मेरी नज़र में… Archive

समझ में नहीं आयी मैक्यनविली राजनीति

बिलासपुर– (भास्कर मिश्र) निगम कमिश्नर को कांग्रेस ने अकेले रणनीति बनाकर घेरा..कहना गलत होगा। इसमें निगम सरकार नहीं है..इसे भी एक सिरे से नकारा नहीं जा सकता। अन्य सभाओं की तरह निगम सामान्य सभा की बैठक आज शुरू हुई। महापौर और भाजपा पार्षदों ने स्वभाव से हटकर कांग्रेस की बातों को सिर माथे पर लिया…यद्पि

क्या ये गणित भी राजनीतिक है ?

बिलासपुर-(विश्वेष ठाकरे)-आईएएस, सांसद, मुख्यमंत्री रह चुके मंझे हुए राजनेता अजीत जोगी अब एक नए रूप में हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने मोबाइल नंबर सार्वजनिक कर दिए और कहा कि बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्र उनसे फोन पर परीक्षा के संबंध में सलाह ले सकते हैं। शनिवार को जब वे बिलासपुर पहुंचे तो मोबाइल उनके कान

“छत” की तरह “भसक” रही न्यायधानी की तरक्की…

 (रुद्र अवस्थी) अगर तरक्की के कामों की कछुआ चाल भ्रष्टाचार है…अगर घटिया काम भ्रष्टाचार है…अगर सरकारी खर्च से बन रही किसी इमारत का भसक जाना भ्रष्टाचार है…?तब तो एक लाइन में यह मान लेना पड़ेगा कि बिलासपुर में तरक्की के नाम पर सिर्फ और सिर्फ गड़बड़झाला हो रहा है। यह शहर पता नहीं कितने बरसों से

“बचपन” में “बचपन” के साथ…

                       (रुद्र अवस्थी ) बीता हुआ कल चाहे खुशी के दौर में गुजरा हो….या फिर उन पर तकलीफों की छाप लगी हो…।कुलमिलाकर बीते हुए कल की याद दिल को शुकून ही देती है…..।शायद यह सोचकर कि भविष्य तो एक कल्पना–एक तसव्वुर की बात है..और आज

क्यों झूमें…कांग्रेस नेता आशीष सिंह..?

बिलासपुर—(भास्कर मिश्र)–आशीष सिंह ठाकुर की गिनती काफी धीर गंभीर कांग्रेस नेताओं में होती है। नाप-तौल कर बोलते हैं। जरूरत पड़ने पर ही मुंह खोलते हैं। पत्रकारों से अच्छे ताल्लुकात हैं। सार्वजनिक बयानयाजी से हमेशा अपने आपको दूर रखते हैं। पहली बार शायद मैने या मेरे जैसे कई पत्रकारों ने उन्हें तखतपुर में आदिवासी समाज के

गावों से पलायन करा रहा,लंबी उधारी वाला मनरेगा

00 नेता लोकार्पण शिलान्यास में मस्त 00 00 अकालग्रस्त क्षेत्र की जनता रोजी और पानी के लिये त्रस्त 00 00 सूखते तालाबों का आतंक ? 00 शशि कोन्हेर। जीवनदायी अरपा सूख गई, तालाब सूख रहे हैं, बांधों का पानी सिमटता जा रहा है। ट्यूबवेलों के कण्ठ भी सूखने लगे हैं। पहले निस्तारी फिर पीने के पानी

जिन्होने भाजपा को जिताया,उन पर ही गिरेगी प्रापर्टी टैक्स की गाज

  जिन शहरों के नगरीय निकायों में कांग्रेस की जीत हुई उन्हे रहेगी राहत (शशि कोन्हेर)बिलासपुर ।छत्तीसगढ की सरकार प्रदेश ही क्या वरन सम्पूर्ण देश की ऐसी पहली सरकार बनने जा रही है जो अपनी ही पार्टी भाजपा को चुनाव जिताने वाले मतदाताओं को ही भयंकरतम चार से छह गुना टेक्स बढोतरी की सजा और

यादों के झरोखे से:पुलिस ग्राउंड

(केशव शुक्ल)शहर का पुलिस ग्राउंड गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए विशेष तौर पर पहचान जाता है ।करीब पांच एकड़ क्षेत्र में यह मैदान फैला हुआ है। यही वो मैदान है जहां आजादी के बाद बिलासपुर का प्रथम गणतंत्र दिवस का जश्न भी मना था।सन् 1873 में अंग्रेजों ने यहां जेल की स्थापना

कहां है मेरा गणतंत्र दिवस ?

