शिक्षा कर्मीः CM डॉ.रमन के 14 सेकेन्ड के स्टेटमेंट का असर नहीं … 26 मई संविलयन सभा पर अडिग… जोरदार तैयारियां

रायपुर । “  चलिए….ये इलेक्शन के समय …. अभी धीरे-धीरे-धीरे आँदोलन तो होते रहेगे….. मगर समाधान भी हमने ढूँढ़ लिया है….और समाधान चीफ सेक्रेटरी औऱ कमेटी तैयार हो गई है…… इसका रास्ता निकलेगा….” । यह स्टेटमेंट मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह का है…। जिसे उन्होने अपनी विकासयात्रा के दौरान किसी पड़ाव पर शिक्षा कर्मियों के मुद्दे औऱ 26 मई के प्रस्तावित संकल्प संविलयन संकल्प सभा से जुड़े पत्रकारों के सवालों के जवाब में दिया था….। कुल 12-14 सेकेन्ड के इस स्टेटमेंट में मुख्यमंत्री ने कहीं भी शिक्षा कर्मी या संविलयन शब्द का इस्तेमाल नहीं किया । लेकिन कुछ ही देर में उनका यह वीडियों वायरल हो गया – इस जुमले के साथ कि शिक्षा कर्मियों के संविलयन का सामाधान निकल आया है। 26 मई को अपने निर्णायक आँदोलन की तैयारी कर रहे शिक्षा कर्मियों के बीच इसे लेकर कुछ हलचल तो हुई । लेकिन ‘ लबरा के खाए त पतियाय ’ के अंदाज में वे अपने आँदोलन को लेकर अडिग हैं। इस बारे में शिक्षा कर्मियों के करीब सभी संगठनों ,नेताओँ और आम शिक्षा कर्मियों की राय एक है कि अगर सरकार ने कोई फैसला कर लिया है तो उसे सार्वजनिक कर अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए। हो रहा है…. होगा…. हो जाएगा….रास्ता निकलेगा….जैसी जुमलेबाजी तो पिछले अरसे से सुनते आ रहे हैं। इस तरह की बयानबाजी को लोग कन्फ्यूजन का माहौल बनाने की कोशिश भी मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री का यह बयान वायरल होने के बाद इस सिलसिले में कई शिक्षा कर्मी संगठनों और नेताओँ से बात हुई तो उन्होने समाधान निकाले जाने की बात का स्वागत तो किया लेकिन यह बात भी उठाई कि अब देरी क्यों की जा रही । सरकार को फैसला जल्दी करना चाहिए । अब कमेटी का कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाना चाहिए और 5 जून के पहले कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर देना चाहिए।संविलयन का एलान कर शासकीय शिक्षकों के बराबर सभी सुविधाएँ दी जानी चाहिए।

प्रांतीय संचालक शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय़ मोर्चा विरेन्द्र दुबे  कहा कि “हम हमेशा शिक्षाकर्मियों के समस्याओं के सकारात्मक ढंग से समाधान के पक्षधर रहे हैं और हमने अनेक आंदोलन शून्य पर भी मुख्यमंत्री के ऊपर भरोसा करते हुए वापस लिए हैं। मुख्यमंत्री के वर्तमान बयान का हम स्वागत करते हैं,लेकिन 3 की जगह 6 माह बीतने पर भी शिक्षाकर्मी चिंताग्रस्त है।अतः मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि अविलंब  शिक्षाकर्मियों के संबंध में घोषणा की जाए तथा  घोषणा का क्रियान्वयन बिना किसी देरी के की जाए ताकि नए शिक्षा सत्र के आरंभ में एक पूर्ण शिक्षक के रूप में विद्यालय जा सके।”

संचालक मोर्चा व प्रदेश अध्यक्ष नवीन शिक्षाकर्मी संघ विकास सिंह राजपूत ने कहा कि  मुख्यमंत्री के बयान का स्वागत है और जब समाधान खोज लिया गया है । तो जल्दी ही निर्णय करे  ।  जिससे शिक्षाकर्मियों का संविलियन शिक्षा विभाग मे वेतन विसंगति सुधार कर हो सके।रहा सवाल संविलियन संकल्प सभा का तो मुख्यमंत्री के बयान  मात्र से संकल्प सभा बदलाव नही होगा। ये निश्चित समय और निश्चित स्थान पर होगी    और मोर्चे का ये निर्णय है।

संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन ने कहा है कि यदि प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह पंचायत शिक्षकों के संविलियन की घोषणा करते है तो प्रदेश के 1लाख 80 हजार शिक्षाकर्मी सपरिवार उन्हें सम्मिलित रूप से सम्मानित करने भव्य और ऐतिहासिक सम्मेलन  करेंगे।

मध्यप्रदेश में अध्यापकों के संविलियन कि तेज होती कवायदों ने छ ग के पंचायत शिक्षकों को भी आशान्वित किया है और वे अपने शासकीयकरण को लेकर कृत संकल्पित होने 26 मई को 90 विधानसभा क्षेत्रों में जुटेंगे।

गंगा पासी महिला प्रकोष्ठ नवीन शिक्षाकर्मी संघ छत्तीसगढ़ ने कहा कि .मुख्यमंत्री का मीडिया को दिया हुआ वर्जन स्वागत योग्य है और शंका योग्य भी है। जब कमेटी ने रिपोर्ट दे दी है तो देर किस बात की है। सरकार को ध्यान रखना चहिये कि  संविलियन क्रांति की मशाल उठाने में महिला शिक्षा कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। और संकल्प सभा मे इस योगदान  को याद किया जायेगा।

महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष नवीन शिक्षाकर्मी संघ उमा जाटव ने कहा कि जब मुख्यमंत्री कह रहे है कि हमने समाधान खोज लिया है तो देर किस बात की है ।  26 मई के पहले निर्णय ले ले ।  जिससे विधानसभा संविलियन संकल्प सभा की जरूरत ही न पड़े।

प्रांतीय उपसंचालक शिक्षक पँ ननि मोर्चा छ.ग   धर्मेश शर्मा ने कहा कि  मुख्यमंत्री के बयान का स्वागत है।पर संकल्प सभा का फ़ैसला तो कोर कमेटी का और  संकल्प सभा होकर ही रहेगी।  “संविलियन ही शिक्षाकर्मियों की समस्याओं का स्थायी और समग्र समाधान है।ठोस पहल से ही समस्याये समाप्त होगी।अनावशयक विलम्ब ही आक्रोश का कारण है, जल्द निर्णय ही समाधान है।

जितेन्द्र शर्मा, उपसंचालक शिक्षक पँ ननि मोर्चा छ.ग.ने कहा कि शिक्षाकर्मियों का संविलियन ही छत्तीसगढ़ में शिक्षा के विकास की नई गाथा लिखेगा, इसके बिना समुचित विकास की कल्पना निर्रथक। अस्थायी सँवर्गवाद की समाप्ति से प्रदेश के युवाओं के लिये सुरक्षित और आकर्षक कैरियर का मार्ग प्रशस्त होगा। मुख्यमंत्री के वादे की ओर 180000 शिक्षाकर्मियों और 9 लाख उनके परिवारजन टकटकी लगाए हैं की जल्द ही संविलियन हो।”-

माया सिंह प्रान्तीय उपाध्यक्ष,संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ का कहना है कि मुख्यमंत्री का बयान ये बता रहा है कि सरकार रुख सकारात्मक है, पर कितना है? ये कहा नहीं जा सकता है। शिक्षा कर्मीयो पर गठित कमेटी की रिपोर्ट सरकार आज ही सार्वजनिक करे, और सरकार  रिपोर्ट पेश करते वक़्त ये भी ध्यान रखे कि रायपुर में महिला शिक्षाकर्मीयो पर हुए अत्याचार को कोई भूला नही है। संकल्प सभा तो होगी और अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी >

एम्प्लॉइस एसोसिएसन के प्रांताध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग ने बताया कि राज्य में कार्यरत 1 लाख 80 हजार शिक्षक पं संवर्ग की शासकीयकरण कर संविलियन की मांग की पूर्ति संबंधी मुख्यमंत्री के बयान से जून के पूर्व घोषणा की उम्मीद जगी है और संगठन ने स्पष्ट किया कि शिक्षक पं संवर्ग को वरिष्ठता नियुक्ति को बरकरार रखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग में सेवा का हस्तांतरण कर दिया जाएगा ।साथ ही समान काम समान वेतन के साथ क्रमोन्नति, स्थानांतरण  ,अनुकम्पा,का लाभ मिलेगा ।

