होम आइसोलेशन मैनेजमेंट का दुर्ग माडल हो रहा सफल,3608 मरीज होम आइसोलेशन की अवधि पूरी कर हुए स्वस्थ

दुर्ग-बिना लक्षण वाले मरीजों के पाजिटिव चिन्हांकन होने के बाद उन्हें अंडरटेकिंग और डाक्टर की अनुमति के पश्चात होम आइसोलेशन की अनुमति दी जा रही है। ऐसे मामलों में लगातार मेडिकल सुपरविजन और आपात स्थिति में रिस्पांस टीम की त्वरित तैयारी की वजह से दुर्ग में होम आइसोलेशन मैनेजमेंट का माडल सफल हो रहा है। 4862 मरीजों को होम आइसोलेशन की अनुमति दी गई है। इसमें  3608 होम आइसोलेशन की अवधि पूरी कर स्वस्थ हो गए हैं। कलेक्टर डा. सर्वेश्वर भुरे ने होम आइसोलेशन कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर डा. रविराज ठाकुर को तथा मेडिकल कंसलटेशन से संबंधित जिम्मेदारी डा. रश्मि भुरे को सौंपी है। कंट्रोल रूम में आपात स्थिति में मरीजों को लाने ले जाने की व्यवस्था, मेडिकल किट की उपलब्धता एवं घर पर मेडिकल टीम भेजने की व्यवस्था देखी जाती है।सीजीवाल न्यूज के व्हाट्सएप ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

मरीजों को सबसे अच्छी मेडिकल सलाह मिले। इसके लिए टेलीकालिंग से स्टाफ नर्स मरीजों की समस्या पूछती हैं। इसके लिए मरीजों को चार जोन में बांटा गया है। स्टाफ नर्स मरीजों की दिक्कत मेडिकल आफिसर के समक्ष रखती हैं। सभी जोन के पीछे एक मेडिकल आफिसर हैं। मेडिकल आफिसर मरीजों की केस हिस्ट्री एवं उनकी दिक्कतें मेडिकल कंसल्टेंट के समक्ष रखते हैं। इसके बाद टीम रिफर किये जाने के संबंध में तुरंत निर्णय लेती है। निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया में पांच मिनट का वक्त लगता है।

आधे घंटे के भीतर मरीज को कोविड हास्पिटल में पहुंचा दिया जाता है। होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर में इस तरह के 113 मामले आए हैं जिसमें सभी में फौरन निर्णय लेकर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाया गया है। अभी 1252 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। रैपिड एंटीजन वाले मरीजों को मौके पर ही मेडिकल किट दे दिया जाता है और आरटीपीसीआर वाले मरीजों के घर कांटैक्ट ट्रेसिंग टीम मेडिसीन छोड़ती है। सभी के घरों में आइसोलेशन स्टीकर चस्पा हों। उनके यहां तीन बार फोन जाए और स्थिति की मानिटरिंग का रिकार्ड रखा जाए, यह प्रभारी अधिकारी सुनिश्चित करते हैं।

होम आइसोलेशन कंट्रोल रूम में कोमार्बिड पेशेंट की केस हिस्ट्री अलग से रखी जाती है और पहले ही इस पर कंसलटेशन हो जाता है कि आपात स्थिति में किस तरह का निर्णय लिया जाए, किसी तरह की अन्य तरह की मेडिकल कांपलिकेशन आने पर किस तरह से दवाई दी जा सकती है। हर मरीज पर पहले ही टीम द्वारा तैयारी कर लेने से ऐसी स्थिति आने पर निर्णय लेने में देर नहीं लगती और रिस्पांस टाइम सबसे बेहतर होता है।

केस 1-अचानक बढ़ा बुखार, आक्सीजन लेवल हुआ डाउन, आधे घंटे में पहुंचाया गया शंकरा हास्पिटल- गंजपारा निवासी बलराम को हल्का बुखार था लेकिन 8 सितंबर को बुखार अचानक बढ़ गया। स्टाफ नर्स ने रूटीन फोन कर आक्सीजन लेवल की जानकारी ली। आक्सीजन लेवल कम पाया गया। तुरंत शंकराचार्य हास्पिटल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। आधे घंटे के भीतर श्री बलराम शंकरा हास्पिटल में थे और उनका इलाज आरंभ हो गया था। अब वे डिस्चार्ज हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।

केस 2-सीने में दर्द की शिकायत पर भर्ती, अब स्वस्थ- भिलाई निवासी श्री इंद्रमोहन ने 19 सितंबर को सीने में दर्द की शिकायत की। इनका आक्सीजन लेवल भी कम हो रहा था। कंट्रोल रूम ने इन्हें रिफर करने का निर्णय लिया। इलाज के बाद अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

केस 3-सांस लेने में कठिनाई आई- चरौदा निवासी अजय श्रीवास्तव से स्टाफ नर्स ने 20  सितंबर को बातचीत की तो उन्होंने सांस लेने में कठिनाई की दिक्कत बताई। स्टाफ नर्स ने उन्हें कहा कि इसे गंभीरता से लेना है। उन्होंने मेडिकल आफिसर से बात कराई और फिर इन्हें तुरंत कंचादुर स्थित कोविड केयर सेंटर में एडमिट किया गया।

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