हमार छ्त्तीसगढ़

स्वास्थ शिक्षा मित्र का विज्ञापन फर्जी

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रायपुर । राज्य सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता अभियान के नाम पर दिल्ली से जारी ‘स्वास्थ्य शिक्षा मित्र’ की संविदा भर्ती के विज्ञापन को फर्जी और भ्रामक बताया है। किसी फर्जी संस्था द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा मित्र के 25 हजार पदों की भर्ती के लिए यह विज्ञापन राजनांदगांव जिले की ग्राम पंचायतों को डाक से लगातार भेजा जा रहा है। इसमें प्रत्येक आवेदक से 450 रूपए का शुल्क भी मांगा गया है। फर्जी विज्ञापन में यह लिखा गया है कि ‘स्वास्थ्य शिक्षा और स्वच्छता’ के प्रति नागरिकों को जागरूक करने के लिए विभिन्न राज्यों की पंचायतों के प्रत्येक गांव में देख-रेख हेतु 25 हजार स्वास्थ्य शिक्षा मित्रों का चयन किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने कहा है कि इस विज्ञापन का शासन और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वच्छता अभियान से कोई संबंध नहीं है। बेरोजगारों से राज्य शासन द्वारा अपील की गयी है कि कोई भी आवेदक इस विज्ञापन के बहकावे में न आए कथित संस्था को आवेदन और शुल्क ना भेजें। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने पंच-सरपंचों सहित आम नागरिकों को इस प्रकार के विज्ञापन से भ्रमित नहीं होने की सलाह दी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार को यह जानकारी मिली थी कि राजनांदगांव जिले में ब्राडवेब इंडिया नामक संस्था द्वारा इस फर्जी विज्ञापन के आधार पर प्रत्येक आवेदक से 450 रूपए का शुल्क बैंक ड्राफ्ट के जरिए वसूल किया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा इसे गंभीरता से लिया गया और राजनांदगांव जिला प्रशासन को तत्काल मामले की जांच के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन की ओर से प्रभारी कलेक्टर डॉ. प्रियंका शुक्ला द्वारा पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव  पी. सुन्दरराज को मामले की जांच के लिए कहा गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा विज्ञापन में दिए गए पते मिस्टर व्ही.के. गौर, 105 कुन्दन भवन आजादपुर दिल्ली-33 के बारे में दिल्ली पुलिस से जानकारी ली गयी।
दिल्ली पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद यह जानकारी दी है कि इस पते पर व्ही.के. गौर नामक कोई भी व्यक्ति नहीं मिला। अब दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर द्वारा यह जांच की जा रही है कि इस विज्ञापन का प्रकाशन कहां से हुआ है। दोषी व्यक्तियों का पता लगाकर उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की जाएगी। सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि वे इस फर्जी विज्ञापन के बारे में ग्राम पंचायतों के सरपंचों को जानकारी दें और उनके माध्यम से ग्रामीणों को भी सचेत कर दिया जाए।

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