 फरवरी को रायपुर के वृन्दावन हॉल में एक परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है।
इस समारोह में प्रदेश के शिक्षाविद, पत्रकारगण, चिंतक और सेवानिवृत्त IAS अफसर – शिक्षाकर्मियों की इन समस्याओं पर चिंतन कर समस्या के स्थायी समाधान का रास्ता तलाश करेंगे।इस  समारोह में सम्मलित होने के लिए प्रदेश के समस्त बुद्धजीवियों से आग्रह किया जावेगा।

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