सैलानियों के लिए खुले अचानकमार के दरवाजे

achamkmar

रायपुर । नैसर्गिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य के समस्त अभ्यारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व इस महीने की पहली तारीख से पर्यटकों के लिए खोल दिए गए हैं। राज्य में इन दिनों वन्य संरक्षण सप्ताह भी मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और वन मंत्री  महेश गागड़ा ने सभी लोगों और पर्यटकों से प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के लिए वन्य प्राणियों की सुरक्षा में सहयोग की अपील की है।

उल्लेखनीय है कि एक अक्टूबर से खोले गए अभ्यारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में पर्यटक 30 जून तक भ्रमण कर सकेंगे। छत्तीसगढ़ राज्य में वन्य प्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए दो राष्ट्रीय उद्यान, 8 अभ्यारण्य एवं तीन टाइगर रिजर्व गठित है। इसके अलावा मुंगेली एवं बिलासपुर जिले में एक बायोस्फियर रिजर्व अचानकमार अमरकंटक अधिसूचित है। मगरमच्छ के संरक्षण हेु जांजगीर-चाम्पा जिले के कोटमी सोनार में मगरमच्छ संरक्षण योजना चलाई जा रही है, जहां लगभग 250 मगरमच्छ प्राकृतिक रूप से विचरण कर रहे हैं।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार  विभिन्न प्रकार के वन्य जीवों को करीब से देखने, उनके रहवास क्षेत्रों को समझने के साथ-साथ प्रकृति के मनोहारी छटा का आनंद लिया जा सकता है। बस्तर जिले में कांगेरघाटी राष्ट्रीय उद्यान लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के रकबे में फैला है। इसी तरह कोरिया, सूरजपुर जिले में गुरूघासीदास राष्ट्रीय अभ्यारण 1440 वर्ग किलोमीटर, बीजापुर जिले में इन्द्रावती टायगर रिजर्व लगभग 2800 वर्ग किमी, मुंगेली एवं बिलासपुर जिले में अचानकमार टायगर रिजर्व 914 वर्ग किमी, गरियाबंद धमतरी जिले में उदंती सीतानदी टायगर रिजर्व 1842 वर्ग किलोमीटर रकबे में फैला हुआ है। मुंगेली एवं बिलासपुर जिले में अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व 2610 वर्ग किलोमीटर प्रदेश के आठ रज्य अभ्यारण्यों में जशपुर जिले के बादलखोल अभ्यारण्य 105 वर्गकिमी, रायगढ़ जिले के गोमर्डा अभ्यारण 278 किमी, बलौदाबाजार जिले का बारनवापारा 245 वर्ग किलोमीटर, सूरजपुर जिले के तमोरपिंगला 609 वर्ग किलोमीटर, बलरामपुर जिले के सेमरसोत 430 वर्ग किलोमीटर, बीजापुर जिले के भैरमगढ़ 139 वर्ग किलोमीटर, पामेड़ 262 वर्ग किलोमीटर एवं कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला है।
वन्य प्राणियों के बचाव, पुनर्वास एवं जनसामान्य को वन्य प्राणियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए दो लघु चिड़ियाघर नंदनवन रायपुर एवं काननपेंडारी बिलासपुर स्थापित किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया कि विगत वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस वर्ष भी प्रदेश के अभ्यारण्यों में अधिक से अधिक पर्यटक भ्रमण पर आएंगे। भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था करने हेतु समस्त संरक्षित क्षेत्र के वन अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *