उज्जवला योजना का अनुदान बंद..सांसद ने की भूपेश सरकार की केन्द्र सरकार से शिकायत..Bilaspur सांसद साव ने उठाया संसद में रेल परियोजना का भी मुद्दा

बिलासपुर/ नई दिल्ली– बिलासपुर सांसद अरूण साव ने भूपेश सरकार की शिकायत केन्द्रीय सरकार से की है। संसद में अरूण साव ने कहा कि जब से छ्त्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन हुआ है। कांग्रेस सरकार ने  उज्जवला योजना का अनुदान देना बंद कर दिया है। नाराज सांसद अरुण साव ने सदन को बताया कि केंद्र सरकार योजना को प्रदेश में कड़ाई से लागू कराए। ताकि निर्धन परिवारों  को इसका लाभ मिल सके।
 
               लोकसभा में शून्यकाल के दौरान सांसद अरूण साव ने कहा कि देश में नरेन्द्र भाई मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के बाद उज्जवला योजना की शुरुआत कर क्रांतिकारी कदम उठाया गया। योजना को लागू किए जाने से एक तरफ जहां वृक्षों और वनों की अंधाधुँध कटाई पर रोक लगी। वहीं माताओं-बहनों के स्वास्थ्य पर सकारात्म प्रभाव देखने को मिला।  समय की बचत हुई।
 
                  साव ने सदन को बताया कि पूर्व में तात्कालीन भाजपा सरकार के समय योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को गैस चूल्हे और पहली रिफलिंग के लिए 14 सौ रुपए का अनुदान दिया जाता थाय़। लेकिन त्ता परिवर्तन के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार ने योजना के लिए अनुदान जारी करना बंद कर दिया है। इसके कारण पेट्रोलियम कंपनियां योजना को लागू करने, अमल में लाने में हीला-हवाला कर रहीं हैं। नतीजतन पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
 
                   सांसद साव ने कहा कि केन्द्र सरकार मामले में हस्तक्षेप कर छत्तीसगढ़ में उज्जवला योजना को कड़ाई से लागू कराए।
 
8 महीने से रुका अनुदान 
 
            उज्जवला योजना के तहत चूल्हा और पहली रिफलिंग के लिए  1400 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से दिए जाने वाले अनुदान को राज्य सरकार ने बीते 8 महीने से रोक दिया है। तात्कालीन भाजपा सरकार ने योजना के तहत खनिज न्यास संस्थान, केम्पा और श्रम विभाग के मद से 2016-17 में जिले के 73 हजार 250 परिवारों को गैस कनेक्शन का अनुदान दिया था। 2017-18 में 59 हजार 623 परिवारों और 2018-19 में 72 हजार 163 परिवारों को गैस कनेक्शन दिया गया है। इसके लिए डीएमएफ से 16 करोड़ रुपए जारी किए गए थे।
 
मुंगेली रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण अंतिम चरण में 
 
                लोकसभा में अतारांकित प्रश्न संख्या 3766 के माध्यम से सांसद साव ने कटघोरा-मुंगेली-डोंगरगढ़ नई रेलवे लाइन के निर्माण में हो रही देरी पर सवाल किया। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लिखित जानकारी दिया। गोयल ने बताया कि 5950.47 करोड़ रुपए लागत की  294.53 कि.मी. लंबी रेल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम अंतिम चरण में है।
 
                रेलवे अधिनियम के अनुसार अधिसूचनाएं जारी किए जाने के बाद आपत्तियों की सुनवाई भी की जा चुकी है। प्रारंभिक और विस्तृत डिजाइन का कार्य प्रगति पर है। गलियारे के लिए भू-तकनीकी की जांच चल रही है। प्रगति के साथ ऋण समूहन किया जा रहा है।
 
                             मामूल हो कि रेल नेटवर्क से अछूते मुंगेली और कबीरधाम जिले की बहुप्रतीक्षित माँग को पूर्ण करने तात्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में सीकेडीआरएल विशेष प्रयोजन योजना बनाई गई थी। रेलवे और राज्य सरकार का संयुक्त काॅर्पोरेशन कटघोरा से मुंगेली के रास्ते डोंगरगढ़ तक नई रेलवे लाइन बिछाने की योजना पर काम कर रहा है।
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