छन्नूलाल साहू जिलाध्यक्ष नवीन शिक्षाकर्मी संघ राजनांदगांव ने कहा कि प्रदेश के शिक्षाकर्मियों की एकजुटता व साथ अब निर्णायक मोड़ पर है महापंचायत के बाद संविलियन संकल्प सभा के बेहतर प्रभाव अब दिखने लगा है ।  हमे उम्मीद है मुख्यमंत्री  शिक्षाकर्मियों के संविलियन के मांग को जल्दी पूर्ण करने का निर्णय लेंगे।

वेदप्रकाश साहू जिलाध्यक्ष नवीन शिक्षाकर्मी संघ बालोद ने कहा कि महापंचायत के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदेश के शिक्षाकर्मियों की मुहिम अब रंग लाने लगी है मुख्यमंत्री का ताजा बयान उसी का हिस्सा है।

जिलाध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ नवीन शिक्षाकर्मी संघ दुर्ग नंदिनी देशमुख ने कहा कि  नारी शक्ति की सतत सक्रियता व पुरुषो के साथ संविलियन क्रांति मे प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के आह्वान पर कदम से कदम मिलाकर चलने का परिणाम  निकलेगा और यह लड़ाई अंततः संविलियन रूपी मंजिल पर समाप्त होगी

सचिन त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष संयुक्त शिक्षाकर्मी संघ जिला सुरजपुर ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान अभी भी संविलियन की स्पष्टता को परिभाषित नही कर पा रहा ।  जिससे प्रदेश के पंचायत शिक्षक सशंकित है, लेकिन यदि संविलियन कि स्पष्ट घोषणा की जाती है तो पूरा प्रदेश देखेगा की शिक्षाकर्मी होली,दिवाली, ईद और क्रिसमस डॉ. रमन सिंह के साथ किस उत्साह से मनाते है।

मनोज सनाड्य, प्रांतीय सचिव, छगपंननि संघ ने कहा कि  समाधान ढुंढ लिया तो अमली जामा पहनाया जावे  , क्रियान्वयन आदेश तामिल करवाया जावे.  ताकि शिक्षा सत्र के पूर्व सभी   शिक्षा कर्मी वरीष्ठता सहित  संविलियन होकर  शिक्षा पर बेहतर काम कर सके

हृषिकेश उपाध्याय , प्रदेश सह संचालक छ.ग.पंचायत/न नि शिक्षक मोर्चा ने कहा किवैसे तो मुख्यमन्त्री का ये बयान कहीँ से भी प्रदेश के शिक्षाकर्मी साथियो को राहत प्रदान करने वाला नही लग रहा है ,,, यदि हल ढूँढ  लिया गया है,,तो तत्काल सार्वजनिक करना चाहिये,,,वैसे शिक्षकर्मियो को खुश करने वाले बयान मुख्यमंत्री   विगत 2 वर्षो से लगातार मिडिया के माध्यम से देते रहे है ,,लेकिन सारे की सारे बयान  निराधार ही साबित होते आये है अभी तक,,,चाहे 5 तरीख तक वेतन भुगतान का हो या समस्त समस्याओ के निदान का या अन्य बयान।अतः इस बयान को भी प्रदेश के शिक्षकर्मी साथी गम्म्भीरता से नही ले रहे है ,,,सम्भाग के सभी शिक्षकर्मी 26 मई को विधान सभा संकल्प दिवस की तैयारी में जुटे हैं और निश्चिय रूप से वे अपने परिवार और अपने इष्ट मित्रों के साथ निर्धारित विधान मुख्यालय पर उपस्थित होकर संकल्प लेंगे।

प्रदीप पांडेय जिला मीडिया प्रभारी छ.ग.पं.न.नि शिक्षक संघ बिलासपुर ने कहा है कि मुख्य मंत्री कहा है कि शिक्षाकर्मियों के मामले में हल निकाल लिया गया है तो इसका स्वागत है किन्तु यह हल क्या है इसे सार्वजानिक करें लेटलतीफी किस बात की है मैं मुख्यमंत्री से कहना चाहता हूं कि इस बार हल केवल और केवल संविलियन ही स्वीकार होगा।  रही बात चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री के बयान का की चुनावी वर्ष में हड़ताल आम है तो ऐसा नहीं है शिक्षाकर्मी विगत 20 वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं । यह लड़ाई चुनावी कहां है आप स्वयं घोषणा करते हैं अपने संकल्प पत्र में लिखते हैं और उसे पूरा नहीं करते तो शिक्षाकर्मी करे क्या ।

Comments

  1. By प्रदीप पांडेय

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *