32 स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम स्कूल खुलेंगे..38,231 करोड़ की अनुदान मांगे पारित

रायपुर/छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, स्कूल शिक्षा और सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2022-23 हेतु 38 हजार 231 करोड़ 65 लाख 55 हजार रूपए की अनुदान मांगे सर्व सम्मति से पारित की गई। इनमें आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के लिए 32341 करोड़ 55 लाख 74 हजार रूपए, स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 5632 करोड़ 50 लाख 90 हजार रूपए और सहकारिता विभाग के लिए 257 करोड़ 58 लाख 91 हजार रूपए की राशि शामिल हैं। अनुदान मांगों की चर्चा में सदस्यगण नारायण चंदेल, शैलेष पाण्डेय, डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, श्रीमती संगीता सिन्हा, अजय चन्द्राकर, श्री केशव चन्द्रा और श्री पुन्नूलाल मोहले ने भाग लिया।

मंत्री डॉ. टेकाम ने अनुदान मांगों पर चर्चा में भाग लेने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सदस्यों द्वारा जो बहुमूल्य सुझाव दिए गए हैं उन्हें विभागों की योजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों में शासकीय स्कूलों में 80 हजार से अधिक दर्ज संख्या बढ़ी है। आवश्यकता के आधार पर नवीन भवन स्वीकृत किए जा रहे हैं। साथ ही पुराने भवन की मरम्मत भी कराई जा रही है। अधोसंचना विकास के लिए बजट में 289 करोड़ 22 लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि राज्य में छात्र, शिक्षक अनुपात 1ः21 है, जो अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। शिक्षकों को शिक्षकविहीन एवं कमी वाले स्कूलों में पदांकित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 14580 शिक्षकों की सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया था, जिसके विरूद्ध अब तक 2548 व्याख्याता, 2814 शिक्षक तथा 2209 सहायक शिक्षक मिलाकर कुल 7571 शिक्षकों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। आगामी शिक्षक सत्र के पूर्व शेष पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाएगी। 

मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता की भावनाओं एवं अंग्रेजी भाषा की वैश्विक मान्यता को देखते हुए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने राज्य के बच्चों के हित में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय प्रारंभ करने का निर्णय लिया। हमारी सरकारी चाहती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ के बच्चे भाग ले सकें और सफलता प्राप्त करें। इस उद्देश्य के साथ वर्तमान में अंग्रेजी माध्यम के 171 शासकीय स्कूल संचालित हैं। बच्चों के शिक्षण के लिए इन विद्यालयों में उत्कृष्ट शिक्षकों का चयन किया गया है। शासन द्वारा छत्तीसगढ़ महतारी दुलार योजना के अंतर्गत कोरोना महामारी के कारण अनाथ हुए 512 बच्चों को अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में प्रवेश दिया गया है। उन्होंने बताया कि सत्र 2022-23 में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के समान 32 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय खोले जाएंगे।

डॉ. टेकाम ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नवा रायपुर छत्तीसगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बोर्डिंग स्कूल खोलने का दूरगामी परिणाम देने वाला निर्णय लिया है। इस विद्यालय में एक हजार छात्र-छात्राएं अध्ययन कर सकेंगे। विद्यालय संचालन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट विद्यालय सोसायटी का गठन किया गया है। इस विद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पढ़ने-पढ़ाने की सुविधा उपलब्ध होगी।

मंत्री डॉ. टेकाम ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की सरकार ने मृतक शासकीय कर्मचारियों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 10 प्रतिशत की सीमा को शिथिल किया गया है। इसके फलस्वरूप स्कूल शिक्षा विभाग ने तत्परता का परिचय देते हुए 1722 लोगों को सहायक शिक्षक, सहायक ग्रेड एवं भृत्य के पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति दी है।

