मेरा बिलासपुर

हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इंकार..कहा…अजीत जोगी हाजिर हो…अमित ने कहा…कानून का मिला संरक्षण

बिलासपुर— छत्तीसगढ़ उच्चन्यायालय ने बुधवार 3 जुलाई को अजीत जोगी की याचिका को खारिज कर दिया है। जोगी ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट से हाई पावर कमेटी के सामने पेश होने से राहत की मांग की थी। लेकिन आज सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जोगी राहत नहीं देते हुए दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
                 बताते चलें कि अजीत जोगी की जाति मामले में हाई पावर कमेटी के सामने पेश होना है। अजीत जोगी ने हाईकोर्ट में याचिक दायर कर कमेटी के सामने पेश नहीं होने के लिए राहत की मांग की थी। कोर्ट ने आज अजीत जोगी की याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस की डबल बैंच में सुनवाई के बाद याचिक को खारिज करने फैसला सुनाया गया।
                    अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा है कि अजीत जोगी को जाति के मामले में बनी स्क्रूटिनी कमेटी के सामने पेश होना होग। जोगी को अपने पक्ष में समर्थन के लिए समस्त दस्तावेज़ों और सबूतों के साथ एक महीने के भीतर कमेटी के सामने उपस्थित होना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि उन्हें अपनी जाति के समर्थन में जरूरी दस्तावेज भी देना होगा। इसके बाद उन्हें अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। शासन की तरफ़  से अतिरिक्त महाधिवक्ता फ़ौज़िया मिर्ज़ा ने पैरवी की।
                                 बताते चलें कि समिति ने 23 मार्च 2019 को अजीत जोगी को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने उपस्थित होने का निर्देश दिया था। जोगी ने नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की। एकलपीठ ने याचिका को अप रिपक्व बताते हुए खारिज किया दिया था। इसके बाद जाति छानबीन समिति ने दुबारा नोटिस भेजकर जोगी को बयान दर्ज कराने 30 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
              इसके बाद अजीत जोगी ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर राहत की मांग की। आज न्यायालय ने निर्देश दिया है की छानबीन समिति प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन  करते हुए जोगी को पूर्ण अवसर देते हुए जल्द से जल्द इस प्रकरण में अपना फ़ैसला दे।
फैसला के बाद जोगी की प्रतिक्रिया
               हाईकोर्ट से रिट याचिका खारिज होने के बाद जनता कांग्रेस अध्यक्ष अमित जोगी ने कहा कि हाईकोर्ट ने आज ओपन कोर्ट में अपने आदेश का डिक्टेशन दिया है। हमें अभी हाईकोर्ट की प्रतिलिपि का इंतजार है। आदेश का सार कुछ इस तरह  है कि राज्य शासन ने उच्च स्तरीय छानबीन समिति बनाई है। वह नियमों के अनुरुप कार्य करे। नियमों से अलग हो कर अगर कोई कार्य करती है, तो हाईकोर्ट का पूरा संरक्षण अजीत जोगी को हासिल है।

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