सेन्ट्रल जेल में हुनर सीखने के साथ तालीम हासिल कर रहे कैदी

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बिलासपुर  । केन्द्रीय जेल में बंदी स्वरोजगार के लिए विभिन्न हुनर सीखने के साथ ही अपनी शैक्षणिक योग्यता भी बढ़ा रहे हैं। पिछले कैलेंडर वर्ष (2014) में वहां लगभग 300 बंदियों ने कक्षा पहली से स्नातकोत्तर (मास्टर ऑफ ऑर्ट्स) तक की परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। बीते कैलेंडर वर्ष में 286 कैदियों ने पहली से आठवीं तक की शिक्षा बिलासपुर केन्द्रीय जेल में हासिल की है। इनमें 233 पुरूष एवं 53 महिला बंदी शामिल हैं। इस दौरान वहां 11 कैदियों ने कक्षा दसवीं से स्नातकोत्तर (एम.ए.) तक की परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। साक्षरता अभियान के तहत वहां 284 पुरूष और 15 महिला बंदियों सहित कुल 299 बंदियों को साक्षर भी किया गया है।

बिलासपुर केन्द्रीय जेल में कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए ऑफसेट एवं स्क्रीन प्रिंटिंग उद्योग, वाशिंग पावडर उद्योग, सिलाई उद्योग, काष्ठकला उद्योग, स्टील फर्नीचर उद्योग, मसाला उद्योग, नायलॉन डोरी निर्माण, बुनाई उद्योग, कढ़ाई उद्योग, टेराकोटा उद्योग तथा मोमबत्ती निर्माण जैसे व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला बंदियों को भी वहां महिला बंदिनी प्रकोष्ठ में पापड़ एवं आचार बनाने, कढ़ाई-बुनाई, सिलाई कार्य, मोमबत्ती और राखी निर्माण तथा ब्यूटीशियन कार्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जेल से रिहा होने के बाद बंदी वहां सीखे कौशल की बदौलत आसानी से रोजगार प्राप्त कर या स्वरोजगार शुरू कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ सकते हैं।

 

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