संसद में पास हुआ ग्रेच्युटी संशोधन बिल,20 लाख की रकम होगी टैक्स फ्री

नईदिल्ली।ग्रेच्युटी से संबंधित भुगतान (संशोधन) विधेयक 2018 को गुरुवार को संसद ने पास कर दिया। विधेयक में निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के ऐसे कर्मचारियों के ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा में वृद्धि का प्रावधान है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएस (पेंशन) नियमावली के अधीन शामिल नहीं हैं।अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया है और यह रकम टैक्स फ्री होगी।लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पास कर चुकी है।

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हंगामे के बीच इस संशोधन विधेयक 2018 को श्रम और रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगवार के अनुरोध पर बिना चर्चा के ही सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।गंगवार ने विधेयक पेश करते हुए कहा, ‘यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और मैं अनुरोध करता हूं कि इसे चर्चा के बिना पारित कर दिया जाए।’विधेयक के तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘मैटरनिटी लीव की अवधि’ को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि अभी दस अथवा अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 लागू है जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पांच वर्ष की नियमित सेवा प्रदान की है।सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के लिये ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया।इसलिए निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के मामले में भी महंगाई और वेतन वृद्धि पर विचार करते हुए सरकार का अब यह विचार है कि इस एक्ट के अधीन शामिल कर्मचारियों के लिए ग्रेच्यूटी की पात्रता में संशोधन किया जाना चाहिए।

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