तालाब को लेकर वादी प्रतिवादी में घमासान

IMG_20160310_154032बिलासपुर– चांटीडीह डबरीपारा में तालाब पाटने का स्थानीय निवासियों ने विरोध किया है। स्थानीय लोगों के अनुसार लोगों के निस्तार के लिए एक मात्र तालाब है। यदि इसे भी  पाट दिया गया तो उन लोगों के सामने समस्या खड़ी हो जाएगी।

                                     जानकारी के अनुसार तालाब किसी केवट परिवार का था । डी.डी.आहुजा ने 1994 में खरीदा । जब वह तालाब में काम करने गए तो स्थानीय लोगों ने विरोध किया। लोगों के अनुसार तालाब सरकारी है। डी.डी.आहुजा ने तालाब पर जबरदस्ती कब्जा किया है।  तात्कालीन पार्षद कल्पना मिश्रा और वर्तमान पार्षद बंशी साहू ने तालाब पाटने के खिलाफ जनता का समर्थन किया। मामला कोर्ट तक चला गया।

                              एसडीएम कोर्ट,लोअर कोर्ट और सेशन कोर्ट ने दस्तावेजों को खंगालने के बाद फैसला डी.डी.आहुजा के पक्ष में दिया। वर्तमान पार्षद और स्थानीय लोगों ने सेंशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामला अभी उच्च न्यायालय में है।

                स्थानीय लोगों के अनुसार डी.डी.आहुजा बड़े आदमी है। इसलिए उनके सामने हमारी कुछ नहीं चलती है। लोगों ने बताया कि डबरीपारा में एक मात्र तालाब है। जिससे गरीबों की निस्तारी होती है। अरपा के सूख जाने के बाद एक मात्र तालाब है जो गर्मी में राहत देता है। यदि इसे भी पाट दिया गया तो उनके सामने समस्या खड़ी हो जाएगी।

                       डी.डी.आहुजा ने बताया कि राजस्व रिकार्ड में तालाब का जिक्र नहीं है। मुझे वेवजह परेशान किया जा रहा है। मैने इस मामले को तात्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के सामने भी रखा था। उन्होने जांच का आदेश दिया। राजस्व रिकार्ड में तालाब का कहीं जिक्र नहीं है। ना ही इस स्थान से आम निस्तार का रिकार्ड ही है।

                                  डी डी आहुजा ने बताया कि जमीन हमने एक केवट परिवार से खरीदा है। केवट परिवार में सुमरन बाई,झुंगी बाई और ठकरी बाई अभी भी जीवित हैं। उन्हें भी इस बात की जानकारी है कि इस जमीन को उनके पिता ने बेचा है। चूंकि जमीन का स्तर बहुत नीचे है। यहां पानी का ठहराव होता है इसलिए लोगों ने इसे तालाब मान लिया है।

              आहुजा के अनुसार उन्हे काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसके उलट स्थानीय निवासियों ने बताया कि आहुजा देर रात मशीन लेकर तालाब को पाट रहे हैं। विरोध करने पर रूक जाते हैं। जैसे ही मामला शांत होता है..जेसीबी से तालाब में मिट्टी डालना शुरू कर देते हैं। जबकि तालाब सार्वजनिक है।

                  सीजी वाल ने मौके पर जाकर पाया कि तालाब की स्थिति बहुत ही खराब है। साइंस कालेज छात्रावास और आसपास सेप्टिक टैंक तालाब में ही खुलता है। तालाब के बगल में अरपा एक्वा का फर्मभी है। फर्म से लगातार पानी तालाब में गिरता है। जिसके चलते बारहों महीना पानी भरा रहता है।

तालाब सार्वजनिक संपत्ति

                 छ्त्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार तालाब चाहे निजी जमीन पर हो या सरकारी जमीन पर। उसे संरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। तालाब पर सबका अधिकार है। अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है।

नोटिस जारी

                 तालाब पर अतिक्रमण की शिकायत मिली है। तहसील कार्यालय से डी.डी.आहुजा को नोटिस जारी किया गया है। मौके पर मुआयना के बाद ही पता चलेगा कि तालाब है भी की नहीं। यदि राजस्व रिकार्ड में तालाब होगा तो उसे बचाया जाएगा। देखना होगा कि तालाब का खसरा और खतौनी क्या कहता है।

                                                                                                                     पी.सी.कोरी.तहसीलदार

रिकार्ड में तालाब नहीं

                          1955 के नजूल रिकार्ड में यहां तालाब का जिक्र नहीं है। रिकार्ड में वाजीव-उल-हक का भी जिक्र नहीं है। ऐसे में लोगों का निस्तार होने का सवाल ही नहीं उठता। मुझे वेवजह परेशान किया जा रहा है। तीन जगह से मुझे रिकार्ड के आधार पर जीत मिली है। हाईकोर्ट में मुझे न्याय मिलेगा।

                                                                                                                           डी.डी.आहुजा..जमीन मालिक

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