सस्ता चांवल अब सरकार के गले की हड्डी….? भटक रहे गरीब…कालाबाजारी भी जारी

तखतपुर ( टेक चंद कारड़ा ) ।  जिस चांवल के बल पर सरकार तीसरी पारी खेल रही है आज वहीं चांवल सरकार के गले की हड्डी बन गई है और आधार कार्ड लिंक न होने के नाम पर प्रतिमाह खाद्य विभाग द्वारा राशन कार्ड से परिवार के सदस्यों का नाम काट दिया जाता है। एक वर्ष से परिवार के सदस्य राशन कार्ड में नाम जोड़वाने के लिए कई बार पूरे दस्तावेज जमा कर चुके है । पर आज पर्यंत नाम नही जुड़ पाया है । जिसके कारण राशन इनको नही मिल पा रहा है  । राशन नही मिलने के कारण अपना गुस्सा जनप्रतिनिधियों  के ऊपर निकालने में लगे है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने तीसरे चुनाव का आगाज किया था तो चांवल को ब्रम्हात्र बनाते हुए लोगों से वोट ले लिए। परंतु  किए गए  अपने वादे को पूरा नही कर पाए। लोगों को पहले 35 किलों चांवल दिया गया। इसके कुछ दिन बाद सरकार ने अपना रंग बदलना शुरू किया और चांवल को 35 के बदले प्रति व्यक्ति 7 किलों के हिसाब से देने का नियम बनाया । फिर इसमें जब लोगों के घरों में सदस्य संख्या बढऩे लगे तो वे इन बढ़े हुए सदस्यों का चांवल लेने के लिए नाम जोड़वाने के लिए विधिवत आवेदन खाद्य विभाग को जमा किए। लेकिन खाद्य विभाग ने इस आवेदन को रद्दी को टोकरी में फेंक दिया । जिससे लोगों को अपने घरों में रहने वाले सदस्यो के हिसाब से चांवल नही मिल पा रहा है।
भटक रहे गरीब-

नगरपालिका क्षेत्र वार्ड क्रमांक 3 की महिला श्रीमती कमली बाई पति मदन सिंह ने आज मुख्य नगरपालिका अधिकारी को बताया कि पिछले एक वर्ष से उसके दो बच्चों का नाम राशन कार्ड से काट दिया गया है। पति शरीरिक रूप से अक्षम है। घर में खाने – पीने के लाले पड़े हुए है और चार बार वह नाम जोड़वाने के लिए औपचारिकता पूरी की है ।  सुराज अभियान में भी आवेदन दिया था। समाधान शिविर में जब पता किया तो नाम जुड़कर नही आया है। वार्ड क्रमांक 4 के अजय केनार, धर्मेंद्र टण्डन, इंद्रपाल सिंह ठाकुर, शशी गुप्ता, दुलारिन बाई, ललिता यादव, कलावति, आयुष बेगम, मीना खेर, सीमा गोस्वामी, सरिता यादव, सुप्रिया कैवर्त, पूर्णिमा बाई, जमुना बाई, प्रीति मसीह, भरत साहू, शत्रुहन साहू, सरस्वती बाई कैवर्त, नगीना परविन, वनिता गेंदले, मलका बानो, हसन अली, पुष्पा केनार, पार्वती पाल, सुनीता धुरी, कुंवारा बाई, सकुन बाई विश्वकर्मा, कांति निर्मलकर, ज्ञान मसीह, कुंती बाई ठाकुर, राखी केनार, ननकुसिया बाई देवांगन, रन्नों सिंह, द्रुपति केनार, सावित्री टण्डन, फातिमा कौशल, चम्पा बाई, जमुना बाई सोनी, कुमारी साहू, लक्ष्मी बाई, सरोजनी भोई, सीमोन मसीह, वार्ड नम्बर 5 आशीष लाल सहित 17 आवेदक ऐसे है, जिनके परिवार के सदस्यों का नाम राशन कार्ड से कट गया है और नाम जोडऩे के लिए कई बार आवेदन किया है ।  पर आज तक नाम जुड़कर नही आया है। मजे की बात यह है कि सभी आवेदकों ने लोक सुराज के दो कैम्पों में नाम जोडऩे के लिए आवेदन दिया है  । पर आज पर्यंत तक नाम नही जुड़ा है।
चांवल और शक्कर की काला बाजारी-

राशन लेने के लिए जब गरीब परिवार राशन दुकान में जाता है तब विक्रेता  टेबलेट में राशन कार्ड का नम्बर देखकर जब अंकित करता है तब पता चल जाता है कि कितने सदस्य वर्तमान में है। कई बार ऐसा भी होता है नाम जुड़ चुके होते है और आबंटन में राशन उस गरीब परिवार का आ जाता है ।पर राशन कार्ड में नाम न होने के कारण दुकानदार उतना ही राशन देता है। जितने परिवार के सदस्य अंकित है और बचे हुए चांवल और शक्कर की काला बजारी करता है। किसी भी राशन दुकान में 16 रूपए किलों चांवल और 30 रूपए किलों शक्कर आसानी से मिल जाती है। और इसकी भी शिकायत पार्षद टेकचंद कारड़ा ने सीएमओं से की है।
नाम जुड़ गया राशन नही मिल रहा

