एक मुलाकात

हर जन्म में बिलासपुर बने कर्मस्थली

IMG_20151008_121507 (भास्कर मिश्र) बिलासपुर-मैं चुनौतियों को अवसर के रूप में देखता हूं। चुनौतियां नव निर्माण का रास्ता तैयार करती हैं। बिलासपुर मेरी कर्मभूमि है…मुझे अपने कर्मभूमि में बहुत प्यार मिला। इस प्यार ने जन्मभूमि से दूर रहने के दर्द को कुछ कम किया है। यहां की मिट्टी से मेरा गहरा लगाव क्यों है…आज तक नहीं समझ पाया। कभी-कभी लगता है कि इस धरती से मेरा कोई पुराना नाता है।

जितना प्यार मुझे बिलासपुर ने दिया…उसकी मैने कल्पना नहीं की थी। मैने कुछ अच्छा काम किया हो…तो मुझे हर जन्म में बिलासपुर के लोगों की सेवा का अवसर मिले। ऐसी कामना माता महामाया से करता हूं। …मेरे बच्चे  भी सौभाग्यशाली हैं…जिन्होने यहां जन्म लिया । सीजी वाल से एक मुलाकात में ये बाते संभागायुक्त सोनमणि बोरा ने कहीं।

कमिश्नर वोरा ने बताया कि बिलासपुर का तेजी से विकास हो रहा है। मेरी कर्मभूमि को प्रदेश में गंभीरता से लिया जाता है।akal 2009 में पहली बार बिलासपुर से ही महतारी एक्सप्रेस चली। बैगा भाई बहनों के जीवन में शिक्षा का अलख जगाने वाली उडान योजना की पहली उड़ान बिलासपुर से ही हुई। आज बैगा समाज अंधेरे से निकल तेजी से उजाले की दुनिया में पहुच रहा है। समाज के होनहार बच्चे… अब विकास की दिशा में सक्रिय भागीदारी निभाने की बात कर रहे हैं।

बिलासपुर का इतिहास तीन सौ साल पुराना है। अगले जन्म में भी कर्मस्थली की सेवा का अवसर मिले।  सीजीवाल के सवाल पर भावुक हो गए..कमिश्नर ने कहा कि सुनकर अच्छा लगा कि…मुझे बिलासपुर के लोगों ने मुझे अपना मान लिया है। मुझ पर अपना हक समझते हैं…। मेरे बच्चे भी सौभाग्यशाली हैं…जिन्होंने इस पवित्र भूमि में जन्म लिया। मै रोज माता महामाया से कहता हूं कि यदि इस जन्म में थोड़ा सा भी अच्छा काम किया हूं तो अगले जन्म में भी बिलासपुर ही मेरी कर्मस्थली बने।

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बोरा ने बताया कि बिलासपुर शक्ति का घर है…मिट्टी में मिठास है…फिजाओं में पवित्रता है…लोग बहुत मीठे हैं…सरल, सहज और पुरूषार्थी हैं। इन्ही गुणों से मुझे काम करने की शक्ति मिलती है। इसी प्यार के दम पर सरकार की लाभकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम करता हूं। जब तक सांस है सेवा करता रहूंगा।

बोरा ने बताया कि सबके पास 24 घंटे हैं…सबके जीवन में सूरज और चांद भी एक है । लक्ष्य के लिए सभी को मानसिक, शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत होना होगा। जीवन में बौद्धिकता के साथ अध्यात्म का भी होना जरूरी है। आध्यात्मिक रूप से मजबूत होने का अर्थ नैतिक रूप से सबल होना है। किसी भी धर्म का व्यक्ति हो…यदि वह नैतिक रूप से सबल है तो वह जो भी काम करेगा..वातावरण महक उठेगा। इसलिए मैं कभी मंदिर में होता हूं..तो कभी मस्जिद में दिख जाता हूं…कभी गिरिजाघर तो कभी गुरूद्वारे में मत्था टेकता हूं। ऐसा इसलिए करता हूं कि…मेरे मिनी भारत को किसी की नजर ना लगे।

बिलासपुर पौराणिक नगरी है…अब स्मार्ट सिटी बनने की दिशा में है..। इसके एक तरफ अमरकंटक जैसा पुण्य स्थल है…तो दूसरी तरफ लुतरा शरीफ का पवित्र दरहगाह है। अन्त.सलीला अरपा तट पर बिलासपुर की संस्कृति जवान हुई। वन्य जीवों का क्रेडल जैविक विविधताओं से भरपूर विश्व प्रसिद्ध अचानकमार टाइगर रिजर्व बिलासपुर का ही हिस्सा है।

बिलासपुर का विकास और चुनौती के प्रश्न पर वोरा ने सीजी वाल से बताया कि चुनौतियां विकास का दरवाजा खोलती हैं। आज के परिदृश्य में आबादी के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार बहुत बड़ी चुनौती है। हमारे सामने परम्परागत धरोहर को बचाने की भी चुनौती है। यदि हमने उसे नहीं बचाया तो भावी पीढ़ी कभी माफ नहीं करेगी। बेरोजगारी, गुणवत्ता प्रधान शिक्षा, स्वच्छ बिलासपुर बनाने की चुनौतियों को हमें जनसहयोग और सकारात्मक सोच के साथ निपटाना होगा। क्योंकि चुनौतियों से निपटना केवल सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है।                                                                                                                      niveshak jagrukata kariyashala  (1)

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उन्होने बताया कि सरकार के मंशानुरूप एक ना एक दिन बिलासपुर राजस्व मुक्त संभाग बनेगा। इस दिशा में हम अपने साथियों के साथ पारदर्शिता..जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि जिस दिन बिलासपुर की जनता ने ठान लिया…उसी दिन चुनौतियां घुटने टेक देंगी।

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