बच्चों ने नक्सलगढ़ में फोड़ा शिक्षा बम..बड़े बड़े जिलों की छुट्टी..बिलासपुर कमतर..साल भर हल करते रहे ट्रांसफर और मैनेजमेन्ट की गणित

छत्तीसगढ़ में बम धमाकों की गूंज के बीच नक्सलगढ़ के बच्चों ने फैलाया शिक्षा का उजियाराबिलासपुर—– इस बार दसवीं बोर्ड परिणाम ने चौंका दिया है। सुकमा जिले के छात्र छात्राएं सर्वसुविधा वाले शहरों की योग्यता पर भारी पड़े हैं। सुकमा के 1921 छात्र-छात्राएं दसवीं बोर्ड की परीक्षा शामिल हुए। इसमें 1729 छात्र छात्राओं ने रिकार्ड बनाते हुए 90 प्रतिशत परिणाम दिया। प्रदेश में बिलासपुर को एजुकेशन हब कहा जाता है। लेकिन इस बार जिले को दसवी बोर्ड परीक्षा की परिणाम सूची में अंतिम यानि 27 वां स्थान मिला है। निश्चित रूप से जिला शिक्षा प्रशासन को यह परिणाम चौका दिया होगा। यानि बिलासपुर इस बार दसवीं परीक्षा परिणाम देने में फिसड्डी साबित हुआ है। वहीं 12 का परिणाम भी शिक्षा विभाग के लिए सुकून देने वाला नहीं है। 27 जिलों में बिलासपुर को सूची में 21 स्थान हासिल हुआ है। 

                                                 छत्तीसगढ़ का छोटा सा जिला सुकमा की पहचान दो दशक से नक्सली वारदातों को लेकर है। 12 साल पहले ही ताड़मेटला में नक्सली वारदात में 76 जवान शहीद हुए। नक्सली ज्ञान की रोशनी बुझाने के लिए 123 स्कूल भवनों जमीदोज कर दिया। बावजूद इसके सुकमा आदिवासी बच्चों ने 10वीं  बोर्ड परीक्षा में कमाल कर दिया।  जिले के 90 फीसद छात्र पास होकर छत्तीसगढ़ में सुकमा जिले को पहले पायदान पर पहुंचा दिया। और सर्वसुविधायुक्त वाले शहर के लोग परिणाम को ताकते ही रह गए। 

आखिर सफलता कैसे मिली

               शिक्षकविहीन स्कूलों में स्थानीय पढ़े-लिखे युवाओं को प्रशासन शिक्षा का अलख जगाने खण्डहर स्कूलों को झा़ड़ फूंक कर शिक्षादूत तैनात किया। 15 साल से बंद कई स्कूलों में स्कूल की घंटिया बजने लगी। इस दौरान नक्सल घटना से परेशान लोगों को भी समझ में आ गया कि भावी पीढ़ी का भविष्य बंदूक से नहीं बल्कि कलम से सुधरेगी।

       कलेक्टर चंदन कुमार ने सत्र 2019-20 में प्रगति कार्यक्रम के नाम से योजना तैयार किया। दसवीं और बारहवीं बोर्ड के विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में गुणात्मक विकास के लिए जिला से लेकर स्कूल तक रूपरेखा खींची । पाठ्यक्रम को 10 माह के हिसाब से विभाजित किया। प्रत्येक माह के 20 दिन में माह का कोर्स पूरा कर मासिक टेस्ट और मूल्यांकन की परम्परा चलाई। खासकर कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान दिया गया।

        इतना सब कुछ के बाद भी सुकमा कलेकक्टर की माने तो शिक्षकों ने कार्ययोजना पर अमल किया। सामूहिक प्रयास से परिणाम सामने आआ। सुकमा की सफलता का श्रेय शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों को जाता है।

ऐसे ही नहीं मिली सफलता

सुकमा जिले की सफलता चरण दर चरण मिली है। 2017 में दसवी बोर्ड में सुकमा 22वें स्थान पर था। 2018 में 15वें और 2019 में पांचवें स्थान पर काबिज हुआ। और अब पहले स्थान पर सुकमा के बच्चों ने पताका फहराया है। बारहवीं बोर्ड में वर्ष 2017 में 27 वें स्थान पर रहने वाला सुकमा 2018 में 21वें और  2019 में नौवें स्थान से होकर 2020 में छठवां स्थान हासिल किया।

