मेरी नज़र में… Archive

पटरी से उतरी 10 राज्यों की धड़कन…सिहर उठा देश…हादसे का जिम्मेदार कौन..

बिलासपुर ( गिरिजेय ) उत्कल कलिंगा एक्सप्रेस केवल ट्रेन नहीं…संस्कृति और संस्कार की पटरी पर चलने वाली विज्ञान की बेटी है। जगन्नाथ धाम को हरिद्वार धाम से जोड़ने वाली उत्कल कलिंगा का दूसरा नाम राष्ट्रीय एकता भी है। चार दशक से अधिक समय से उत्तर को दक्षिण से जोड़ने वाली उत्कल कलिंंगा एक्सप्रेस करीब दस 

वो…तो…सब ठीक है,पर बिलासपुर को बिलासपुर कब बनाएंगे.?

(गिरिजेय)इस बार आजादी पर्व 15 अगस्त के साथ भारत छोड़ो आंदोलन की 75 वीं वर्षगांठ की भी चर्चा है….।और इस बीच एक नारा दिया जा रहा है कि गंदगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद , सम्प्रदाय, जातिवाद, गरीबी, बेकारी, बीमारी, निरक्षरता  …भारत छोड़ो…. नया भारत बनाना है।नारा बहुत अच्छा है और संकल्प भी बहुत अच्छा है। देश की

टूटे हुए पेड़ बोल रहे-मुझमें..कहीं थोड़ी सी..अभी बाकी है जिन्दगी..

बिलासपुर(विशेष संवाददाता)।फिल्म अग्निपथ का मशहूर गाना..अभी मुझमें कहीं बाकी..थोड़ी सी है जिन्दगी..।मिट्टी तेल हॉकर गली उजड़ने के बाद..अस्त व्यस्त लेटे  दो आम के पेड़ों को देखकर अग्निपथ गाना बरबस ही याद आ गया। कभी मिट्टी तेल हॉकर गली में रौनक हुआ करती थी। चहल पहल इतनी कि चार पहिया वाहनों का निकालना मुश्किल था। दो

देखें VIDEO:बिलासपुर से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर बारिश में एक सफर…

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ को कुदरत ने कई अनमोल तोहफे दिए हैं…उसमें सबसे नायाब तोहफा है,हरियाली का…बिलासपुर इलाके  के खाते में भी इसका एक हिस्सा आया है….।इसे महसूस करना है तो हम निकल सकते हैं कोटा रोड पर..।महज बीस से तीस किलोमीटर का फासला तय करने के बाद सावन की हरियाली आपका स्वागत करेगी..। सड़क के दोनों ओर

आज उनका जन्मदिन है, जिनका नाम प्रभाष जोशी था :

हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में जो नाम अमर हैं, उनमें श्रद्धेय प्रभाष जोशी जी का भी नाम है। उनका जन्मदिवस 15 जुलाई को है। सहजता – सरलता तो किसी का भी व्यक्तित्व निखार देती है। लेकिन यही सहजता – सरलता लेखन में उतर जाए तब तो निश्चित ही वह लेखन अमर हो जाता है…. ऐसे

कांग्रेस को मिल गए दो केन्डीडेट,बिलासपुर में मजबूत हुई पार्टी…?

इश्क का जौक–ए-नजारा मुफ्त में बदनाम है, हुश्न खुद बेताब है,जलवे दिखाने के लिए !! मशहूर शायर मजाज लखनवी साहब की ये लाइने यकीनन हुस्न- ओ- इश्क की दुनिया को लेकर लिखी गईं हैं। लेकिन बिलासपुर शहर में कांग्रेस की राजनीति में उम्मीदवारों की दावेदारी  को लेकर जो कुछ चल रहा है, उसके पेशे नजर

‘‘ऊँची उड़ान” के लिए शैलेष का ‘ARRIVAL’

राजधानी रायपुर में जगह है…. स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा ………. , जहाँ से बहुत दूर – दूर तक के लिए उड़ान भरने वाले लोग हवाई जहाज तक  पहुंचते है …..ऐसे प्रवेश द्वार से  ….. जिस पर हिंदी में आगमन और अँग्रेजी में ARRIVAL साफ – साफ लिखा है ……. इसी गेट के ठीक सामने……… कांग्रेस

रंगों के संगम में..जो डूबा सो पार..

