मेरा बिलासपुर

सीवीआरयू को ‘ डिजिटल युनिवर्सिटी ‘ बनाने की राह आसान

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बिलासपुर। डाॅ.सी.वी.रामन् वि.वि.  में डिजीटल इंडिया अभियान के अनुसार वि.वि. को डिजीटल करने के लिए बैठक आयोजित की गई। इस संबंध में आॅन लाइन के बाद अब वि.वि. की सभी शैक्षणिक प्रक्रिया व विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं को डिजीटल करने के संबंध में चर्चा की गई।

कुलसचिव शैलेष पाण्डेय ने शैक्षणिक व प्रशासनिक अधिकरियों को डिजीटल वि.वि. बनाने के संबंध में कार्य की जानकारी दी। श्री पाण्डेय ने बैठक में कहा कि तकनीकी और अधोसंरचना में मजबूत होने के कारण हमारे लिए डिजीटल वि.वि. बनाने की राह आसान होगी।
विष्वविद्यालय में आयोजित बैठक के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि डिजीटल इंडिया का अभियान समाज को डिजीटली सषक्त बनाने के लिए है। यह ज्ञान रूपी व्यवस्था को बदलेगा और डिजीटली रूप देगा। श्री पाण्डेय ने बताया कि डिजीटल इंडिया का मुख्य उद्देश्य है कि गुड गर्वेनेंस और सुविधा नागरिकों को दी जाएं। इसके साथ यह पहल देश को दुनिया के सामने बराबरी  पर खड़ा करने और खुद में आत्मविशवास भरने का अभियान है। श्री पाण्डेय ने बताया कि डिजीटल इंडिया अभियान की राह में वे संस्थान सबसे पहले आगे होंगे जो तकनीकी और अधोसंरचना में मजबूत हैं। डाॅ.सी.वी.रामन् वि.वि. डिजीटल विश्वविद्यालय के इस अभियान में सबसे आगे होगा। इसकी तैयारी डिजीटल इंडिया अभियान की शुरूआत के साथ कर दी गई है। श्री पाण्डेय ने बताया कि वि.वि. में पहले ही सभी शैक्षणिक कार्य और सुविधा आॅन लाइन कर दी गई है। भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वि.वि. अनुदान आयोग से सभी वि.वि. को पत्र जारी किया गया है। यूजीसी के सचिव प्रो. जसपाल एस.सन्धू ने इस संबंध में जानकारी दी है। इसी क्रम में प्राध्यापकों और वि.वि. के  अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई है, जिसमें विद्यार्थियों प्राध्यापकों को डिजीटल इंडिया और वि.वि. को डिजीटल करने के संबंध योजना तैयार की गई है। 7 दिन तक चलने वाले  अभियान में प्रक्रिया शुरू की गई, जिसमें सभी बातें सामने आई है और उसकी कार्य योजना तैयार करने टेक्नीकल टीम को जिम्मेदारी सौपी गई है। इस अवसर पर  विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी सहित तकनीकी अधिकारियों की टीम उपस्थित थी।

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समय की जरूरत है डिजीटल युनिवर्सिटी-कुलसचिव
डाॅ.सी.वी.रामन् वि.वि. के कुलसचिव शैलेष पाण्डेय का कहना है कि व्यर्चुअल विश्वविद्यालय  के कांन्सेंप्ट पर डाॅ.सी.वी.रामन को ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित किया गया है। इसके लिए वि.वि. में शुरूआत से ही आॅनलाइन लर्निंग में जोर दिया जा रहा था। इसका परिणाम यह हुआ कि पिछले 8-9 वर्षों में लगभग पूरी प्रक्रिया आॅनलाइन कर दी गई है और सही मायने में यह आज के युग की जरूरत भी है। इस जरूरत को पहचानने में वि.वि. शुरू से प्रयासरत रहा है। श्री पाण्डेय का कहना है कि आज के जनरेशन के विद्यार्थी तेजी से काम करते हैं। इसलिए डिमांड पर आधारित काम करने के लिए वि.वि. प्रयास करता रहा है। स्कील इंडिया मिशन में वि.वि.  ने महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई है। वि.वि.  में ई-लर्निंग पर  जोर दिया गया है। डिजीटल विष्वविद्यालय बनाने के लिए प्राध्यापकों व विद्यार्थियों को मिलजुल कर प्रयास करना होगा। अधोसंरचना की विष्वविद्यालय में कमी नहीं हैं। इसलिए हमें डिजीटल कंसेंप्ट में काम करने में आसानी होगी।
वाईमैक्स सुविधा और 5 हजार विद्यार्थियों का सीयूजी
श्री पाण्डेय ने बताया कि वि.वि. में विद्यार्थियों का नामांकन, फीस , क्लास रूम और परीक्षा सभी डिजीटल किया जा रहा है। हम जल्द ही डिजीटल क्लास रूम शुरू करने जा रहे हैं। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्राध्यापक विद्यार्थियों को इनके माध्यम से ही क्लास में पढ़ाएंगे।
हर नई सुविधा के लिए भारत संचार निगम से अनुबंध किया जाता है। इसमें वर्तमान में वि.वि. में वाईमेक्स सुविधा विद्यार्थियों को दी गई है ताकि ग्रामीण अंचल के विद्यार्थी ग्लोबल स्तर पर दूसरे विद्यार्थी से जुड़ सके। इसके साथ 5 हजार विद्यार्थियों का जीयूजी ग्रुप बनाया गया। सभी जानकारी विद्यार्थियों को एसएमएस और वाट्सअप से दी जाती है।
देश का सबसे बड़ा नेटवर्क आईसेक्ट
श्री पाण्डेय ने बताया कि डाॅ.सी.वी.रामन वि.वि. की मदर संस्था आईसेक्ट गु्रप आईटी के क्षेत्र में काम करने वाला सबसे पुराना और सबसे बड़ा नेटवर्क है। शहर से लेकर गांव, वनांचल,कस्बा और मंझराटोला तक हमारे नेटवर्क है। वर्तमान में इस नेटवर्क में आॅनलाइन सेवाएं,डिजीटल कंटेट, टेबलेट बेस्ड कोर्सस की सुविधा हैं। देश भर में 20 हजार शाखाएं और 27 राज्यों में सेंटर चलाए जा रहे है। इसका लाभ इस अभियान को चलाने में मिलेगा और हम सबसे आगे होंगे।

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