बिलासपुर में कोरोना टेस्टिंग मामले में हाईकोर्ट में हुई सुनवाई,लॉकडाउन में कोटा में फंसे छात्रों के मामले में 27 अप्रैल को होगी सुनवाई

 
बिलासपुर—- हाईकोर्ट में कोरोना टेस्टिंग लैब खोले जाने को लेकर सुओ मोटो जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने बिलासपुर मे कोरोना टेस्टिंग लैब खोलने के लिए सरकार और केंद्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट माँगाय़ 
 
              रिपोर्ट मांगे जाने पर केन्द्र की तरफ से बताया गया की न्यायालय के आदेश को लेकर एक दिन पहले यानि सोमवार शाम पांच बजे तक स्वास्थ्य सचिव और एम्स डायरेक्टर की बैठक हुई। बैठक में गोपा कुमार केन्द्र के वकील भी मौजूद थे।
 
            सुनवाई के दौरान बात सामने आयी कि यदि राज्य सरकार सभी सुविधा उपलब्ध कराए तो एम्स बिना देरी किए टेस्टिंग लैब संचालन करने को तैयार है। चूंकि राज्य सरकार ने अभी तक सुविधा उपलब्ध नहीं करवा पयी है। इसलिए न्यायालय के आदेश का पालन मुश्किल है।
 
                                साथ ही यह भी बताया गया कि  टेस्टिंग की सुविधा बिलासपुर के आर बी हॉस्पिटल मे उपलब्ध है। यदि राज्य सरकार चाहे तो टेक ओवर कर सुविधा चालू कर दे। मामले में शासन की तरफ से महाधिवक्ता ने बताया की टेक ओवर प्रक्रिया में कानूनी जटिलता है। निश्चित रूप से समय लगेगा। हाईकोर्ट ने कहा की इस प्रकार के सहयोग से हम कुछ नहीं कर सकते है। मामले को राज्य सरकार के ऊपर छोड़ते है की वह अपनी जनता के लिए ऐसे समय मे क्या बेहतर कर सकती है।
 
           हाईकोर्ट में मामले से जुड़े,एक केस की भी सुनवाई हुई। कोटा राजस्थान मे पढ़ने वाली एक बच्ची के तरफ से राजेश केशरवानी ने हस्तछेप याचिका फ़ाइल किया था। याचिका में बताया गया कि कोटा में प्रदेश के बहुत बच्चे लाकडाउन में फसे हैं। बच्चों को वहां से सुरक्षित लाने को लेकर हाईकोर्ट राज्य सरकार निर्देश दे। बहस के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई 27 अप्रैल को विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग से होगी। 

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