(रुद्र अवस्थी)ठाकुर- अभी तक दिल नहीं भरा होली से ?जया भादुड़ी-ये…ठाकुर चाचा……होली रंगो का त्यौहार है…….लाल, पीले, नीले, हरे…कैसे दिल भरेगा इन रंगो से….जरा आप ही सोचिए- अगर ये रंग न हों तो कैसे बेरंग लगेगी ये दुनिया?यह डॉयलाग शोले का है।हिंदुस्तानी सिनेमा में सबसे अधिक आम जन-जीवन के संवादों में अपना असर डालने वाली

पैंतालिस साल पुरानी–“शेर दरोगा”की कहानी-लोककला की जुबानी…

(रुद्र अवस्थी)“मेरे पास आओँ,मेरे दोस्तों…एक किस्सा सुनों…”यह गीत महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज में है।अपने समय की सुपरहिट फिल्म “मि.नटवरलाल” के इस गाने में अमिताभ बच्चन ने एक शेर का किस्सा सुनाया था। यह फिल्मी किस्सा बहुत से लोगों को याद भी होगा लेकिन “नटवरलाल” के आने और जाने के करीब सात साल पहले छत्तीसगढ़

वो…सोलह मिनट…एक अकेले कलाकार के साथ,झूम उठा देवकीनंदन हॉल…

(रुद्र अवस्थी)तुम्हे दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी,मोहब्बत की राहों में आकर तो देखो। तड़पपने पे मेरे ना ,फिर तुम हंसोगे,कभी दिल किसी पे लगाकर तो देखो।। मरहूम नुसरत फतेह अली खाँ  साहब का यह सूफियाना कलाम पूरे सोलह मिनट –तिरालिस सेकेंड का है…….।जिसकी धुन पर थिरकते हुए वो पूरे समय लट्टू की मानिंद घूम-घूम कर नाचते

बिल्हा का उड़गन गांवःजहां गूँजता है पत्थरों का संगीत…

(रुद्र अवस्थी)मुंबई- हावड़ा मेन रेल लाइन से धड़धड़ाते हुए गुजरने वाली तेज रफ्तार रेलगाड़ियों में कई बड़ी हस्तियों के साथ ही बड़े-बड़े कलाकार भी आते-जाते हैं…।दुनिया जहान को जानने वाले सैकड़ों-हजारों मुसाफिर भी वहां से गुजरते हैं…।लेकिन किसी को कभी यह मालूम नहीं हो पाता कि बिल्हा- दगौरी स्टेशनों के बीच इसी रेल लाइन से

चंदखुरी-बैतलपुर में गाँधी यात्रा के “निशान’’

(रुद्र अवस्थी )“कुष्ठ रोगियों के अस्पताल का उद्घाटन मैं नहीं करूंगा…।यह काम किसी और से करा लीजिए…।लेकिन यह अस्पताल जिस दिन बंद करना होगा,उस दिन मुझे बुलाइएगा…।मैं जरूर आउंगा…। मैं चाहता हूं कुष्ठ रोग पूरी तरह से खत्म हो जाए।इसके रोगी ही न रहे और ऐसे अस्पताल की जरूरत ही न पड़े…।“ये बातें राष्ट्रपिता महात्मा

न्याय नहीं हो रहा बिलासपुर के साथ…

बिलासपुर।शहर के प्रबुद्ध नागरिक और अपने समय के जाने- माने हॉकी खिलाड़ी रोहित बाजपेयी ने सोशल मीडिया के जरिए एक  अहम् सवाल उठाया है। जिसमें उनका जेर इस बात पर है कि बिलासपुर और उसके आस-पास के सार्वजनिक उपक्रमों के जरिए बिलासपुर के विकास में जो योगदान होना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है।इन

