सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देंगे अधिकारी

jhiram suबिलासपुर—झीरमघाटी में कांग्रेसी नेताओ के काफिले पर हमले की सुनवाई आज हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच में हुई । कांग्रेस की ओर से  अधिवक्ता सुदीप श्रीवस्तव ने पिछली सुनवाई के दौरान सीएम के विकास यात्रा की गई सुरक्षा व्यस्था की जानकारी मांगी थी। आज राज्य शासन ने आयोग को व्यवस्था की जानकारी देने के लिए हामी भर दी है। झीरम मामले की अगली सुनवाई 10 और 11 फरवरी को होगी। सुनवाई में सुकमा में तात्कालीन सुकमा पलिस अधिकारी अभिषेक शांडिल्य हाजिर रहेंगे।

                         25 मई 2014  कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर नक्सलियो ने हमला कर तीन दर्जन से अधिक नेताओं को मौत के घाट उतार दिया था। घटना में तात्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल उनके बेटे उमेश पटेल, महेन्द्र कर्मा विद्याचरण शुक्ल समेत कई नेता की मौत हो गयी।

                              मामले में कांग्रेस पार्टी ने राज्य शासन पर सुरक्षा में चूक का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में अपील की थी। जिसकी आज सुनवाई हुई। प्रतिपरीक्षण के बाद पिछली पेशी के दौरान कांग्रेस के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने आयोग के सामने उस दौरान मुख्यमंत्री के विकास यात्रा का हवाला देते हुए सुरक्षा व्यवस्था के दस्तावेजो की  जानकारी मांगी थी।

                           मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने राज्य शासन से जवाब तलब किया था। आज सुनवाई के दौरान न्यायाधीश प्रशांत मिश्रा के सामने घटना से जुडे कई पहलुओ में विस्तार से चर्चा की। उन्होने कंडिका 3 एफ के तहत विशेष शाखा का जिक्र करते हुए तत्कालीन एसपी मंयक श्रीवास्तव ने राज्य शासन की तरफ से अपने कथन में कहा था कि प्रत्येक स्तर पर सुरक्षा के इंतजाम को लेकर सुचनाएं एकत्रित की जाती है।

                       लेकिन सूचनाओं को लिखित रूप में नहीं दी जाती । साक्षी अपनी सूचना को स्पष्ट करता है। इसका यह मतलब नही कि असूचनाएं संग्रहित नही होती।

                              पुलिस अधीक्षक मंयक श्रीवास्तव के बयान में इस कथन का कोई लिखित अभिलेख नही है। उन्होने यह भी कहा था कि सूचनाएं और असूचनाओ की प्रतिक्रिया, जटिलता, आयोग के सामने स्पष्ट नही की जा सकती। कांग्रेस के अधिवक्ता ने कहा कि राज्य शासन ने मुख्यमंत्री की विकासयात्रा को पार्टीगत संचालित किया था ना की शासन स्तर पर किया गया था। बाद में शासन ने इसे मान लिया था।

                          विकास यात्रा 2013 में सुरक्षा प्रभारी आईजी बस्तर थे। सरकारी वकील ने अपने कथन में राज्य शासन की ओर से कहा था कि उच्च संवैधानिक पदो के पदाधिकारियो के सुरक्षा संबंध में कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नही कराया जा सकता। क्योंकि ये सुरक्षा के हित में है। वकील ने कहा कि आयोग के सामने  यह दस्तावेज अवलोकन के लिए प्रस्तुत किया जा सकता है। यदि शासन को कोई आपत्ति नही हो तो ।

                         कांग्रेस के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि विकास यात्रा के दौरान जितनी सुरक्षा व्यवस्था राज्य शासन ने की थी उतनी ही सुरक्षा व्यवस्था परिवर्तन यात्रा के दौरान भी होनी चाहिए थी। कांग्रेस अधिवक्ता ने आयोग से आई जी बस्तर के सुरक्षा इंतजामों में अप्रैल और मई माह के बाद 20 दिनो की जानकारी मांगी है। जिसे आयोग ने स्वीकार करते हुए राज्य शासन के वकील को अगली पेशी में जानकारी देने को कहा है ।

                     आयोग ने अगली पेशी में बालौदा बाजार के एसपी अभिषेक शांडिल्य तात्कालीन पुलिस कप्तान सुकमा को भी तलब किया है। झीरम घाटी की अगली सुनवाई 10 और 11 फरवरी को होगी ।

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