साहब..हम बहुत गरीब हैं..भारी पड़ गया पक्का मकान..किश्त नहीं तो.हमारी झोपड़ी ही दिलवा दो

बिलासपुर–साहब..हम बहुत गरीब हैं..एक झोपड़ी थी..सरकार के कहने पर उसे भी हम लोगो ने तोड़ दिया..दूसरी बारिश है…जैसे-तैसे पिछली बारिश तो गुजर गयी। लेकिन अब खुले आसमान के नीचे परिवार पालना मुश्किल हो गया है। यह बातें तखतपुर ब्लाक के घोरामार गांव के एक दर्जन से अधिक लोगों ने जिला प्रशासन से लिखित में कही है। पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री आवास के चक्कर में हम कहीं के नहीं रहे। किश्त नहीं मिलने से हमारा आधा अधूरा मकान अब बारिश से खण्डर होता जा रहा है।

                       करीब 45 साल के हेमकुमार साहू ने बताया कि वह रोजी मजदूरी का काम करता है। गांव में एक झुग्गी झोपड़ी थी। प्रधानमंत्री आवास के लालच में झोपड़ी को सरपंच के कहने पर तोड़ दिया। उम्र से ज्यादा बूढ़ा नजर दिखने वाला हेमकुमार ने बताया कि कमोबेश एक दर्जन लोगों के साथ ऐसा ही हुआ है।

                    हेमकुमार ने बताया कि साल 2019 से अब तक एक दर्जन से अधिक बार कलेक्टर कार्यालय आकर दरखास्त कर चुके हैं। लेकिन गरीबों की कोई सुनवाई नहीं है। साल 2019 में हम गरीबों की एक मात्र सम्पत्ति प्रधानमंत्री आवास योजना की भेंट चढ़ गयी। लालच में आकर हमें अपनी झोपड़ी से हाथ धोना पड़ा। सरपंच ने बताया कि सरकार झुग्गी झोपड़ी वालों को पक्का मकान बनाकर दे रही है।

               दो एक किश्त मिलने के बाद मकान निर्माण का कार्य अधूरे पर ही रोक दिया गया। सरपंच ने बताया कि तीसरी किश्त आने के बाद मकान बनाया जाएगा। दो साल बीत जाने के बाद भी आज तक तीसरी किश्त नहीं मिली है। सरपंच अब कहता है कि शांत रहो..जल्द ही किश्त मिल जाएगी।

                         काफी दुखी नजर आ रहे हेमकुमार ने बताया कि हम लोग बहुत गरीब है। किसी तरह परिवार का गुजारा होता है। झोपड़ी टूटने के बाद बड़ी मुश्किल से रात गुजरती है। न जाने तीसरी किश्त कब आएगी..और हमें अपने पक्का मकान में रहने का सुख मिले। 

                     हेमकुमार साहू ने बताया कि यदि सरकार तीसरी किश्त नहीं देती है तो कोई बात नहीं..हमें अब पक्का मकान भी नहीं चाहिए। सरकार हमारे ऊपर बस इतना रहम करें कि झोपड़ी को हटाकर बनाए गए अधूरे मकान को हटवा दे। ताकि हम एक झोपड़ी बनाकर अपने परिवार को सर्दी,गर्मी बारिश से बचा सकें…।

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