मेरा बिलासपुर

जंगल की मौत…जोगी ने की जांच की मांग

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बिलासपुर—-मरवाही विधायक अमित जोगी शनिवार को देर शाम आधा दर्जन से अधिक नामचीन कांग्रेस नेताओं और समर्थकों के साथ प्रभारी कलेक्टर रानू साहू से मुलाकात कर पेन्ड्रा में बुजुर्ग की मौत पर प्रशासनिक संवेदनहीनता की शिकायत की। प्रभारी कलेक्टर से अमित जोगी ने बुजुर्ग की मौत को लेकर आ रहे रोज नए खुलासे पर नाराजगी जाहिर करते हुए मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विशेष जांच टीम गठन की मांग की है। मरवाही विधायक और प्रभारी कलेक्टर के बीच बुजुर्ग की मौत पर आधे घंटे से अधिक समय तक संवाद चला। जोगी ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना जाहिर करते हुए कहा कि प्रशासन से इस मामले में जितनी गंभीरता और तत्परता की जरूरत थी वैसा कुछ भी दिखाई नहीं दिया। इस दौरान कोटा विधायक रेणु जोगी,बिल्हा विधायक सियाराम कौशिक,मस्तूरी विधायक दीलिप लहरिया, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धरमजीत सिंह और अनिल टाह भी मौजूद थे। सभी ने बारी बारी से क्षेत्र में सरकारी तंत्र की लापरवाही पर आक्रोश जाहिर किया।

                       मरवाही विधायक कांग्रेस नेता अमित जोगी शनिवार को देर शाम 8 बजे अपने समर्थकों के साथ प्रभारी कलेक्टर रानू साहू से मिले। मुलाकात के दौरान अमित जोगी ने रानू साहू से कहा कि मीडिया में रोज नए खुलासे हो रहे हैं कि जंगल सिंह की मौत भूख से हुई है…कभी सुनने में आ रहा है कि उसकी मौत लू से हुई है…अब कहा जा रहा है कि जंगल की मौत चोट से हुई है। मै जानना चाहता हूं कि जंगल की मौत किन कारणों से हुई है। अमित जोगी ने कलेक्टर से दो टूक कहा कि अब तो लगने लगा है कि जंगल की मौत के कारणों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कलेक्टर से मौत के कारणों से पर्दा हटाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की।

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                मीडिया से बातचीत करते हुए अमित जोगी ने कहा कि मस्तूरी निवासी जंगल सिंह की मौत पेन्ड्रा में किन परिस्थितियों हुई है। मौत के कारणों के रोज नए खुलासे आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि कहीं कुछ छिपाया जा रहा है। इसलिए हमने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मौत के बाद पीड़ित परिवार को सहायता क्यों नहीं पहुंचाया गया जानने का प्रयास किया है। इसके अलावा अन्य कई मुद्दों को लेकर हमने कलेक्टर को मौखिक और लिखित ज्ञापन सौंपा है। कलेक्टर ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। बावजूद इसके कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने तय किया है कि मौत के कारणों को सार्वजनिक किए बिना न तो चैन से बैठेगा और ना ही सरकार को बैठने दिया जाएगा।

                      एक सवाल के जवाब में मरवाही विधायक जोगी ने बताया कि पीड़ित परिवार को पिछले डेढ़ साल से मनरेगा का भुगतान नहीं हुआ है। जिला प्रशासन कहना है कि पीड़ित परिवार को मनरेगा का भुगतान कर दिया गया है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि फिर जंगल सिंह काम की तलाश में पेंड्रा क्यों गया। जबकि प्रभारी कलेक्टर का कहना है कि मस्तूरी में मनरेगा का काम चल रहा है। इससे जाहिर होता है कि प्रशासन अपनी गलतियों को छिपाने के लिए रोज नए-नए तर्क गढ़ रहा है।

              मौत और सरकार की भूमिका के एक सवाल पर जोगी ने बताया कि सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। पहले अंबिकापुर और अब बिलासपुर में मौत ने सरकार को आइना दिखा दिया है। सरकार के नुमाइंदों का दावा है कि प्रदेश में किसी की मौत भूख से नहीं हुई है। मै पूछ रहा हूं कि आखिर ये मौत किन कारणों से हुई है।