घोषणा पत्र के अनुसार दो वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले 35 हजार से अधिक शिक्षक संवर्ग (पंचायत एवं नगरीय निकाय) का भी शिक्षा विभाग में संविलयन कर दिया गया है। इसी प्रकार घोषणा पत्र के अनुसार शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत कक्षा 8वीं में अध्ययनरत छात्रों को जिनका भविष्य अनिश्चित था, उनको दिशा प्रदान करते हुए कक्षा 12वीं तक लागू किया गया है। वर्ष 2021-22 से निजी स्कूलों में शुल्क की प्रतिपूर्ति भी ऑनलाईन की जा रही है। उन्होंने बताया कि 2022-23 के बजट में 11 हाई स्कूल और 12 हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन के लिए 20 लाख रूपए, शैक्षिक संस्थाओं के भवन निर्माण के लिए 125 करोड़, आश्रम शालाओं के लिए 87 करोड़ 56 लाख 20 हजार रूपए, विशेष पिछड़ी जनजाति आश्रम के लिए 25 लाख 40 हजार रूपए, कन्याओं को शिक्षा प्रोत्साहन हेतु 5 करोड़ 80 लाख रूपए, राज्य छात्रवृत्ति हेतु 140 करोड़ 10 हजार रूपए का प्रावधान रखा गया है।

मंत्री डॉ. टेकाम ने आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अनुदान मांगों का उत्तर देते हुए बताया कि वन अधिकार अधिनियम अंतर्गत राज्य में 4 लाख 45 हजार से अधिक हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र तथा 45 हजार 700 से अधिक हितग्राहियों को सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। व्यक्तिगत वन अधिकार दावों के अंतर्गत 3,63,597 हेक्टेयर तथा सामुदायिक वन अधिकार दावों के तहत 19,82,977 हेक्टेयर वन भूमि पर मान्यता प्रदान की गई है। वन अधिकार पत्र वितरण में छत्तीसगढ़ राज्य देश के अग्रणी राज्यों मे है।

उन्होंने बताया कि वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार ग्राम सभाओं को दिया जाएगा। अब तक प्रदेश में 3615 ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधन अधिकार 14,63,739 हेक्टेयर वन भूमि पर मान्य किया गया है। धमतरी के जबर्रा ग्राम से इसकी शुरूआत की गई। इसके तहत ग्राम सभा जबर्रा को 5352 हेक्टेयर वन भूमि पर सामुदायिक वन संसाधन अधिकार की मान्यता दी गई है, जो देश में किसी एक गांव की मान्य किए जाने वाला सर्वाधिक क्षेत्र है। डॉ. टेकाम ने बताया कि बस्तर एवं सरगुजा संभाग के स्थानीय निवासियों को जिला संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों में उपलब्ध रिक्तियों पर नियुक्ति दी जा रही है। इसमें जिला कोरबा एवं गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को भी सम्मिलित कर लिया गया है। सरकार विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूहों के युवकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास कर रही है।

भर्ती प्रक्रिया का पालन किए बिना अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित स्थान से 20 प्रतिशत तक विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों को जिला संवर्ग में नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 2011 व्यक्तियों को तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर शासकीय सेवा में नियुक्ति दी गई है। वर्ष 2022-23 में चारों प्राधिकरणों के लिए 161 करोड़ रूपए का प्रावधान बजट में किया गया है। इनमें बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के लिए 55.50 करोड़, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण हेतु 35.50 करोड़, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण हेतु 34 करोड़ और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण हेतु 36 करोड़ रूपए का प्रावधान शामिल है। बजट में विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह के विकास के लिए 129.30 करोड़ रूपए, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 272.29 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

मंत्री डॉ. टेकाम ने सहकारिता विभाग के अनुदान मांगों के संबंध में बताया कि किसानों की सुविधाओं को देखते हुए प्रदेश में संचालित 1333 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का पुनर्गठन कर 725 नवीन प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां गठित की गई है। प्रदेश में अब कुल 2058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषकों को कृषि ऋण वितरण एवं धान खरीदी की सुविधा प्रदान की गई है। सहकारी शक्कर कारखानों को किसानों के गन्ना का मूल्य भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कार्यशील पूंजी की आवश्यकता होती है। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा सहकारी शक्कर कारखानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए बजट में 50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *