सीसीएफ की बैठक में युंकाइयों का हंगामा..आनंद बाबू ने कहा..करेंगे मदद

   IMG-20170422-WA0001बिलासपुर—यूथ कांग्रेसियों के सामने आखिरकार सीसीएफ बी.आनन्द बाबू को घुटना टेकना ही प़ड़ा। यूथ कांग्रेसियों बैठक के बीच पहुंचकर एसीसीएफ और सीसीएफ का घेराव किया। जिसके कारण एसीसीएफ युनूस खान को बैठक बीच में ही खत्म करना पड़ा। इस दौरान कांग्रेसियों ने सरकार और वन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पीड़ित परिवार के भरण पोषण के साथ एक्सीडेन्ट में गंभीर रूप से घायल का निशुल्क इलाज करने को कहा। करीब दो घंटे तक गरमागम बहसे के बाद मामला शांत हुआ। सीसीएफ आनन्द बाबू ने कहा कि जब तक परिवार का मुखिया अस्पताल से सकुशल घर नहीं लौटता है। शासन प्रशासन , व्यक्तिगत के अलावा विभागीय स्तर पर परिवार की सारी जम्मेदारी उठाया जाएगा।

सीसीएफ गाड़ी से हादसा

                                    मालूम हो कि करीब पांच दिन पहले मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे लोरमी रोड में सीसीएफ की गाड़ी के नीचे दो भाई आ गए। जिसके चलते दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये। दोनो भाई पिपरतराई कोटा के रहने वाले है। घायल छोटे भाई का इलाज स्थानीय अस्पताल में किया गया। गंभीर रूप से घायल बड़े भाई दिनेश रजक को 108 से बिलासपुर के किम्स अस्पताल में दाखिल कराया गया। इसके बाद वन विभाग का कोई भी कर्मचारी घायल को देखने नहीं गया।  इस समय दिनेश वेन्टीलेटर पर है।

IMG-20170422-WA0005                          परिजनों ने बताया कि पांच दिन में वन विभाग ने सिर्फ तीस हजार रूपए दिए हैं। गंभीर रूप से घायल दिनेश रजक इस समय वह वेन्टीलेटर पर है। दिनेश रजक का छोटा भाई दिलीप ने बताया कि घटना के समय बडा और मुझसे छोटा भाई सड़क के किनारे खड़े थे। सीसीएफ की तेज रफ्तार कार ने ठोकर मार दी। इसके बाद सीसीएफ ड्रायवर के सहारे छोड़कर फरार हो गए। किसी तरह दोनों को अस्पताल में दाखिल कराया गया।

यूथ कांग्रेस का हंगामा

               यूथ कांग्रेस नेता शिवा नायडू,जावेद मेनन और गोपाल दुबे ने पीड़ितों के साथ सीसीएफ का घेराव किया। उस समय बी आनन्द बाबू रायपुर से आए एसीसीएफ यूनिस खान के साथ विभागीय बैठक में थे। इस दौरान वनमण्डल के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों ने फरियाद करने पहुंचे मरीजों के परिजनों को बाहर निकाल दिया। नाराज कांग्रेसियों ने पीडित परिवार के साथ बैठक में पहुंचकर मिलने का समय मांगा लेकिन सीसीएफ ने दुबारा इंकार कर दिया। देखते ही देखते युंकाइयों ने हंगामा खड़ा हो गया।

                               यूथ कांग्रेस नेता जावेद,शिवा और गोपाल ने कहा कि मरीजों को लावारिस छोड़ने का उन्हें अधिकार नहीं है। पीडित परिवार भीख नहीं बल्कि न्याय मांगने आया। परिवार का कमाऊ पूत जीवन और मौत के बीच झूल रहा है। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता है। वे लोग बैठक हाल से नहीं जाएंगे। इस दौरान कांग्रेसियों की सीसीएफ और एसीसीएफ से गरमा गरम बहस हुई। युंकाइयों ने पीड़ित का इलाज अपोलो अस्पताल में किये जाने की मांग की। IMG-20170422-WA0002

                   जावेद ने कहा कि सीसीएफ संवेदनहीन हैं। पांच दिन बाद आज सुबह दो मिनट किम्स जाकर चेहरा दिखा आए। लेकिन मरीजों से मिलना मुनासिब नहीं समझा। यह भी नहीं पूछा कि पीडित गरीब परिवार अपने गांव घर से यहां किस तरह जीवन काट रहे हैं। किम्स प्रबधन परिवार पर पैसे के लिए दबाव बना रहा है। इधर अधिकारी एसी मैं बैठकर काजू बादाम उड़ा रहे हैं।

