हिन्दु धर्म पर संकट..फैलाया जा रहा भ्रम…संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा….पैदा किया जा रहा संकट का कृत्रिम बाजार

बिलासपुर— जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर के तत्वाधान में “मजबूती का नाम महात्मा गांधी” विषय पर शीर्षक पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन लखीराम सभागृह में हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रदीप कांत चौधरी और कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डाॅ. रागिनी नायक ने राष्टपिता महात्मा गांधी के विचारों की व्यापकता, प्रासंगिकता, आवश्यकता और उद्देश्य पर अपने विचारों को पेश किया। स्वागत भाषण जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने दिया। आभार प्रदर्शन डाॅ. चंदन यादव ने किया। जबकि कार्यक्रम का संचालन अजय श्रीवास्तव ने किया।
                                                 मोहनदास गांधी से महात्मा, राष्ट्रपिता बनने तक के संघर्ष की गाथा को  मुख्य वक्ता प्रो. प्रदीप कांत चौधरी ने सबके सामने रखा। चौधरी ने बापू पर लगने वाले आक्षेप और प्रश्न चिन्हों पर सटीक उदाहरण दिया। प्रो चौधरी ने कहा कि कभी बापू को साम्राज्यवादियों और पूंजीपतियों का एजेंट होने का आरोप लगा । कभी मुस्लिमों और अल्पसंख्यकों का पैरोकार बताया गया। अब बापू को केन्द्र में रखकर हिन्दू विरोधी होने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। दरअसल महात्मा गांधी का धर्म केवल और केवल इंसानियत का रहा है। महात्मा गांधी पर आरोप लगाने वाले कहते हैं कि हिंदू धर्म खतरे में है । चौधरी ने कहा कि बिना कानून संविधान के 500 वर्षों के मुस्लिम शासनकाल में हिंदू धर्म पल्लवित हुआ। उस समय हिन्दुओं पर संकट नहीं पैदा हुआ । आज के परिवेश में कोई संकट कैसे हो सकता है। यह संकट नहीं संकट का कृत्रिम बाजार है । गांधी से बड़ा कोई हिंदू नहीं है। गांधी से बड़ा कोई राम भक्त शायद ही हो। गांधी के अनुसार मेरे राम तो दशरथ के पुत्र और सीता के पति राम ही थे। लेकिन जब अन्तर्मन से देख लो तो वह आकार भी हैं और निराकार भी हैं। गांधी को विश्व का इकलौता आध्यात्मिक राजनीतिज्ञ बताते हुए प्रो. चौधरी ने कहा कि हम सबका धर्म है कि गांधी के विचारों को समझे उसके लिए संघर्ष करें।
                                          गांधी और दूसरे महापुरूषों की तुलना को अनुचित है। प्रो. चौधरी ने बताया कि लोगाों ने बापू और अंबेडकर केे बीच कृत्रिम खाई बनाने का प्रयास तक किया। गांधी के अछूत प्रेम तक को छद्म बताया गया । जबकि हिंदू परंपरा को जीवित रखते हुए अछूतों के लिए अद्वितीय संघर्ष बापू ने किया। प्रो. गांधी ने महान विचारक सुभाष पाल्लिकर के कथन भी प्रस्तुत किया कि दरअसल अंबेडकर और गांधी में समानता गहरी है। दोनों हिंसा के विरोधी थे और घृणा की  राजनीति को कभी नहीं अपनाया।
                                                                      राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रवक्ता डाॅं. रागिनी नायक ने अपने जोशिले उद्बोधन से खूब तालियां बटोरी। उन्होने कहा कि सत्य, अहिंसा रूपी शस्त्रों से लड़ने वाला इतना बड़ा विश्व नायक कोई दुनिया में दूसरा नहीं है। बापू के इन दो शस्त्रों से हमें निर्भय होकर अन्याय के खिलाफ लड़ने का हौसला दिया है। “मजबूती का नाम महात्मा गांधी” शीर्षक को केन्द्रित कर डाॅ. रागिनी नायक ने गांधी की शक्तियों विचारों की व्यापकता  और मिट्टी से योद्धा पैदा करने की वैचारिक शक्ति का उल्लेख किया। रागिनी कहा कि गांधी को समझना और अुनसरण करना हर किसी के बस की बात नहीं। महात्मा गांधी पर पांच  जानलेवा हमलों का भी रागिनी ने जिक्र किया। रागिनी नायक ने धार्मिक सद्भाव और पीड़ित की मदद को लेकर गांधी  के भाव को विस्तार से बताया।
                                  धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए रागिनी नायक ने कहा कि जन कल्याण और समाज में संदेश के लिए अपना सब कुछ त्याग देेने वाले राम के नाम पर लोगों की चमड़ी उधेड़ी जा रही है।
                                                         कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में श्रोताओं में बैठे शहर के पबुद्धजनों ने वक्ताओं से सवाल भी किए।  राष्ट्रीय सचिव चंदन यादव ने सभी महापुरूषों से प्रेरणा और शिक्षा लेने की बात कही।
                                   जिला कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री एवं प्रवक्ता अनिल सिंह चैहान ने बताया कि महात्मा गांधी के 150 वीं जयंती पर जिला कांग्रेस कमेटी“मजबूती का नाम महात्मा गांधी” संगोष्ठी कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर के प्रबुद्धजन, पत्रकार गण, शिक्षाविद्, समाजसेवी, कांग्रेसजन उपस्थित हुए।

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