श्रीमद्भागवत कथा…भगवान की शादी में भक्त हुए शामिल..भजन से गूंजा पंडाल

IMG-20170616-WA0008(1)बिलासपुर—रतनपुर रोड में गतौरी से तीन किमी दूर स्थित ग्राम जलसो में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह चल रहा है। शुक्रवार को पं. अनिल शर्मा ने बालकृष्ण लीला, कंसवध और रुक्मणि विवाह प्रसंग का वर्णन किया। पं. शर्मा ने भक्तों को बताया कि कथा सुनने से सभी दुख दूर हो जाते हैं। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को संगीतमयी और मधुर भजनों से भगवान कृष्ण लीला का रसपान कराया। कंस वध प्रसंग में बताया कि मथुरा का राजा कंस अत्याचारी था। मामा कंस के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान कृष्ण ने उसका वध किया। कथा के दौरान कृष्ण रुक्मणि विवाह की सजीव मनोरम झांकी सजाई गयी।

                               आचार्य ने बताया कि कंस के पिता उग्रसेन को मथुरा का राजा बनाया गया। भगवान बांके बिहारी शिक्षा लेने संदीपनी आश्रम उज्जैन गए। भगवान ने मात्र 64 दिन में ही विद्या का अध्ययन कर लिया। विद्या अर्जन के बाद भगवान कृष्ण मथुरा आए। मथुरा में भगवान कृष्ण का एक मित्र उद्धव था। उद्धव को भी अपने ज्ञान का अहंकार था। भगवान ने उद्धव को मथुरा से वृंदावन भेजा, उद्धव ने कहा कि हे बृजवासी ग्वाले मेरे ज्ञान को नहीं समझ पाएंगे।  भगवान ने कहा कि आप जाओ तो सही। भगवान के कहने पर उद्धव वृंदावन गए, उन्होंने देखा कि गोप ग्वाल माता यशोदा और गोपियां कृष्ण की याद में रुदन कर रहे हैं। यह सब देखने के बाद उद्धव आश्चर्यचकित हो गए।

                                                       उद्धव ने गोपियों से योग विद्या के जरिए भगवान को हासिल करने को कहा। गोपियों ने कहा कि उद्धव तुम भय, बौरे जो पाती लेकर आए दौड़े आए। तेरा योग कौन जाने? यहां रोम-रोम में श्याम बसे हैं…। इतने सुनते ही उद्धव ने गोपियों के चरणरज को अपने मस्तक पर लगा दिया। इसके बाद उद्धव मथुरा लौट आए। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका के राजा बने। द्वारिका में निवास करने लगे।

                   महाराज ने भक्तों को बताया कुंडिलपुर के राजा की पुत्री का नाम रुक्मणी था। रूक्मणि विवाह योग्य हो गई। रूक्मणि के बड़े भाई रूक्मिण ने बहन की शादी शिशुपाल के साथ निश्चय किया। यह सुनकर रूक्मणि को कष्ट हुआ। रुक्मणि ने कहा मैं तो कृष्ण को अपना पति मान चुकी हूं, उनके साथ ही विवाह करूंगी। रूक्मणि ने सारी बांते अपनी भाभी को बताई। भाभी ने कहा कि तुम भगवान कृष्ण को पत्र लिखकर पंडित जी के हाथों द्वारिका नरेश तक पहुंचा दो। द्वारिकाधीश आएंगे और आपको हरण कर ले जाएंगे। रुकमणि का पत्र भगवान के पास पहुंचा। भगवान श्रीकृष्ण ने कुंडिलपुर पहुंचकर, कात्यायनी माता के मंदिर से रूक्मणि का हरण कर द्वारिका लाया। माता रूकमणि के साथ धूमधाम से विवाह किया।

भक्तों ने किया झांकी दर्शन

                कथा पंडाल के नीचे श्रीकृष्ण रुक्मणि विवाह की सुंदर सजीव झांकी सजाई गयी। निधि दुबे कृष्ण बनी। भक्त लोगों ने दर्शन लाभ लिया। सभी को प्रसाद वितरण किया गया। कथा स्थल में गौरीशंकर तिवारी, रमेश तिवारी, रामप्रसाद तिवारी, महिला बाल विकास की पर्यवेक्षक प्राची सिंह ठाकुर, राकेश तिवारी समेत भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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