सहायक शिक्षक फेडरेशन पर उठ रहे सवाल, शिक्षक नेता आलोक पांडेय ने लगाया शिक्षकों को बरगलाने का आरोप

बिलासपुर।शिक्षक नेता आलोक पांडेय ने छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल करते हुए कहा कि
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन एक ओर मुख्यमंत्री से मुलाकात करता है। बाद में उन्ही के विरोध में नारे लगाते हैं। दूसरे शिक्षाकर्मी संगठन के लोग जब मुख्यमंत्री का स्वागत करते हैं तो मुख्यमंत्री के सम्मान के विरोध के लिए धिक्कार रैली निकालते हैं। किन्तु उसके दूसरे दिन मुख्य सचिव से जाकर मिलते हैं और मांग पूरा करने के लिए ज्ञापन देते हैं।
आखिर इन सब के पीछे फेडरेशन की रणनीति क्या है…?

आलोक ने कहा कि कभी सरकार के खिलाफ धिक्कार रैली निकालना फिर बिना किसी बुलावे के जाकर मुख्य सचिव से मिलना। आखिर चक्कर क्या है ..?

नेता आलोक पांडेय ने बताया कि, सबसे कम वेतन वर्ग तीन का है यह सच्चाई है। इसके लिए सब लड़ रहे है। परंतु फेडरेशन तो वर्ग 3 के शिक्षकों की भावनाओं के साथ खेल रहा है। सबको पता है चुनाव एकदम नजदीक है। आचार संहिता कभी भी लग सकती है। आनन फानन में बिना किसी रणनीति के राजनीतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए फेडरेशन के चंद नेता आंदोलन की शुरुवात कर दिए किन्तु इस आंदोलन का कोई परिणाम आते नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में इस आंदोलन को कैसे समेटा जाए यह सोचने लगे हैं इसी चक्कर में कोई भी ऊटपटांग कार्य कर रहे हैं ।

आलोक ने कहा कि फेडरेशन के कुछ नेता भोले भाले मासूम शिक्षकों को बरगला रहे हैं। प्रदेश के अधिकांश शिक्षाकर्मी अब शिक्षक संवर्ग एलबी सरकारी कर्मचारी बन चुके हैं। ऐसे में सोशल मीडिया में भ्रामक खबरें सरकार विरोधी नारे, सरकार विरोधी पोस्ट ठीक नहीं है। शिक्षकों को कर्मचारी हैंडबुक सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965 का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। कल को भावनाओं में बहकर आम सहायक शिक्षकों के विरुद्ध यदि कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही होती है तो फेडरेशन के लोग क्या करेंगे…।

आलोक पाण्डेय ने बताया कि मोर्चा के आंदोलन के दौरान बड़े स्तर पर निलंबन बर्खास्तगी जैसे कार्यवाही हुई थी जिसे बाद में शून्य घोषित करवाया गया था। किन्तु तब मोर्चा की जो सबसे बड़ी ताकत थी वह थी मोर्चा की एकता प्रदेश के एक लाख अस्सी हजार शिक्षा कर्मी तब एक साथ थे। साथ ही तब हम सब निकायों के अंदर में नियोजित कर्मचारी हुआ करते थे कार्यवाही के लिए सामान्य प्रशासन समिति का अनुमोदन जरूरी था।किन्तु आज ऐसी स्थिति नहीं है। फेडरेशन एक वर्ग विशेष के साथ चल रहा है क्या ऐसे में कल को कोई कार्यवाही होती है तो क्या कार्यवाही में वापस होगी।

भावनाओं में बहकर बहने वाले सहायक शिक्षकों को समझना जरूरी है कि आंदोलन की नीति रणनीति अनुभव से आती है शिक्षक संघ की नींव रखने वाले संजय शर्मा के पास उसका 23 साल का अनुभव है जो शिक्षाकर्मी आंदोलनों में सभी शिक्षा कर्मियों को सकुशल वापस लाने में काम आया है।क्या फेडरेशन के नेताओं के पास यह अनुभव है…..?भावनाओं से युद्ध नहीं जीते जाते भावना नुकसान ही पहुंचाती है फेडरेशन के नेता शिक्षको की भावनाओं से खेलना बंद करें।

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