सीएम तक पहुंची NTPC की शिकायत..कांग्रेस नेता और किसानों ने बताया-जमीन गयी..अभी नहींं मिली नौकरी

बिलासपुर/रायपुर—एनटीपीसी सीपत भूमिविस्थापितो को नौकरी दिलाने को लेकर एक बार हलचल शुरू हो गयी है। सीपत ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राजेन्द्र धीवर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर भूस्थापितों को न्याय दिलाने की बात कही है। धीवर ने मुख्यमंत्री से बताया कि एनटीपीसी प्रबंधन की मनमानी से पीड़ितों का जीना दुश्वार हो गया है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

                 रएनटीपीसी के खिलाफ एक बार फिर राजनैतिक सक्रियता बढ़ गयी है। भू विस्थापितों का एक प्रतिनिधि मण्डल रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगायी है। सीपत ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष की अगुवाई में भूस्थापित प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से बताया कि जमीन को हथिया लिया गया। लेकिन आज तक वादा करने के बाद भी एनटीपीसी प्रबंधन ने जीविकोपार्जन का साधन नहीं दिया है। एनटीपीसी की मनमानी से गरीब भूमिविस्थापित  किसानों का दाना पानी मुहाल हो गया है।

                  राजेन्द्र धीवर ने सीएम को बताया कि विगत कई सालों से भू विस्थापित न्याय की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन अभी तक इनकी आवाज नक्कार खाने में तूती साबित हुई है।एनटीपीसी प्रबंधन को पूर्व कलेक्टर पी दयानंद ने 55 सामान्य पद को भर्ती करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके आज तक आज तक एनटीपीसी ने एक भी भर्ती नही किया है। जबकि एनटीपीसी ने  लिखित में आश्वासन दिया था कि योग्य उमीदवारों को मौका दिया जाएगा। यह भी बताया कि योग्य उम्मीदवार नहीं मिलने के कारण भर्तियां नही हुई।

                   राजेन्द्र धीवर ने सीएम को यह भी बताया कि एनटीपीसी भूमिविस्थापितो को आरक्षण का हवाला देकर भर्ती नहीं कर रहा है। जबकि केंद्रीय या राज्य पुनर्वास नीति में भूमिविस्थापितो पर आरक्षण का नियम लागू नहीं होता है। बावजूद इसके एनटीपीसी प्रबंधन जिला प्रशासन से मिलकर ये नियम लागू करवा लिया है। नियम को शिथिल किए जाने की जरूरत है। धीवर ने पीड़ितों के साथ सीएम से मांग किया कि मामले में एक उच्चस्तरीय बैठक कर हर समस्या का समाधान किया जाए। गरीब भूमिविस्थापितो को जल्द से जल्द नौकरी दिलाने की कृपा करें। प्रतिनिधिनमण्डल में राजेन्द्र धीवर के अलावा भूमिविस्थापित सघ के सदस्य देवेंद सिंह क्षत्री ,रेवाशंकर साहू, स्वप्निल गुप्ता, राकेश कुर्रे, राम वस्त्रकार, समेत अन्य किसान शामिल थे।

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