12 हजार मनरेगा कर्मचारियों ने दिया एसडीएम को इस्तीफा..बर्खास्त आदेश को किया आग के हवाले ..लिपिक नेता सुनील ने कहा..हरसंभव करेंगे मदद

 
बिलासपुर—छत्तीसगढ़ 12000 से अधिक मनरेगा कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा रायपुर पहुंचकर प्रशासन को सामुहिक इस्तीफा दिया है। इस्तीफा सौपने के पहले मनरेगा कर्मचारियों ने उग्र धरना प्रदर्शन किया। 21 सहायक परियोजना अधिकारियों की सेवा समाप्त किए जाने के खिलाफ सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
 
                   प्रदेश के 12000 से अधिक मनरेगा कर्मचारियों ने आंदोलन के 62 वे दिन महारैली का आयोजन किया। जिला प्रशासन को सामूहिक त्यागपत्र देते हुए सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश जाहिर किया।
 
           रैली निकालकर मनरेगा कर्मचारियों ने रायपुर  एसडीएम देनेन्द्र पटेल के हाथ में सामुहिक इस्तीफा देते हुए शासन के खिलाफ आक्रोश जाहिर किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 21 सहायक परियोजना अधिकारियों की सेवा समाप्त किया जाना तानाशाही है। शासन ने ऐसा कर छत्तीसगढ़ के इतिहास में काला दिन लिख दिया है।
 
                कर्मचारियोंने बताया कि यह प्रदेश में इस प्रकार का पहला मामला होगा कि किसी भी कर्मचारी संगठन ने सामुहिक इस्तीफा जैसा बड़ा कदम उठाया हो। कर्मचारियों के अनुसार अधिकारियों की बर्खास्तगी आदेश  गैर संवैधानिक है। इस दौरान रैली में शामिल 8000 से अधिक कर्मचारियों ने एक साथ बर्खास्तगी के आदेश को भी जलाया। 
 
 
                     छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ प्रांत अध्यक्ष चंद्रशेखर अग्निवंशी और कार्यकारी अध्यक्ष राधेश्याम कुर्रे ने बर्खास्तगी के आदेश की घोर निंदा किया। पदाधिकारियों ने बर्खास्तगी के आदेश को तत्काल निरस्त नहीं किए जाने को कहा। कांग्रेस सरकार ने अपने जन घोषणा पत्र में वादा किया गया था, कि सभी संविदा कर्मचारियों की नियमितीकरण किया जाएगा। किसी भी संविदा कर्मचारी की छटनी नहीं  होगी। लेकिन सरकार ने वादा के खिलाफ कदम उठाया है।
 
          कर्मचारी संघ के नेताओं ने बताया कि हमारी दो सूत्रीय मांग है कि चुनावी जन घोषणा पत्र के अनुसार  मनरेगाकर्मियों का नियमितीकरण किया जाए।  प्रक्रिया पूर्ण होने तक ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण किया जाए। मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम 1966 के साथ पंचायत कर्मी नियमावली लागू किया जाए।
 
               महा संघ के प्रवक्ता सूरज सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी  में भेद है। आंदोलन बिना लक्ष्य पूर्ति के समाप्त नहीं होगा।
 
  मनरेगा कर्मियों की मांग जायज–सुनील
 
               मनरेगा कर्मचारियों की मांग जायज है। लिपिक नेता सुनील यादव ने बताया कि  छतीसगढ़ में कर्मचारियों को अपना अधिकार मांगना महंगा पड़ रहा है। आवाज बुलंद करने पर कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है। भत्ते, वेतन बढ़ोतरी की मांग करना मानों अब अपराध हो गया है। मनरेगा अधिकारियों को बर्खास्त किया जाना गैर संवैधानिक है। ऐसा आदेश जिससे रोजी रोटी को प्रभावित हो। हम उसकी निन्दा करते हैं। कर्मचारियों के साथ अन्याय का भी पुरजोर विरोध करते है। लिपिक संघ की तरफ से मनरेगा प्रदर्शनकारियों को हर संभव सहयोग किया जाएगा।

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