बच्चों ने बदल दी तस्वीर

 दसवीं बोर्ड में 90 फीसद परिणाम के साथ सुकमा जिला छत्तीसगढ़ में पहले पायदान पर है। जिले के 1921 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। कुल 1729 पास होकर 90 प्रतिशत परिणाम दिया। 1040 छात्रों में से 920 और 881 छात्राओं में से 809 उत्तीर्ण हुए।  प्रतिशत में छात्राओं ने छात्रों को पीछे छोड़ दिया। मजेदार बात है कि सुकमा जिले के कुल 953 बच्चे प्रथम श्रेणी में आए हैं। इनमें 492 छात्र और 461 छात्राएं हैं। जो अपने आप में बहुत बड़ा रिकार्ड है।

कमतर साबित हुआ बिलासपुर

                परिणाम आने के बाद बिलासपुर  का शिक्षा महकमा अब बगलें झांक रहा है। अब लोग एक दूसरे पर परिणाम को लेकर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। कोई इसके लिए तात्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को तो कोई सुविधा भोगी शहर प्रेमी शिक्षकों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इस बीच शिक्षकों और शिक्षा विभाग में इतनी गैरत बाकी है कि वह स्वीाकर कर रहे है कि हम फिसड्डी साबित हुए है। लेकिन इस परिणाम को लेकर खुद को दोषी मानने से साफ इंकार कर रहे हैं।

क्या कह रहे विभागीय लोग

              थोड़ी शर्मिन्दगी और ज्यादा गुरूर के साथ यहां के शिक्षकीय और विभाग के लोग कहते हैं कि हम हमेशा टाप पांच में रहे हैं। चाहे दसवी हो या 12 वीं..बिलासपुर के छात्रों ने इसके पहले बिलासपुर को हमेशा टाप में रखा। इस बार भी 12 वीं तीन विद्यार्थियों ने शहर का नाम रोशन किया। यह सच है कि इस बार जो हुआ ऐसा बिलासपुर के साथ पहले कभी नहीं हुआ।

जिला शिक्षा अधिकारी को बता रहे दोषी

                  दसवी में बिलासपुर जिले को अंतिम यानि 27 वां स्थान हासिल हुआ। जबकि  12 वी में 21 वां स्थान मिला है।  कुछ शिक्षक दबी जुबान में इस परिणाम के लिए पूर्व  जिला शिक्षा अधिकारी  की अकुशलता को मानते हैं। शिक्ष स्टाफ की माने तो  पूरे साल ट्रांसफर और जेब गर्म करने का खेल चलता रहा ।   शहर के आस पास अतिशेष शिक्षको का ट्रांसफर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों का सौदा टलता रहा । परिणाम सामने है। शिक्षकों ने बताया कि जब कमान्डर ही कमजोर होगा तो जीत की उम्मीद करना बेमानी है। परिणाम के  लिए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी के  चहेते लोग  भी जिम्मेदार माने जा रहे है। जिन्होने कुर्सी पक्की करने और कराने पर ध्यान दिया। और छात्रों को पूरे साल राम भरोसे छोड़ दिया।

बिलासपुर पर पड़े छोटे जिले भारी            

        जिलों की सफलता सूची में बिलासपुर का स्थान दसवी में 64.6 प्रतिशत अंक के साथ 27 वां है। जाहिर सी बात है यहां छोटे बड़े जिला का आगे होने की बात करना बेकार है। लेकिन 12 वी का भी परिणाम सूची भी दर्द देने वाला है। बिलासपुर जिला को 75.15 प्रतिशत के साथ 21 वां स्थान हासिल हुआ है। बिलासपुर से पीछे नारायणपुर, कोन्डागांव, गरियाबन्द, बलौदा बाजार, जगदलपुर और जांजगीर है।

Comments

  1. By Santosh sonar

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