सर्वदलीय बैठक में सोनिया गांधी ने कहा-कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दल सैनिकों के साथ एकजुट,सरकार से पूछे ये सवाल

दिल्ली।भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दल हमारे सैनिकों के साथ पूरी तरह एकजुट है। हमारी सेनाएं सभी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। इसके लिए हम कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है।उक्त बातें आज सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रिमार्क की है। सोनिया गांधी ने कहा कि हम आज एक दर्दनाक टकराव के बाद मिल रहे हैं। हमारे मन गहरी वेदना और आक्रोश से भरे हैं। सबसे पहले मैं अपनी सेना के उन सैनिकों को श्रद्धांजलि देती हूं जिन्होंने सीमा पर अपने प्राणों की आहुति दी। मैं उनके शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं। जिन्होंने अपने प्रिय जनों को खोया।सीजीवालडॉटकॉम के WhatsApp NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

मेरे विचार से यह बैठक सरकार को लद्दाख और अन्य जगहों पर चीनी घुसपैठ की 5 मई की खबरें मिलने के तुरंत बाद बुलानी चाहिए थी। हमेशा की तरह पूरा देश एक चट्टान की तरह साथ खड़ा होता और देश की सीमाओं की अखंडता की रक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम में अपना पूरा सहयोग देता।खेद इस बात का है कि ऐसा नहीं हुआ। वास्तव में इतना समय गुजर जाने के बाद भी संकट के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में हमें अंधेरे में रखा गया है।देश की ओर से सरकार से हमारे कुछ सवाल हैं चीनी सेना ने लद्दाख में हमारे क्षेत्र में किस तारीख को घुसपैठ की? सरकार को हमारे क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के बारे में कब जानकारी हुई? खबरों की मानें तो घुसपैठ 5 मई को हुई क्या यह सही है?या फिर घुसपैठ उसके बाद हुई? क्या सरकार को नियमित रूप से हमारे देश की सीमाओं की सेटेलाइट इमेजेस नहीं मिलती है? क्या हमारी खुफिया एजेंसियों ने लाइन आफ एक्चुअल कंट्रोल पर घुसपैठ की जानकारी नहीं दी?क्या सेना की इंटेलिजेंस ने सरकार को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीनी कब्जे और भारतीय क्षेत्र में चीनी सेना की मौजूदगी के बारे सचेत नहीं किया क्या? सरकार यह स्वीकार करेगी कि यह इंटेलिजेंस फेलियर है?

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कांग्रेस पार्टी का यह मानना है कि 5 मई से लेकर 6 जून के बीच का बहुमूल्य समय हमने गवा दिया. जब दोनों देश के कोर कमांडर की बैठक हुई. 6 जून की इस बैठक के बाद भी चीन के नेतृत्व में राजनीतिक और कूटनीतिक स्तरों पर सीधे बात क्यों नहीं की गई. हम सभी मौकों का लाभ उठाने में नाकाम रहे. आज परिणाम यह है कि हमारे 20 बहादुर जवानों की दर्दनाक शहादत हुई और कई घायल हुए.

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह हमसे सभी जानकारी साझा करें और इस साल अप्रैल से लेकर आज तक के सारे हालात की जानकारी दें. प्रश्न यह है कि अब आगे क्या ?आगे का रास्ता क्या होगा? कांग्रेस पार्टी की ओर से हम यह भी जानना चाहेंगे कि चीनी सेना की वापसी के बारे में क्या कार्यवाही चल रही है? हम सरकार से यह स्पष्ट आश्वासन चाहेंगे कि पूरे सीमा क्षेत्र में पहले की यथास्थिति हर हालत में सुनिश्चित होगी. चीन पहले की तरह लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर पुरानी स्थिति में अपनी सेना की वापसी करेगा.

सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री से उम्मीद करते हुए कहा कि देश के सामने किसी भी खतरे से निपटने के लिए सेना की तैयारियों की जानकारी भी हमें देंगे. मैं यह भी पूछना चाहूंगी कि यूपीए सरकार द्वारा अप्रैल 2013 में मंजूर की गई माउंटेन स्ट्राइक कोर के गठन के बारे में मौजूदा स्थिति क्या है? इसको के तहत मंजूर की गई दो माउंटेन इन्फैंट्री डिवीजन के गठन में क्या प्रगति है?

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित सारे विपक्षी दल हमारे सैनिकों के साथ पूरी तरह एकजुट है. हमारी सेनाएं सभी चुनौतियों से निपटने में सक्षम है. इसके लिए हम कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है. देश के लोग सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह पूरे देश और विपक्ष को विश्वास में ले और लगातार पूरे घटनाक्रम की जानकारी दें. तभी हम दुनिया के सामने अपनी एकजुटता और सहयोग सुनिश्चित कर सकेंगे.

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