हमार छ्त्तीसगढ़

21 जून से जन जागरूकता अभियान चलाएगा राष्ट्रीय पुरानी बहाली संयुक्त मोर्चा,कहा-पुरानी पेंशन योजना के पक्ष में खड़ी हो सरकार

रायपुर-सरकारी कर्मचारियों की पेंशन योजना सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आता है . यह एक सर्वविदित सच्चाई है की एक निश्चित अवधि के बाद मनुष्य की मानसिक एवं शारीरिक अवस्था में परिवर्तन के चलते उसकी कार्य क्षमता में कमी आने के कारण वृद्धा अवस्था में वह नियमित कमी करने से वंचित हो जाता है और उसे अपने प्रियजनों के रहमोंकर्म पर निर्भर रहना पड़ता है.यदि हम वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देंखें तो आज जो लोग समाज एवं देशहित के कार्य में लगें हुए हैं,सेवानिवृत्त के बाद वृध्दावस्था में उनके सम्मानपूर्वक जीवन यापन की वयवस्था होनी चाहिए.सीजीवालडॉटकॉम के WhatsApp NEWS ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

आज छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों के मामलें में केंद्र द्वारा पारित नवीन अंशदायी पेंशन योजना विधेयक को पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा पारित तो कर दिया गया, लेकिन आजकल सेवानिवृत हो रहे सरकारी कर्मचारी इसी योजना की खामियों को भुगतने को मजबूर हैं.इसकी बानगी देखनी हो तो ऐसे कई शासकीय कर्मचारी हैं हो आज सेवानिवृत हो चुकें हैं.उन लोगों को सिर्फ पेंशन योजना के नाम पर १००० रूपये से लेकर 2 हजार तक ही पेंशन बन रहा है.

अगर हम नवीन अंशदायी पेंशन योजना को दुखदायी पेंशन योजना के नाम से नवाजे तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.किसी भी बड़े योजना को लागू करने के पहले उसके नफे नुक्सान पर बहस होना बहुत जरुरी है.हो सकता है कुछ मामलों में नई पेंशन स्कीम में ज्यादा अंशदान कर रहे कर्मचारियों के लिए यह लाभप्रद हो सकती है,जिनका सेवानिवृत काल ज्यादा हो.लेकिन जो 35-40 वर्ष की आयु में नौकरी लग रही हो या नियमित हो रहें हो, उन्हें सेवानिवृत पर मुट्ठी भर पेंशन राशी पर बुढ़ापा गुजरने पर विवश होना पड़ रहा है.

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ओल्‍ड पेंशन के ये हैं मुख्‍य लाभ ops में पेंशन की राशि लास्‍ट ड्रॉन सैलरी यानी अंतिम आहरित वेतन के आधार पर तैयार होती है। ओपीएस में महंगाई दर बढ़ने के साथ ही महंगाई भत्‍ता भी बढ़ता है, जिसका कर्मचारियों को लाभ होता है। जब भी कोई सरकार नया वेतन आयोग लागू करती है तो समानांतर रूप से पेंशन की राशि में भी इजाफा हो जाता है।

जबकि इसके विपरीत यह है एनपीएस का दायरा न्‍यू पेंशन स्‍कीम यानी एनपीएस 1 अप्रैल, 2004 से लागू की गई थी। इसमें नए कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के समय पुराने कर्मचारियेां की भांति पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन के जो भी लाभ हैं, वे नहीं दिए जाते हैं। एनपीएस में नए कर्मचारियों व अधिकारियों से उनके वेतन और डीए का 10 फीसदी अंशदान भी लिया जाता है। इतना ही अशंदान उनके नियोक्‍ता यानी राज्‍य अथवा केंद्र सरकार या ऑटोनॉमस संस्‍थान को भी जमा करना होता है। यहां जानिये नई पेंशन और पुरानी पेंशन की तुलना nps और ops यानी नई पेंशन और पुरानी पेंशन योजना की तुलना की जाए तो पुरानी पेंशन के अधिक फायदे हैं।

सबसे पहली बात तो यह है कि पेंशनर के साथ उसके पूरे परिवार की सुरक्षा इसमें शामिल रहती है। सेवा निवृत्‍त हुए कर्मचारी को अगर इसका लाभ मिलता है तो इससे उसका रिटायरमेंट सुरक्षित हो जाता है। सरकार के आदेश में यह कहा गया है कि ओपीएस के लिए पात्र होने के बाद इन कर्मचारियों का एनपीएस खाता बंद कर दिया जाएगा।

इसी राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर बी.पी.सिंह रावत राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश में छत्तीसगढ़ प्रदेश के राष्ट्रीय पुरानी बहाली संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, विरेन्द्र दुबे के दिशानिर्देश में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश भर में 21 जून 2020 से जन जागरूकता अभियान चलाएगा.

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छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद गुप्ता,जिला अध्यक्ष गोपी वर्मा, प्रांतीय पदाधिकारी शैलेन्द्र यदु, बाबूलाल लाड़े, जिला सचिव जीवन वर्मा, हंसकुमार मेश्राम,देवेन्द्र साहू,ब्रिजेश वर्मा,चन्द्रिका यादव,फ्लेश साहू ,चुनलेश साहू,ललीता कन्नौजे,रूपेन्द्रनंदे,कमलेश्वर देवागन,पंचशीला सहारे,राजकुमारी जैन,मोरेश्वर वर्मा,मनोज वर्मा,सुकालू वर्मा,दानेश्वर लिल्हारे,दिलेश्वर साहू,गांधी साहू,सुनील शर्मा,महेश उईके,विरेन्द रंगारी,मंजू यादव,रामाधीन भुआर्य,भेसराम रावटे,दिवाकर बोरकर,दिलीप धनकर सर्व ब्लाक अध्यक्ष संजय राजपूत, अनुराग सिंह, मनीष पसीने, अनील शर्मा, गिरीश हिरवानी, दिनेश कुरैटी, श्रीहरी,जितेन्द पटेल, निर्मला कसारे, दिनेश सिंग, सचिव,दुष्यंत अवस्थी, पीला लाल देशमुख, नरेंद्र सिंग, जोहित मरकाम, कैलाश कनौजे, सईद कुरैशी, मार्टिन मसीह, रवीन्द्र रामटेके आदि सभी ने पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग सोशल मिडिया में प्रमुखता के साथ रख रहें है

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