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                                                   जोगी ने पत्रकारों से बताया कि जंगल सिंह के परिवार को फ्यूनरल के लिए प्रारंभिक सहायता तक नहीं दी गयी। उसकी माली हालत अच्छी नहीं है। सब कुछ जानते हुए भी प्रशासन पत्थर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि मृतक जंगल सिंह ने 10 साल पहले घर के लिए दो डिसमिल जमीन मांगा था।   गरीब होने के कारण उसकी मांग को अनसुनी कर दिया गया। लेकिन मस्तूरी क्षेत्र में ही कुछ बड़े लोगों को हजारो एकड़ जमीन कौडियों के दाम दे दिया गया। इससे जाहिर होता है कि रमन सरकार पूंजीपतियों और रसूखदारों की हितैषी बनकर रह गयी है।

                  मीडिया से चर्चा करते हुए जोगी ने बताया कि हमने कलेक्टर से मांग की है कि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द फ्यूनरल राशि का भुगतान किया जाए। मृतक की पत्नी को योग्यता अनुसार नौकरी का प्रबंध और जंगल सिहं के लड़के को आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलाकर सरकार उसकी शिक्षा की  जिम्मेदारी उठाए। साथ ही पीडित परिवार के लिए आवास की व्यवस्था करे।

                मौत का कारण क्या हो सकता है के प्रश्न पर जोगी ने कहा कि जिस तरह से मामले को छिपाया जा रहा है उससे जाहिर होता है कि जंगल की मौत भूख से हुई है। प्रारंभिक जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं उसके अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जंगल के पेट में एक भी दाना नहीं था। प्रशासन की दो सदस्यीय जांच टीम कहती है कि उसकी मौत चोट से हुई है। पेंड्रा स्थानीय प्रशासन का अपना अलग ही तर्क है। सच्चाई तो यह है कि जंगल की मौत भूख से हुई है।

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           अंबिकापुर में भूखहड़ताल के दौरान कांग्रेसियों का समर्थन नहीं मिला के जवाब में अमित जोगी ने कहा कि टी.एस.सिंहदेव हमारे साथ भूख हड़ताल पर थे। उन्होंने पीड़ित परिवार के समर्थन में हमारा साथ दिया है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल घटना स्थल से कुछ किलोमीटर दूर थे लेकिन पीड़ित परिवार के घर तक पहुंचना मुनासिब नहीं समझा। बावजूद इसके कार्यकर्ताओं ने हमारा समर्थन किया है। उन्होंने गुटबाजी से इंकार करते हुए कहा कि चूंकि रात्रि में बिलासपुर कलेक्टर से मिलना था इसलिए स्थानीय कार्यकर्ता समय पर नहीं पहुंच पाए। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी है। फिर भी इस प्रश्न के दौरान अमित जोगी कुछ असहज और तल्ख नजर आए।

                                                          विसरा रिपोर्ट के बाद मौत के कारणों का होगा खुलासा

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 मरवाही विधायक ने पीड़ित परिवार के लिए यथासम्भव मदद की मांग सरकार से की है। उन्होंने जानना चाहा कि मौत को लेकर रोज नए कारण सामने आ रहे हैं। सच्चाई क्या है इसे उन्होंने जानना चाहा है। सच्चाई विसरा रिपोर्ट के सामने आ जाएगी। जहां तक जंगल की मौत की बात है तो हमारे जांच के अनुसार मई महीने में उसके राशन कार्ड में चावल और मिट्टी तेल दिये जाने की जानकारी है। बुजुर्ग होने के कारण उसे सामाजिक पेंशन भी दिया गया है। मनरेगा के तहत करवाए पिछले साल का भुगतान भी दिया गया है। चूंकि मनरेगा में डिमांड पर काम दिया जाता है। जंगल ने इस साल अपना नाम नहीं लिखाया था। इसलिए उसको काम नहीं दिया गया। पेन्ड्रा काम के लिए गया होगा यह संभव नहीं है क्योंकि मस्तूरी में मनरेगा के तहत दो विभिन्न योजनाओं का काम चल रहा है।

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                                                                                                                                            रानू साहू…प्रभारी कलेक्टर…बिलासपुर

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