सद्भावना दिवस के परिपत्र से राजीव गाँधी का नाम हटाए जाने का विरोध

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        रायपुर ।    सद्भावना दिवस के परिपत्र में पूर्व प्रधान मंत्री स्व. राजीव गाँधी का नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस संगठन ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने इसे बीजेपी सरकार की दुर्भावना करार देते हुए कहा है कि इस कृत्य के लिए जो भी दोषी है उसे देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि  भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के जन्म दिवस 20 अगस्त को प्रति वर्ष ‘‘सदभावना दिवस’’ के रूप में मनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी  विचारों के अनुसार समस्त धर्मो,भाषाओं और क्षेत्र के लोगों में राष्ट्रीय एकता, अखण्डता तथा साम्प्रदायिक सौहार्द स्थापित  करने से ही भारत में शांति और समृध्दि लाई जा सकती है। सदभावना दिवस मनाने के पीछे मुख्य विचार हिंसा को समाप्त करना तथा लोगों में सदभावना का संवर्धन करना है।
हमारे देश के महापुरूषों तथा सर्वोच्च पदों पर आसीन अतिविशिष्ट व्यक्तियों के जन्म दिवस को उनके विचारों के अनुरूप नाम देकर प्रतिवर्ष समस्त संस्थाओं, शालाओं,कार्यालयों इत्यादि में पर्व के रूप में मनाने के पीछे मंशा यही रही है कि,आने वाली पीढ़ी उन महापुरूषों को याद रख सके तथा उनका अनुकरण कर सके। जैसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू  के जन्म दिन को ‘‘बाल दिवस’’, पूर्व राष्ट्रपति डाॅ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को ‘‘शिक्षक दिवस तथा पूर्व प्रधानमंत्री चौ.चरण सिंह के जन्म दिवस को ‘‘किसान दिवस’’ के रूप में मनाया जाता है।
किन्तु केन्द्र तथा राज्य की भाजपा सरकारों ने 20 अगस्त  को पूर्व प्रधानमंत्री    स्व.  राजीव गांधी  के जन्म दिवस पर  ‘‘सदभावना दिवस’’ मनाये जाने हेतु जारी कार्यालय आदेशों में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी का नाम ही हटा दिया है,जो कि भाजपा सरकार की संकीर्ण राजनैतिक मानसिकता का परिचायक है। सरकारें आती-जाती रहती है,किन्तु ऐसी परंपराओं का उदभव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है। जिन महापुरूषों ने देश के लिए अपने जान की कुर्बानी दे दी,उनके नाम के साथ ऐसा व्यवहार कदापि न्यायसंगत नहीं हो सकता। इस कृत्य के लिए जो भी दोषी होंगे,उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी होगी।
किसी भी देश के नागरिकों के लिए अपने पूर्व प्रधानमंत्रियों का नाम बड़े आदर,सम्मान के साथ लिया जाता है तथा लोग गर्व महसूस करते है। किन्तु केन्द्र तथा राज्य की इस वैचारिक द्वेषपूर्ण कार्यवाही के कारण आने वाली पीढ़ी को शायद यह जानकारी नही हो सकेगी कि,जो दिवस वो मना रहे हैं,वह किस महापुरूष की याद में है तथा देश के लिए उनके योगदान व बलिदान के क्या मायने है।   राज्य सरकारें किसी राजनैतिक पार्टी से जुड़ी होती है तथापि सरकार में आने के बाद सभी दलों, जाति,वर्ग,समुदाय,क्षेत्र के लिए समान आदर-भाव रखना चाहिए,यही भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री राजीव गांधी  के संकल्पनाओं का भारत है और यही ‘‘सदभावना दिवस’’ का मूल उद्देश्य भी है।

इस तरह की साजिश से जनता के दिलों से नाम नहीं मिटेगा
इसी तरह  केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के परिपत्रों से स्व. राजीव गांधी का नाम हटाये जाने का कड़ा विरोध करते हुये प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भारत रत्न स्व. राजीव गांधी  का जन्म दिवस सद्भावना दिवस के रूप में मनाया जाता है। केन्द्र और राज्य सरकार के परिपत्रों में स्पष्ट रूप से स्व. राजीव गांधी के जन्म दिवस को सद्भावना दिवस के रूप में मनाने का उल्लेख होता रहा है। केन्द्र और राज्य सरकार के द्वारा स्व. राजीव गांधी का नाम हटा दिया गया है। किसी एक सरकार के परिपत्र में छूटा होता तो यह गलती से हुआ है माना जा सकता था। केन्द्र और राज्य सरकार दोनों के परिपत्र में स्व. राजीव गांधी का नाम न होने से स्पष्ट है कि यह जानबूझकर छोड़ा गया है। यह केन्द्र और राज्य की भाजपा सरकारों द्वारा की गयी सोची समझी साजिश है। कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करती है। संचार क्रांति, कम्प्यूटर क्रांति, आईटी क्रांति कर 21वीं सदी के भारत की नीव रखने वाले स्व. राजीव गांधी के कार्यो का मुकाबला तो भाजपा की सरकार नहीं कर पा रही है। इस तरह से स्व. राजीव गांधी का नाम हटाये जाने से पूरे देश में खासकर युवा वर्ग में विपरीत प्रतिक्रिया हो रही है। जनता के दिलो से इस तरह के फासीवादी कार्यो से स्व. राजीव गांधी  को नहीं हटाया जा सकता।

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