बदल गया मरवाही के मँच का “हीरो”…

(रुद्र अवस्थी)“मँच पर मरवाही के पूर्व और तानाखार के मौजूदा विधायक रामदयाल उइके भी हैं।अकलतरा विधायक चुन्नीलाल साहू भी हैं।मस्तूरी एमएलए दिलीप लहरिया भी हैं और पूर्व विधायक शिव डहरिया भी मौजूद हैं। मँच का संचालन यूथ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तम वासुदेव कर रहे हैं।”यह कहानी अगर कोई छः महीने पहले सुनाता तो

वो चौबीस घंटे…….कांग्रेस की  “जोड़“ और जोगी की  “तोड़“

♦पहला सीन–  पहले दिन छत्तीसगढ काँग्रेस की पहली लाइन के सभी नेता बिलासपुर आते हैं…। वरिष्ठजन के सम्मान सहित कई कार्यक्रमों में शिरकत करते हैं…। शहर के काँग्रेसी इसमें जोश-खरोश के साथ शामिल होते हैं….। और सारे नेता खुशी-खुशी वापस लौट जाते हैं…। ♦दूसरा सीन – इसके ठीक दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने

CGWALL.COM के मालिक अब दो लाख…

कोई भी खबरनवीश अगर कोई खबर या टिप्पणी लिखे तो उसे भी यह नहीं पता चल पाता कि उसके लिखे शब्द कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं। इसलिए हम भी पुख्ता तौर पर यह दावा नहीं कर सकते कि सीजीवाल के करीब साल भर के सफर में हमारे कितने शब्द –कितने लोगों तक पहुंचे हैं।

नांदघाट की सड़क…गायब…?

(रुद्र अवस्थी) इसे एक इत्तफाक ही कहा जा सकता है कि एक तरफ राजधानी में बैठी सरकार    छत्तीसगढ़  में सड़क नेटवर्क के विकास और विस्तार के लिए 2800 करोड़ रूपए की 27 नई सड़कों के निर्माण प्रस्तावों को  मंजूरी दे रही थी और इधर न्यायधानी-राजधानी के बीच में नांदघाट-लिमतरा में लोग गड्ढों के बीच सड़क

एक रमन का गाँव ……और एक जोगी का गाँव….

  हम लोग छत्तीसगढ़ में रहते हैं। इसलिए छत्तीस के आँकड़े से अकसर रू-ब-रू होते रहते हैं…..। 21 जून की तारीख भी इसका गवाह बनी। जब सूबे के मौजूदा मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पुश्तैनी गाँव ठाठापुर(रामपुर) और इधर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को गाँव-घर मरवाही में सियासी मेले लगे। यह हमारी सियासत का एक

“जोगी पंडाल” के जवाब में ……. “कांग्रेसी पंडाल” ….?

                  मरवाही के कोटमी में हाल ही में हुए जोगी मेले से लौटकर अपन ने बरगद से पंडाल तक….…. विश्वसनीयता की नोंक पर टिकी जोगी की नई फिल्म …….. हैडिंग से इसी कॉलम में लिखा था कि अजीत जोगी ने किस तरह के माहौल में अपनी नई

“बरगद से पंडाल तक”-विश्वसनीयता की नोंक पर टिकी जोगी की नई फिल्म

“जो लोग पास के बरगद पेड़ के नीचे खड़े हैं…….उनसे अपील है कि कार्यक्रम के लिए बनाए गए पंडाल में आने का कष्ट करें……अब अजीत जोगी मंच पर आ गए हैं और जल्दी ही अपनी बात करने जा रहे हैं…।“ इतना सुनते ही पुराने पेड़ के नीचे शुकून की छाँव का आनंद ले रही पब्लिक
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