साहबः भैंस का कर्ज चुकाना है..उसी का दूथ पीकर सेना में भर्ती हुआ..छुट्टी पाने हवलदार का लिखा कथित पत्र वायरल

इण्डिया वॉलभैंस के दूध का कर्ज चुकाना है, छुट्टी दे देजिए साहब, कांस्टेबल के नाम से वायरल हुआ पत्र साहब भैंस का बड़ा अहसान है। मुझे छुट्टी चाहिए। क्योंकि भैंस की सेवा कर कर्ज चुकाना चाहता हूं। सोशल मीडिया में फर्जी पत्र वायरल जमकर वायरल हो रहा है। फर्जी पत्र किसी हवलदार के नाम से घूम रहा है। इसमें अधिकारी से गुजारिश की गई है कि भैंस के दूध का कर्ज उतारने के लिए  अवकाश चाहिए। .

                     इन दिनों मध्यप्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़ तक एक फर्जी पत्र किसी हवलदार के नाम से सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो गया है। पत्र में हवलदार ने निवेदन किया है कि ‘साहब मेरा भैंस से मेरा पुराना लगाव है। उसी का दूध पीकर इस मुकाम तक पहुंचा हूं। भैंस का दूध पीकर ही सेना में भर्ती होने की तैयारी किया। भैंस ने हाल ही में एक बच्‍चे को जन्‍म दिया है। जिसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में मेरा फर्ज बनता है कि उसकी सेवा करूं। भैंस के दूध का कर्ज उतारूं। इसलिए अवकाश दिया जाए। 

                    सोशल मीडिया में इस मजमून का पत्र बघेलखण्ड क्षेत्र में जमकर वायरल हो रहा है। पत्र कथित फर्जी पत्र एसएएफ कमांडेंट को लिखा गया है। कथित फर्जी पत्र को लोग एसएएफ की 9वीं बटालियन में तैनात कांस्टेबल कुलदीप तोमर का होना बता रहे हैं। मामला कमाडेंट की नजर में आया तो उन्‍होंने तोमर को तलब कर कड़ी फटकार लगाई। लेकिन कांस्टेबल ने ऐसा ‘फर्जी’ पत्र लिखने से साफ इनकार किया है।

                 कथित पत्र में कथित हवलदार ने मां के स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में लिखा है। लिखा है कि मां की तबीयत खराब है। अब वायरल हो रहे पत्र की हैंडराइटिंग मिलान की बात हो रही है। ‘फर्जी’ पत्र पर एक लाख से अधिक लोगों ने कमेंट और शेयर किया है। वहीं रीवा स्थित जिला मुख्यालय में ‘फर्जी’ पत्र की चर्चा जोरों पर है। कमांडेंट आरएस मीणा ने मामले को गंभीरता से लिया है।  अनुशासनहीनता बताकर कांस्‍टेबल को निलंबित करने  की चेतावनी दी है।

                        एसएएफ की 9वीं बटालियन कमांडेंट आरएस मीणा ने बताया कि पत्र मिला है।  जिस कांस्‍टेबल की तरफ लिखा जाना बताया जा रहा है उसने ऐसे किसी पत्र को नहीं लिखने की बात कही है। पत्र की जांच करवा रहे हैं। फि‍लहाल हवलदार कुलदीप ड्यूटी में है। उसने छुट्टी का किसी भी प्रकार का आवेदन नहीं दिया है। मामले में आरक्षक का कहना है कि ‘किसी ने उसके नाम से फर्जी पत्र लिखा है।’ 

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