 ( रुद्र अवस्थी)     जरहू कान में ठूंठी बीड़ी खोंसकर, लहराते गणतंत्र को देखता है, कुछ कहता है यदि यह गणतंत्र मिल जाए तो, अपना गणतंत्र ढंक लेता। जाने – माने कवि मोहन श्रीवास्तव की ये पंक्तियां बरबस जेहन में आ जाती हैं, जब गणतंत्र दिवस पर झंडा फहराने की तैयारी करते स्कूली बच्चे और अन्य

आप टीवी क्यूँ देखते है,अखबार क्यूँ पढ़ते है?-रवीश कुमार

आप टीवी क्यूँ देखते हैं….अखबार क्यूँ पढते हैं? यह गंभीर सवाल उठाया है, देश के जाने-माने टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने…।हाल ही में एक न्यूज पोर्टल के कार्यक्रम में अपने भाषण में उन्होंने देश की मौजूदा पत्रकारिता को लेकर कई सवाल उठाए हैं। ये ऐसे सवाल है, जो एक पत्रकार और खबरो पर भरोसा करने

गुड़ से मीठा..तरक्की का स्वाद

(रुद्र अवस्थी) “तरक्की को अगर स्वाद से महसूस किया जाए तो यकीनन वह मीठा ही होना चाहिए..।“ पढ़ने में यह लाइन अट-पटी सी लग सकती है। लेकिन अपने बिलासपुर जिले से लगे कवर्धा इलाके के गावों में इन दिनों तरक्की के इस मीठेपन को महसूस किया जा सकता है। जहाँ सड़कों पर जगह-जगह  मीठे गन्ने से

इस खेल में चकमा दे गई आखिरी गेंद…

(रुद्र अवस्थी) चौसर-पासा,पचीसा,साँप-सीढ़ी,लुडो, शतरंज जैसे खेलों में दोनों तरफ से दाँव पर दाँव चलते-चलते एक ऐसी भी सूरत पेश आती है ,जब  आमने –सामने के खिलाड़ियों की जीत-हार का पूरा दारोमदार  आखिरी चाल पर टिका होता है…….। ताश के बावन पत्ते भी कभी-कभी बाजी को उस मुकाम पर पहुँचा देते हैं कि जीत-हार का फैसला आखिती

बिहार चुनाव..मतदाताओं की चुप्पी..नेता परेशान

(विशाल )बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान छिटपुट घटनाओं के साथ खत्म हुआ। .सूबे के 10 जिलों के 49 सीटों के लिए मतदाताओं ने बढ़-चढ़ के मतदान किया। पहले चरण के मतदान के बाद समीक्षकों ने कयास लगाना शुरू कर दिया है। पहले चरण के मतदान के बाद सरकार किसकी बनेगी पर चर्चा

‘सत्या ‘ के बहाने एक ‘ सत्य ‘ की सुखद अनुभूति…..

                                                        ( रुद्र अवस्थी ) हमारे पत्रकार साथी सत्यप्रकाश पाण्डे ( सत्या ) तस्वीरों के शौकीन हैं। सोशल मीडिया में भी यह नाम काफी जाना- पहचाना और मकबूल

स्मार्ट सिटी­..स्मार्ट लोगों की स्मार्ट अप्रोच

बिलासपुर—फोटो में दिखाई दे रहा यह खूबसूरत नजारा रिंग रोड नम्बर दो और उस्लापुर ब्रिज के पास मुख्य मार्ग को जोडने वाली सड़क का है। फोटो में पेड़ के पीछे दो चार ट्रक भी खड़े हैं। निगम आयुक्त के बंगले के बगल से निकलने वाली यह सड़क इन दिनों ट्रक पार्किंग का अघोषित अड्डा बन

सीजीवाल क्यों ?…..  सवाल का हजारवाँ जवाब

                                                   ( रुद्र अवस्थी ) बिलासपुर— पिछले 15 जून को सी.जी,वाल क्यों……यह सवाल  हमने ही किया था…  अपने संपादकीय पन्ने पर….।  और उसके बाद से लगातार cgwall.com पर खबरों –विचारों के

ये इत्तफाक की बात है…… राहुल बाबा

                                  ( रुद्र अवस्थी ) कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी दो दिन छत्तीसगढ़ का दौरा कर वापस लौट गए। उनका इस अंदाज में यह पहला छत्तीसगढ़ दौरा था। अब तक वे चुनावी रैलियों या किसी एक कार्यक्रम में शिरकत करने

लिंक रोड से रिवर-व्यू ……

  (रुद्र अवस्थी)दुनिया भर में पर्यावरण की हिफाजत के संदेश के साथ मनाये जाने वाले इस दिन हम शहर की इन दो तस्वीरों को आमने – सामने रखककर आने वाले कल की तस्वीर खींचें तो कई सवाल उभरकर सामने आते हैं। पहली तस्वीर शहर के लिंक रोड की है। जिसे कुदरत ने शहर का गौरव

अन्ना जब बिलासपुर आए…….

                      (रुद्र अवस्थी )सफेद धोती-कुर्ता,सफेद टोपी और चेहरे पर मोहक मुस्कान- छत्तीसगढ़ भवन के आंगन में  बिल्कुल अन्ना की तरह दिखाई दे रहे शख्स को देखकर लगा कि कहीं धोखा तो नहीं हो रहा है. लेकिन नजदीक जाने पर पता चला कि यह धोखा नहीं है।

 पहली सालगिरह में हम कहाँ …… ?

दिल्ली सरकार की पहली सालगिरह का शोर कई जगह सुनाई दे रह है..। आमसभा – प्रेस कांफ्रेस  औऱ इश्तहारों के जरिए बताने की कोशिशें हो रहीं हैं कि तीन सौ पैंसठ दिनों में क्या हुआ…क्या कुछ बदल गया और कितने अच्छे दिन आ गए…… वगैरह….वगैरह….। हर एक शहर का वाशिंदा इस जश्न में शामिल होना
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