मेरा बिलासपुर

हवाई सेवा संघर्षः आर्टिस्ट संघ का सवाल..बिलासपुर से साजिश का जिम्मेदार कौन…लेकर रहेंगे सुविधा

बिलासपुर—हवाई सुविधा जन आंदोलन अखंड धरना के 49 वें दिन बिलासपुर आर्टिस्ट संघ के पदाधिकारियों ने धरना स्थल पहुंचकर समर्थन किया। हवाई सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि अखण्ड धरना के 50 दिन पूरा होने पर सर्वधर्म सभा का आयोजन धरना स्थल पर किया जायेगा।

                       हवाई सुविधा जन संघर्श समिति का अखंड धरना आंदोलन लगातार 49 वें दिन भी चला। धरना स्थल पहुंचकर बिलासपुर आर्टिस्ट संघ के पदाधिकारियों ने समर्थन किया। पदाधिकारियों ने बताया कि बिलासपुर छत्तीसगढ राज्य का दूसरा प्रमुख शहर है। राज्य बनने के 19 साल बाद भी बिलासपुर को हवाई सेवा सुविधा से सुनियोजित तरीके से दूर रखा गया। सवाल उठता है कि आखिर यह साजिश क्यो की गयी। आर्टिस्ट संघ के सदस्यो ने बताया कि बिलासपुर में छत्तीसगढ़ राज्य का हाईकोर्ट है। देश को सर्वाधिक आय देने वाला जोन है। राज्य का एक मात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय भी बिलासपुर में ही है। बावजूद इसके बिलासपुर को हवाई सुविधा नहीं दिए जाने का मतलब आज तक समझ में नहीं आया है। एनटीपीसी,एसईसीएल का मुख्य कार्यालय भी बिलासपुर में ही है। इसके अलावा 100 किलोमीटर की परिधि मेें कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली और पेण्ड्रारोड जिला मुख्यालय भी है। इनमें कई जगहों पर बडे औद्योगिक संस्थान कार्यरत है। सरगुजा संभाग और रायगढ़ क्षेत्र का भी नजदीकी हवाई अड्डा बिलासपुर हो सकता है। यदि बिलासपुर में हवाई हड्डा बनाया जाता है तो उत्तरी छत्तीसगढ़ की लगभग 1.50 करोड आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिलेगा।

                     बिलासपुर आर्टिस्ट संघ के अभिजीत मित्रा ने बताया कि राज्य बनने तक रायपुर और बिलासपुर में विकास को लेकर बहुत मामूली अन्तर था । लेकिन आज यह अन्तर 10 गुना से अधिक हो गया है। इस अन्तर के लिए जनप्रतिनिधियों के अलावा  आम जनता भी जिम्मेदार है। मित्रा का समर्थन मेें अतुल कान्त खरे ने कहा कि छत्तीसगढ में खनिज निकालने के लिए तो सरकार हमेशा सजग रहती है। लेकिन आवागमन की सुविधा के लिए आंख बंद कर बैठी है। एम.एस.तम्बोली, रूपेन्द्र शर्मा, प्रदीप जायसवाल, किरण दुबे, तपोविंद सेठी, जितू ठाकुर, शिवा गेंदले, पुरूषोत्तम राजपूत, विनय अग्रवाल, टीकेश प्रताप सिंह, चित्रकान्त निरद्वार, विकास सिंह, बृजेश बोले, हर्ष  सिंह, हिमेंश साहू, मनीश मिश्रा, राजा वर्मा, मनोज मेश्राम, समर्थ मिरानी, अमिताभ वैष्णव, नीरज गोस्वामी ने आंदोलन को कंधे से कंधे मिलाकर समर्थन देने को कहा।

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                      समिति के सदस्य बद्री यादव ने कहा कि बिलासपुर क्षेत्र में लघु उद्योग एंव रोजगार  की असीम संभावनाएं है। बावजूद इसके सरकारों को फर्क नहीं है। रायपुर जाकर फ्लाईट पकडने के लिए उत्तर छत्तीसगढ़ के लोगों को ना केवल आर्थिक बल्कि समय का भी नुकसान उठाना पड़ता है। समिति के एक अन्य सदस्य देवेन्द्र सिंह बाटू ने कहा कि हवाई सेवा नही होने से महानगरो के बडे बडेे षिक्षाविद् किसी कार्यक्रम में शिरकत करने बिलासपुर आने से बचना चाहते हैं। जिसके कारण छात्र-छात्राओं को उनके अनुभव और  ज्ञान का लाभ नहीं मिलता है।  समिति के ही रोहित तिवारी ने कहा कि ये समझ में नही आता कि बिलासपुर को अपना अधिकार हर बार लडकर या धरना प्रदर्षन के बाद ही मिलता है। अशोक भण्डारी ने कहा कि हवाई सुविधा नही होने से बिलासपुर में बडे उद्योग का लगना नामुमकिन हो गया है। बिलासपुर का चहुमुंखी विकास एयरपोर्ट के बिना संभव नहीं है। 

                धरना आंदोलन में समिति की तरफ से संजय पिल्ले, पप्पू तिवारी अमित नागदेव, श्याममूरत कौषिक, रोहित तिवारी, समीर अहमद (बबला), केशव गोरख, शेख अल्फाज (फाजू), रवीन्द्र मिश्रा, अमिताभ गौर, सुनील दत्त मिश्रा, अतुल कान्त खरे, राहुल, अमन सिंह, सुनील यादव, कुन्दन कुमार सोनी, भुवनेष्वर शर्र्मा विशेष रूप से मौजूद थे।

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