शिक्षा कर्मी संविलयनःMP में घोषणा के बाद अब तक रत्ती भर भी आगे नहीं बढ़ा विभाग,दबाव बनाने 25 को छिंदवाड़ा में संघर्ष समिति का बड़ा कार्यक्रम

भोपाल । मध्यप्रदेश के मुख्यंमत्री की ओर 21 जनवरी को  अध्यापकों के लिए घोषणा की गई कि “आज से सब शिक्षक कहलाएंगे” और अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाएगा। एक माह से अधिक का समय हो गया है लेकिन शासन क्रियान्वयन की दिशा में रत्ती भर भी आगे नहीं बढ़ी है। पूर्व के कड़वे अनुभव और शासन की सुस्त कार्यप्रणाली से मध्यप्रदेश का अध्यापक आशंकित है। अध्यापक संघर्ष समिति का स्पष्ट मानना है कि मुख्यमंत्री ने घोषणा संघर्ष के दबाव में की है। लेकिन कुछ शासन समर्पित अध्यापक संघो ने इस घोषणा के बाद स्वागत-सत्कार का लंबा सिलसिला चालू कर दिया है।जो संघर्ष के दबाव को कम कर रहा है।शासन निश्चिंत हो चुका है कि अध्यापक खुश हो गये है।जो वर्तमान परिस्थिति में गैर वाजिब और अध्यापक हित में नहीं है। इससे समाज में संदेश जा रहा है कि वर्तमान सरकार ने अध्यापकों की सारी समस्याएं हल कर दी है। जो सरासर झूठ का पूलंदा है। संघर्ष समिति लंबे संघर्ष से बने दबाव को कम नहीं होने देना चाहती ताकि शासन अध्यापक हित में त्वरित शिक्षा विभाग में संविलियन का आदेश जारी करें।
     मध्यप्रदेश अध्यापक  संघर्ष समिति के संचालक एच एन नरवरिया ने यह जानकारी देते हुए बताया कि    12फरवरी को संघर्ष समिति ने विभाग के समस्त उच्च अधिकारियों को भोपाल  मे ज्ञापन सौंपा एवं शिक्षा विभाग के स्वरुप पर चर्चा कर अध्यापकों की मंशा को स्पष्ट कर दिया। 20 फरवरी को भोपाल में प्रेस वार्ता एवं 22 फरवरी को प्रत्येक जिले मे मुख्यमंत्री के नाम से जिलाधीश को ज्ञापन देकर स्पष्ट कर दिया कि अध्यापक घोषणा का क्रियांवयन शीघ्र चाहता है और किस स्वरूप मे चाहता है..? अध्यापक संघर्ष समिति छिंदवाड़ा अध्यापकों की मांगों पर हमेशा समर्थन देने और अपने प्रभाव से अध्यापकों की मांगों को शासन के गलियारे तक पहुंचाने के लिए 25 फरवरी को छिंदवाड़ा में राष्ट्रीय नेता एवं सांसद छिंदवाड़ा कमलनाथ का अभिनंदन करने जा रही है ।ताकि शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा के क्रियांवयन का दबाव बना रहे। इसी दिन छिंदवाड़ा जिले के जांबाज साथी जिन्होने अपने संघर्ष के दम पर अध्यापकों को शिक्षा विभाग में संविलियन के मुहाने तक पहुंचाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उन साथियों का भी सम्मान किया जाएगा। अध्यापक हित में “केस त्याग” का साहसिक निर्णय लेने वाली चारों बहनों का  उपस्थित होने पर सम्मान किया जाएगा।संघर्ष समिति “केस त्यागी” साहसी बहनों को आमंत्रित कर चुकी है। मुख्यमंत्री की मंशा रही है कि मध्यप्रदेश मे शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़े। संघर्ष समिति इस मामले में भी संजीदा है और इसी दिन शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने में योगदान देने वाले और नवाचार करने वाले जिले के अध्यापक साथियों का भी सम्मान किया जाएगा।*
         नरवरिया ने बताया कि संघर्ष समिति पूर्व मे ही स्पष्ट कर चुकी है की शिक्षा विभाग में संविलियन हमें शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक, गुरुजी, नियुक्ति दिनांक से चाहिए। सितंबर 2013 से मय एरिअर छटवा वेतनमान चाहिए। राज्य शासन के अन्य कर्मचारियों की भाँति जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान मय एरिअर चाहिए। शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षक संवर्ग के समान पदनाम, सेवाशर्ते, सुविधाएं, अधिकार, शास्तिया, 1994 के नियमित शिक्षक संवर्ग के नियमानुसार चाहिए। सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता पदनाम लिखने का त्वरित आदेश चाहिए एवं किसी भी स्थिति में 30 अप्रैल के पूर्व शिक्षा विभाग में संविलियन का समग्र आदेश चाहिए। संघर्ष समिति इसी दिन अभी हाल ही मे बनाये गये संभागीय संयोजको की बैठक भी करने जा रही है। जिसमें शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा के उपरांत की स्थिति पर चर्चा की जाएगी। संघर्ष की आगामी रणनीति बनाई जाएगी। संघर्ष समिति के विस्तार हेतु संभागीय सहसंयोजक जिला संयोजक-सहसंयोजक, विकासखंड संयोजक-सहसंयोजक बनाये जाने पर चर्चा की जाएगी।  1 मई को भोपाल में पूर्वघोषित संघर्ष समिति के आयोजन पर चर्चा की जाएगी। अध्यापक संघर्ष समिति ने मध्यप्रदेश के प्रांतीय संचालन समिति सदस्यों एवं अध्यापक संघर्ष समिति छिंदवाड़ा प्रदेश के तमाम संघर्षशील अध्यापकों से अपील की है कि 25 फरवरी को छिंदवाड़ा आयोजन में सहभागिता निभा कर अधिकारियो के लिए प्रेरणा का काम करे कि मुख्यमंत्री की घोषणा “शिक्षा विभाग मे संविलियन” का शीघ्र क्रियान्वयन करे।

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