                                     शिवा नायडु ने बताया कि सीसीएफ का दावा है कि अब इलाज में सत्तर हजार रूपए खर्च हो चुके हैं। दूसरी तरफ किम्स प्रबंधन कहता है कि वन विभाग से सिर्फ तीस हजार रूपए ही मिले हैं। शर्म आती है ऐसी व्यवस्था पर कि..मौत के मुंह में जा रहे व्यक्ति के इलाज में खर्च होने वाले चालिस हजार रूपए को भी विभाग के कर्मचारियों ने डकार लिया।

                  गोपाल दुबे ने बहस के दौरान बताया कि सीसीएफ लापरवाह हैं। उनके किस्से किसी से नहीं छिपे है। घंटो से सीसीएफ कार्यालय के सामने पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। लेकिन अानन्द बाबू ने गरीबों से मिलना मुनासिब नहीं समझा । ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। गोपाल ने कहा कि हमने सीसीएफ और एसीसीएफ से पीडित परिवार के लिए भरण पोषण के साथ इलाज का जिम्मा उठाने को कहा है।

मौत के मुंह में जाता कमाऊ पूत

              किम्स अस्पताल में वेन्टीलेटर पर पड़े दिलीप रजक की पत्नी ने बताया कि एक्सीडेन्ट के बाद परिवार की हालत बहुत खराब हो गयी है। घर में दिनेश की कमाई से परिवार चलता था। जबसे वह अस्पताल में है बच्चों का गुजारा मुश्किल हो गया है। परिवार खाली पेट रात गुजारता है। दिन भर रोटी के लिए भटकता है। जमा पूंजी पति के इलाज में झोंक दिया है। वन विभाग ने सहयोग करने से इंकार कर दिया है। जिसके चलते परिवार सड़क पर आ गया है। दिनेश की पत्नी ने बताया कि पांच बेटियां हैं। दो की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। बच्चे कमजोर और विकलांग है। छोटे बेटे का इलाज चल रहा है। अब भगवान ही मालिक है।

सीसीएफ पर युंकाईयों का दबाव     IMG-20170422-WA0007

              शिवा नायडू, जावेद मेनन, गोपाल दुबे भावेन्द्र गंगोत्री समेत सभी युंकाईयों का सीसीएफ पर दबाव काम आया। इस दौरान सीसीएफ ने बताया कि हमने सत्तर हजार रूपए दिये थे। चालिस हजार क्यों नहीं दिया गया। संबधित कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी। मुझसे गलती हुई है। स्वीकार करता हूं।मुझे पीडित परिवार के प्रति सहानुभूति भी है।

सीसीएफ ने टेका घुटना..कांग्रेसियों की जीत

                                 कांग्रेसियों के उग्र तेवर को देखकर सीसीएफ को घुटना टेकना पड़ा। सीसीएफ ने मीडिया को बताया कि पीड़ित के इलाज में रूपयों की कमी नहीं होगी। हम चाहते हैं कि वह जल्द से जल्द ठीक हो। इस दौरान परिवार के सदस्यों की सुख सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा। सीसीएफ ने कांग्रेस नेताओं को आश्वासन दिया कि यदि किम्स कहेगा कि दिलीप रजक का इलाज अपोलो में हो तो उसका भी इंतजाम किया जाएगा। सीसीएफ ने बताया कि मैं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में जा रहा था। उसी समय हादसा हुआ।

नियमित ड्रायवर को कपड़ा धोने घर छोड़ा

        जानकारी के अनुसार घटना के दिन सीसीएफ बी.आनन्द बाबू ने नियमित ड्रायवर को बंगले में छोड़ दिया था। किसी दैनिक वेतनभोगी को ड्रायविंग सीट पर बैठाया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नियमित ड्रायवर को बी आनन्द बाबू ने कपड़ा धोने के लिए घर में छोड़ा था। एक ड्रायवर ने बताया कि बी.आनन्द बाबू हमेशा ड्रायवर से घरेलू काम लेते हैं। घटना के दिन भी ऐसा ही हुआ। यदि नियमित ड्रायवर को कपड़ा धोने के लिए घर पर नहीं छोड़ा जाता तो हादसे को टाला जा सकता था।

 

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