– खाद्य विभाग में नाम जोडऩे के लिए दिए गए आवेदन के कई आवेदकों के नाम राशन कार्ड में जोड़ दिए गए है ।  यह सब खाद्य विभाग की इंटरनेट की वेब साईड में देखा जा सकता है। टिकरीपारा वार्ड क्रमांक 3 के मीला बाई ठाकुर के नाम राशन कार्ड के सूची में दो नये नाम पिछले दो माह से जोड़ दिया गया है । पर सोसायटी में यह कहकर राशन नही दिया जाता कि अभी तक नाम नही जुड़ा है ।  जबकि इंटरनेट में यह देखा जा सकता है कि उक्त राशन कार्ड में सदस्यों का नाम जोड़ दिया गया है  । इसके बावजूद परिवार के सदस्यों को राशन न मिलना समझ से परे है।
दूरस्थ क्षेत्रों में बुरा हाल-

खाद्यान वितरण प्रणाली योजना की असफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विकसित, पहुंच एवं जागरूक क्षेत्रों में लोगों को राशन कार्ड में नाम जोडऩे के लिए सालों साल भटकना पड़ रहा है । तो पहुंच विहिन क्षेत्रों में इस योजना का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है ।  जहां चांवल लेने के लिए लोगों को कई किलो मींटर पैदल चलना पड़ता है ।  ऐसे में उनके कागजों पर क्या कार्यवाही की जाती होगी। सरकार ने यह भी नियम बनाया था कि लोगों को राशन लेने में कोई असुविधा न हो इसलिए किसी भी राशन दुकान में जाकर अपना राशन ले सकता है । लेकिन यह केवल मुंगेरी लाल का सपना ही साबित हुआ।
समाधान शिविर में निराकृ त नही हुए

– प्रदेश के मुखिया पूरे प्रदेश में औचक निरीक्षण कर प्रदेश के जनता की तकलीफ को जानने के लिए भरी दूपहरी में गांव गावं धूल खाक रहे है ।  पर एसी कमरों में बैठे  अफसरों को प्रदेश के गरीब जनता की इस बात से बिल्कुल मतलब नही है कि गरीब जो आवेदन दिए है उनका वास्तव में क्या हुआ। नगरपालिका तखतपुर में सुराज अभियान के दौरान 227 गरीब परिवार के राशन कार्ड धारियों ने राशन कार्ड से उनके परिवार के सदस्यों का नाम कटने की शिकायत की थी और सभी आवेदकों ने पूरी औपचारिकता पूरी कर नाम जोडऩे का आवेदन किया था। सुराज अभियान शिविर को दो माह हो गए और सरकार प्राप्त आवेदनों को निराकरण करने की बात कहकर  समाधान शिविर आयोजित कर रही  है । पर दो माह बाद भी सिर्फ खाद्य विभाग के आवेदनों का निराकरण नही हो पाया है ।  अलबत्ता यह कल्पना की जा सकती है । जब वास्तविक कार्य जो शासन को करना है वे नही हो पाया  है ।  ऐसे में सुराज अभियान में आए हजारों आवेदनों का निराकरण और समाधान क्या हुआ होगा , यह इस बात से चला चलता है कि समाधान शिविर की सूचना आवेदकों को ही नही दी गई थी। और न ही इसका प्रचार प्रसार किया गया था।
तखतपुर के फुड इंस्पेक्टर निखिलेश तम्बोली कहते हैं कि लोक सुराज अभियान में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का जिन सदस्यों का नाम कटा है जोडऩे की प्रक्रिया जारी है इसका निराकरण शीघ्र हो जाएगा।
उधर  तखतपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शिवबालक कौशिक काकहना है कि उपचुनाव के नतीज बता रहे है कि जनता भाजपा शासित प्रदेशों में परेशान है। प्रदेश सरकार भी गरीबों का शोषण कर रही है । आने वाले समय में जनता सबक सिखाएगी।
इस बारे में तखतपुर नगर पंचायत सीएमओ पूजा पिल्ले ने कहा कि गरीबी रेखा से परिवार के सदस्यों के कटे नाम को जोडऩे के लिए खाद्य शाखा में सम्पूर्ण आवेदकों द्वारा जब जब आवेदन दिया जाता है तब खाद्य शाखा भेज दिया जाता है । नाम नही जुड़कर आने की जानकारी कलेक्टर को दी जाएगी।

 


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  1. By Jitendra pandey

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