मेरा बिलासपुर

शिक्षा में बदलाव के लिए आपसी सहयोग जरूरी

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बिलासपुर। शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग एवं आधुनिक तकनीकी के समावेश के साथ ही बदलाव लाये जा सकते हैं ।इस हेतु मानव संसाधन विकास केंद्र एक अहम भूमिका निभा रहा है। यह बात गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर अंजिला गुप्ता ने कही। विश्वविद्यालय स्थित यूजीसी- मानव संसाधन विकास केंद्र में आयोजित महाविद्यालयों के प्राचार्यो की एक दिवसीय बैठक में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सहभागिता आधारित शिक्षा, सुझाव एवं समीक्षा के परस्पर समन्वय से आशातीत परिणाम हासिल किये जा सकते हैं।

इसके पश्चात प्रथम तकनीकी सत्र में पावर प्वाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से डॉ. रत्नेश सिंह ने मानव संसाधन विकास केन्द्र के संचालन व प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संबंध में प्राचार्यो को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि साल 2009 से वर्तमान तक मानव संसाधन विकास केन्द्र द्वारा 47 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं  । जिसमें लगभग 1300 प्रतिभागी प्रशिक्षित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अकादमिक स्टाफ कॉलेज की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी तथा यू.जी.सी. की नवीन मार्गदर्शिका के अनुसार 1 फरवरी 2015 से अकादमिक स्टाफ कॉलेज का नाम परिवर्तित कर मानव संसाधन विकास केन्द्र कर दिया गया है।

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द्वितीय तकनीकी सत्र की शुरुआत करते हुए प्रोफेसर मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि सभी प्राचार्य अकादमिक शोधकर्ता हैं। प्राचार्यो को उन विषयों पर शोध करना चाहिए जिससे कि छात्रों का गुणात्मक विकास हो। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों में नेतृत्व के विभिन्न आयामों पर चर्चा की तथा मुख्य रूप से शैक्षणिक संस्थाओं के स्वायतता तथा नेतृत्व क्षमता के विकास में गुणात्मक सुधार पर चर्चा की।

इस बैठक में प्रतिभागी प्राचार्यो ने यह स्वीकार किया कि विविधताओं से परिपूर्ण इस देश में एक ही मापदण्ड सभी के लिए समान रूप से लागू किया जाना संभव नहीं है और यही बात हमारी वर्तमान उच्च शिक्षा व्यवस्था पर भी लागू होती है। विशेष रूप से क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम के विभिन्न आयामों के फायदे एवं उनके क्रियान्वयन की कठिनाईयों के साथ-साथ उनके गंभीर दुष्परिणामों पर भी चर्चा की।

राज्य स्तर पर केंद्रीय विश्वविद्यालय सम्मानित

फीडबैक व इन्टरएक्शन सत्र में उप निदेशक डॉ. रत्नेश सिंह ने समस्त प्राचार्यो से एच.आर.डी.सी. द्वारा आयोजित किये जाने वाले विभिन्न ओरियेन्टेशन, रिफ्रेसर कोर्स, शार्ट टर्म कोर्स आदि में सहायक प्राध्यापकों की सहभागिता पर भी प्रकाश डाला गया। प्राचार्य बैठक में 56 प्रतिभागी विभिन्न महाविद्यालयों के उपस्थित हुए। एच.आर.डी.सी. की सहायक निदेशक डॉ. आरती सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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