रात 10 बजे के बाद नहीं फूटेंगे पटाखे

patakhaरायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा पटाखों के दुष्प्रभावों के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस संबंध में सभी कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी कर गाइड लाइन का पालन सुनिश्चित करने कहा गया है, जिसमें रात दस बजे से सुबह छह बजे तक पोटाखे न फोड़े जाएं। चार मीटर की दूरी तक 125 डेसीबल (डीबी) या 145 डीबी से अधिक शोर करने वाले पटाखे प्रतिबंधित कर दिए जाएं। पटाखों की लड़ियों के लिए पांच लॉग (एन) डीबी है, जिसमें एन लड़ियों पर लगाए गए पटाखों की संख्या है। अतिसंवेदनशील क्षेत्रों जैसे अस्पताल, शिक्षण संस्थाएं, अदालत, धार्मिक संस्थाएं आदि के कम से कम सौ दूरी तक पटाखे न फोड़े जाएं। सभी शिक्षण संस्थाओं में विद्यार्थियों को ध्वनि एवं वायु प्रदूषण के संबंध में जानकारी देते हुए पटाखों के दुष्प्रभावों से उन्हें अवगत कराते हुए जन-जागरूकता अभियान में बच्चों को शामिल करें।
पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा बताया गया है कि उच्चतम न्यायालय ने जागरूकता अभियान में स्कूली एवं कॉलेज के छात्र-छात्राओं को भी शामिल किए जाने किए जाने की अपील की है। निर्देश में उल्लेख है कि शिक्षकगण स्कूलों एवं कॉलेजों में पटाखों के दुष्प्रभाव के संबंध में छात्र-छात्राओं को जानकारी देवें एवं उसके खरीदने तथा उनसे कम से कम उपयोग करने की अपील करें। जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि दीपावली के अवसर पर बड़ी मात्रा में आतिशबाजियां की जाती है एवं पटाखे फोड़े जाते हैं, जिनसे वायु एवं ध्वनि प्रदूषण की गंभीर समस्या उत्पन्न होती है। इस दौरान हवा में न केवल धूल एवं बारूद की मात्रा में वृद्धि होती है अपितु वायु मण्डल में सल्फर डाई आक्साइड एवं नाईट्रोजन आक्साइड और अन्य जहरीली गैसों की सांद्रता में वृद्धि होती है। इससे दमा ब्रानकाईटिस एवं श्वसन संबंधी बीमारियां होती है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल ने आम नागरिकों एवं छात्र-छात्राओं से अपील की है कि वे त्यौहार के अवसर पर पटाखों एवं इनसे जुड़े अन्य सामानों की खरीदी एवं उनका उपयोग कम से कम करें और ध्वनि तथा वायु प्रदूषण का ध्यान रखते हुए पर्यावरण को स्वच्छ रखने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

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