मेरा बिलासपुर

इस स्कूल के 10 वीं,12 टॉपरों को मिलेगा प्रेस्टिजियस M.N.SINHA अवार्ड…परिवार का एलान..जरूरतमंद मेरीटोरियस को मिलेगा 30 हजार

शिक्षकों का काम बच्चों में छिपी प्रतिभा को तलाशना और तराशना..शिक्षाविद् एमएन सिन्हा

बिलासपुर– अंग्रेजी और हिन्दी भाषा के शिक्षाविद् और केप एस्ट्रोलाजिस्ट के महान ज्ञाता एमएन सिन्हा के शिक्षा जगत को दिए गए महान योगदान के मद्देनजर सिन्हा परिवार ने अनूठा फैसला किया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि  एमएन सिन्हा को बच्चों से असीम प्यार था। उन्होने सारा जीवन बच्चों में प्रतिभा की तलाश में खर्च किया। दरअसल उन्हें प्रत्येक बच्चों में योग्यता का खान दिखाई देता था। उनका हमेशा मानना था कि इस दुनिया में प्रत्येक बच्चा अपनी विशेष पहचान लेकर आया है। शिक्षकों का काम छिपी प्रतिभा को तराशना, तलाशना और देश के लिए काबिल बनाना है। बाद में बच्चे अपना रास्ता खुद बना लेंगे। चूंकि एमएन सिन्हा ने अपना शैक्षणिक कार्य प्रदेश के सबसे पुराने स्कूल मल्टीपरपज से शुरू किया। इस बात को ध्यान में रखते हुए सिन्हा परिवार ने फैसला किया है कि प्रत्येक साल स्कूल के 10 वी और 12 वीं टॉपर को एमएन सिन्हा मेरिट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इसकी शुरूआत सत्र 2022-23 से किया जाएगा।

एमएन सिन्हा मेरिटोरियस अवार्ड

                       सिन्हा परिवार की बड़ी बेटी गुरूघासी दास केन्द्रीय विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ.अनुपमा सक्सेना ने फेसबुक में पिता की याद में एक पोस्ट किया है। पोस्ट के माध्यम से बताया है कि सिन्हा परिवार ने फैसला किया है कि प्रत्येक साल मल्टीपरज में 10 वीं और 12 वीं के टापर को एमएन सिन्हा मेरिट अवार्ड दिया जाएगा। इसके अलावा जरूरतमंद प्रतिभावान मेरिटोरियस को भी सम्मानित करने का परिवार ने फैसला किया है।

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मूल्यों से नही किया समझौता

सिन्हा परिवार से मिली जानकारी के अनुसार पिता मानवेन्द्र सिन्हा ने 1961 में अपना शिक्षकीय जीवन प्रदेश के सबसे पुराने स्कूल मल्टीपरपज से शुरू किया। पिताजी को बच्चों से बहुत ही प्यार था। उनका मानना था कि यदि बच्चों को बचपन से ही सही दिशा निर्देश दिया जाए तो देश का एक एक बच्चा देश की दिशा और दशा बदल सकता है। उन्होने प्रतिभावन बच्चों को घर घर से खोजकर निकाला। जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी किया। मदद की भनक भी किसी को नहीं लगती थी। रिटायर्ड होने के बाद भी उन्होने प्रतिभावान बच्चों की खोज को जारी रखा। उन्होने मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया। ना ही किसी पर ऐसा करने के लिए दबाव ही बनाया। 

अंतिम सांस के बाद हुई जानकारी..लोग हतप्रभ

             जानकारी देते चलें कि एमएन सिन्हा की गिनती हिन्दी और अंग्रेजी भाषा के महान शिक्षाविदों में होती है। बावजूद इसके उन्होने कभी भी दूसरों पर इस बात का अहसास नहीं कराया।  ज्योतिषशास्त्र के सबसे कठिन बिधा केप एस्ट्रोलाजिस्ट की दुनिया में एमएन सिन्हा बहुत ही जाना पहचाना नाम है। केप एस्ट्रोलाजिस्ट की दुनिया आज भी उन्हें सम्मान की नजरो से देखती है। बावजूद इसके उन्होने जब तक सांस चली..विधा का ना तो प्रदर्शन किया और ना ही दम्भ दिखाया। बिलासपुर समेत प्रदेश को इसकी जानकारी 22 दिसम्बर को अंतिम सांस लेने के  बाद ही हुई।  सरल सौम्य गुणों वाले एमएन सिन्हा की खुशी उस समय दो गुनी हो जाती थी जब वह किसी बच्चे से संवाद करते थे। इतना ही नहीं जब किसी छात्र को पठन पाठन से लेकर आर्थिक जरूरत पड़ी..एमएन सिन्हा का दरवाजा हमेशा खुला पाया। पढ़ाई लिखाई को लेकर उन्हें कभी भी अपने स्वभाव से कभी भी समझौता नहीं किया। आज भी उनके पढ़ाए बच्चे सैकड़ों नहीं हजारों की संख्या में देश विदेश में ऊंचे पदों पर आसीन है।

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जरूरतमंदों को मिलेगा मेरिटोरियस अवार्ड

               इन्हीं तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए सिन्हा परिवार के चारो भाई बहनों ने फैसला किया है कि हिन्दी और अंग्रेजी भाषा के महान शिक्षाविद् के वसूलों को यथावत रखा जाएगा। उनकी याद में प्रत्येक साल मल्टीपरपज स्कूल के दसवीं और बारहवी के टॉपर को दस-दस हजार रूपयों का एमएन सिन्हा मेरिट अवार्ड दिया जाएगा। दोनो अवार्ड अलग अलग होगे। इसके अलावा परिवार के सदस्य प्रोफेसर डॉ. अनुपमा सिन्हा, महिला एवं बाल विकास अधिकीर डॉ. तारकेश्वर सिन्हा. कलेक्टर तारन प्रकाश सिन्हा और प्राचार्य लतिका श्रीवास्तव ने सामुहिक फैसला किया है कि पिताजी की याद में जरूरत मंद मेरिटोरियस छात्र को प्रत्येक साल तीस हजार रूपयों का अलग से अवार्ड दिया जाएगा।

इसी सत्र से मिलेगा प्रेस्टिजियस अवार्ड

     अनुपमा सक्सेना समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि ऐसे मेरिटोरियस और जरूरत मंद छात्र-छात्रा जिन्हें उच्च शिक्षा के लिए देश के प्रतिष्ठापूर्ण  संस्थानों के लिए चयनित किया गया है। उनकी जानकारी सिन्हा परिवार को जरूरत भेजें। इससे प्रतिभावान बच्चों को सम्मानित करने में आसानी होगी। परिवार ने यह भी फैसला किया है कि सभी अवार्ड सत्र 2022-23 से ही दिया जाएगा।

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