तीसरी लहर के पीक में रोज आएंगे 60 से 65 हजार कोविड केस,स्टडी में खुलासा

नई दिल्ली-देशभर में कोरोना को लेकर लगाई गईं पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं. इससे तीसरी लहर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. विशेषज्ञ भी इसी महीने कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जता रहे हैं. आईआईटी कानपुर के प्रफेसर मणींद्र अग्रवाल ने कहा है कि कोविड की तीसरी लहर के बारे में एक महीने पहले किए गए आकलन में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने दावा किया है कि अगर अगस्त के मध्य तक सारी पाबंदियां हटाई गईं तो अक्टूबर-नवंबर में कोरोना की तीसरी लहर पीक पर पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वायरस ने रूप नहीं बदला तो हर दिन अधिकतम 60-65 हजार केस आने की आशंका है.  

‘वायरस बच्चों को गंभीर रूप से बीमार नहीं करता’
उत्तर प्रदेश में 16 अगस्त से चरणबद्ध तरीके से स्कूल-कॉलेज खोलने के राज्य सरकार के फैसले को प्रफेसर ने सही ठहराया. उन्होंने कहा, प्रदेश में सीरो-पॉजिटिविटी 72-73 प्रतिशत है. वायरस बच्चों को गंभीर रूप से बीमार नहीं करता है. इसके समर्थन में पर्याप्त डेटा उपलब्ध है. राष्ट्रीय सर्वे में बच्चों में बड़ों के बराबर ही सीरो-पॉजिटिविटी मिली है. खतरा इस बात का है कि वे बीमारी घर न ले आएं, लेकिन समझना होगा कि वयस्कों में भी काफी हद तक हर्ड इम्यूनिटी आ गई है। टीकाकरण भी जारी है. 

दूसरी लहर से कम घातक होगी तीसरी लहर
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना की दूसरी लहर में जितना हाहाकार देखा गया, उतना तीसरी लहर में नहीं होगा. तीसरी लहर कम घातक होगी. इसी साल मई में IIT हैदराबाद के एक प्रोफेसर विद्यासागर ने कहा था कि भारत के कोरोनावायरस का प्रकोप मैथेमेटिकल मॉडल के आधार पर कुछ दिनों में पीक पर हो सकता है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, उस वक्त विद्यासागर ने बताया था ‘हमारा मानना है कि कुछ दिनों के भीतर पीक आ जाएगा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार जून के अंत तक प्रतिदिन 20,000 मामले दर्ज किए जा सकते हैं.’

केंद्र सरकार अलर्ट
वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने तीसरी लहर की आशंका जाहिर की है. जिसकी वजह से सरकार ने कोरोना वैक्सीनेशन अभियान में तेजी ला दी है. वहीं,  सुप्रीम कोर्ट में कोरोना वैक्सीन के को लेकर सरकार ने जो हलफनामा दिया था, उससे 2.82 करोड़ डोज पीछे रह गई है. दरअसल, सरकार ने जुलाई के अंत तक  कोरोना की 51.6 करोड़ वैक्सीन की डोज सप्लाई करने का लक्ष्य रखा था और यही जानकारी अपने हलफनामे में भी दी थी. हालांकि वादे के अनुसार सरकार ने 31 जुलाई तक अपने लक्ष्य का 94.5 प्रतिशत पूरा कर लिया है. 

हाल ही में विशेषज्ञों ने कहा था कि कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट, वायरस के अन्य सभी वैरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है और चेचक की तरह आसानी से फैल सकता है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के दस्तावेज में अप्रकाशित आंकड़ों के आधार पर दिखाया गया है कि टीके की सभी खुराकें ले चुके लोग भी बिना टीकाकरण वाले लोगों जितना ही डेल्टा वैरिएंट को फैला सकते हैं. सबसे पहले भारत में डेल्टा वैरिएंट की पहचान की गयी थी.

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