सामाजिक कार्यकर्ता ने बढ़ाई पूर्व सीईओ की मुसीबत…कहा FIR नहीं..तो जाउंगा कोर्ट…फर्जी मार्कशीट पर नौकरी…चला रहा एक नम्बर पर दो गाड़ी

बिलासपुर– जिला सहकारी बैंक मुख्य कार्यपालन अधिकरी के पद से हटने के बाद भी विकास गुरूदिवान की मुसीबतें कम नहीं हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता मणिशंकर ने कलेक्टर,आईजी,एसपी और सहकारी संस्थाएंं बिलासपुर को लिखित शिकायत कर गुरूद्वान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। मणिशंकर ने बताया है कि गरूद्वान की मार्कशीट से लेकर नियुक्ति तक सभी कुछ गलत है। गुरूद्वान ने धोखाधड़ी और शासन के आदेश के खिलाफ काम किया है। सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

                      सामाजिक कार्यकर्ता मणिशंकर पाण्डेय ने जिला सहकारी बैंक के पूर्व प्रभारी सीईओ विकास गुरूद्वान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मणिशंकर ने आरोप लगाया है कि गुरूद्वान ने गलत तरीके से बैंक नौकरी हासिल किया है। फर्जी अंकसूची पेश कर शासन को अंधेरे में रख अन्य प्रतियोगियों के खिलाफ धोखाधड़ी की है। गुरूद्वान दो स्कूटर से चलता है  दोनों का आरटीओ नम्बर भी एक है।  इससे जाहिर होता है कि विकास गुरूद्वान शातिर भी है।

       जिला के आलाधिकारियों को लिखित शिकायत कर मणिशंकर ने कहा कि विकास गुरूद्वान का मार्कशीट फर्जी है। शासन के निर्देश पर जांच में पाया गया है कि विकास गुरूद्वान की नियुक्ति उम्र निकलने के बाद हुई है। उन्होने कलिंगा विश्वविद्यालय का फर्जी अंकसूची पेश किया है। जबकि गुरुद्वान के पास उसी सत्र का अकलतरा महाविद्यालय से भी स्नातक अंकसूची है। दोनों अंक सूचियों में जन्म दिनांक और सन अलग अलग है। कलिंगा विश्वविद्यालय की अंकसूची केवल जन्म तारीख कम करने के लिए बनवाया गया है। जबकि अकलतरा महाविद्यालय की अंकसूची में जन्म वर्ष 1971 है। कलिंगा विश्वविद्यालय में गुरूद्वान का जन्म तारीख 1975 बताया गया है।

                   मणिशंकर के अनुसार गुरुद्वान ने नौकरी के लिए कलिंगा विश्वविद्यालय की अंकसूची के अलावा पीजीडीसीए की अंकसूची भी पेश किया है। दोनों का इनरोलमेंन्ट भी अलग अलग है। लेकिन सत्र एक है। यह जानते हुए भी एक सत्र में दो शासकीय डिग्री का प्रावधान तात्कालीन समय में नहीं था। इससे जाहिर होता है कि दोनों अंकसूचियां फर्जी तरीके से बनवायी गयी हैं। शासन के जांच में भी खुलासा हुआ है।

                                   जांच कमेटी ने आरोप लगाया है कि गुरुद्वान ने मण्डी शाखा प्रबंधक रहते हुए लाखों रूपए की आर्थिक अनियिमितता की है। किसानों की रकम को गबन किया है। जांच पड़ताल के बाद उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं ने जिला सहकारी बैंक को आपराधिक मामला दर्ज करने को कहा था। बावजूद इसके आज तक विकास गुरूद्वान के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है।

         लिखित शिकायत कर सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि जिला कलेक्टर के सामने टीएल बैठक में भी मामले को रखा जा चुका है। कलेक्टर ने भी आपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया था। बावजूद इसके एफआईआर दर्ज नहीं कराया गया । जबकि आर्थिक अनियमितता को लेकर जांंच में जांच अधिकारी एमपी श्रीवास ने गुरूद्वान को दोषी बताया था।

                       मणिशंकर ने गुरुद्वान की शिकायत आईजी से भी की है। पाण्डेय ने बताया कि पदस्थापना के दौरान विकास ने भारी आर्थिक अनिमितता के अलावा  किसानों के साथ धोखा किया है। फिर भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि आर्थिक अनियमितता के तार गहरे तक जुंडे़े हैं। लगता है उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यही कारण है कि अब एफआईआर दर्ज नहीं किया गया है।

           मणिशंकर ने बताया कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होती है तो उच्च न्यायालय के शरण में जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं होगा।

दो स्कूटर का एक आरटीओ नम्बर

                        मणिशंकर ने बताया कि विकास गुरूद्वान के पास दो स्कूटर हैं। दोनों स्कूटर अलग अलग मॉडल के हैं। लेकिन दोनों का नम्बर एक मतलब CG-10 S1488 है। इसके प्रमाण भी उनके पास हैं। दो अलग अलग माडल की गाड़ी का एक नम्बर होना गहरे अपराध की तरफ इशारा करता है। यदि यह भूल है तो सुधारा जा सकता था। लेकिन जानकारी के अनुसार एक गाड़ी खरीदी गयी है। जबकि दूसरी गाड़ी गलत तरीके से हासिल हुई है। एक गाड़ी का नम्बर दोनों स्कूटर में इस्तेमाल हो रहा है।जांच पड़ताल के बाद अपराध होना चाहिए। आखिर दूसरी गाड़ी कहीं चोरी की तो नहीं है।

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