फिल कोलवाशरी पर गिरी गाज… उत्पादन पर लगा प्रतिबंध.. पर्यावरण विभाग का फरमान..हो रहा अवैध परिवहन… बरबाद हो गयी जल संसाधन की सड़क

बिलासपुर—- छत्तीसगढ़ पर्यावरण मण्डल बिलासपुर ने घुटकू स्थित फिल कोलवाशरी की औद्योगिक गतिविधिय़ों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। बिलासपुर पर्यावरण विभाग ने कम्पनी को जारी आदेश में बताया है कि कोलवाशरी का संचालन नियमों को ताक पर रख कर किया जा रहा है। इसके चलते स्थानीय लोगों की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा है। जांच पड़ताल के दौरान पाया गया है कि कम्पनी की नियम खिलाफ औद्योगिक गतिविधियों से पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है।  कम्पनी संचालक रेलवे के साथ कोयला परिवहन अनुबन्ध को पेश करने में नाकामयाब साबित हुए हैं। ऐसी सूरत में पर्यावरण कार्यालय ने फिल कम्पनी की कोयला उत्पादन गतिविधियों पर अग्रिम आदेश तक प्रतिबन्ध लगाने का फैसला किया है।

                                    छत्तीसगढ़ पर्यावरण मण्डल बिलासपुर कार्यालय ने घुटकू स्थित फिल कोलवाशरी को औद्योगिक गतिविधियों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।  फिल कोलवाशरी को जारी पत्र में बताया गया है कि कम्पनी ने पर्यावरण नियमों का गंभीरता से पालन नहीं किया है।

                      कम्पनी को जारी पत्र में पर्यावरण विभाग के अनुसार 10 दिसम्बर को जांच पड़ताल के दौरान पाया गया कि कोलवाशरी में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जांच पड़ताल में देखने को मिला कि वाशरी के अन्दर सड़के स्प्ष्ट नहीं है। हैं । है भी तो सड़कों पर कोयले की मोटी परत बीछि हुई है। साफ सफाई का नामो निशान भी नही है।  रॉ कोल मैटेरियल,  वाश कोयला और रिजेक्ट कोयला का रखरखाव ठीक से नहीं किया गया है। कोयला का भण्डारण कम्पनी के बाउन्ड्री वाल से बहुत ऊंचा है। जांच पड़ताल में जानकारी सामने आयी कि कोयला भण्डारण में भारी लापरवाही हो रही है।  

                   पर्यावरण विभाग केअनुसार फिल कोलवाशरी क्षेत्र में सांस लेना मुश्किल है। हवा बहुत ज्यादा प्रदूषित है। संभव नहीं है कि कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में प्रीमाइसिस के अन्दर काम कर सके। स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ना निश्चित है।  जांच पड़ताल में यह भी पाया गया कि कोयला ट्रान्सपोर्टेशन में भारी लापरवाही हो रही है। ट्रान्सपोर्टेशन का कोई हिसाब किताब भी नहीं है।  कोलवाशरी क्षेत्र में स्टाक रख रखाव को लेकर  में बहुत ज्यादा लापरवाही पायी गयी है। चारो तरफ कोल डस्ट का गुबार है। छि़ड़काव के लिए स्प्रींकलर का भी प्रयोग नहीं किया जा रहा है। यह भी पाया गया कि स्प्रींकलर केवल दिखावे के लिए है। जिसका उपयोग बहुत दिनों से नहीं किया गया है। 

             पर्यावरण विभाग के अनुसार मांग जाने पर फिल कोलवाशरी संचालक ने रेलवे के साथ कोयला परिवहन अनुबंध पत्र पेश नहीं किया।  इससे जाहिर होता है कि कम्पनी के संचालक अधिकारियों से सांठगांठ कर गलत तरीके से कोयले का परिवहन कर रहे हैं। मामले में गहन जांच की जरूरत है।

                              पर्यावरण विभाग ने अपने जांच पड़ताल में यह भी पाया कि कोलवाशरी का कोयला भारी वाहनो के माध्यम से जल संसाधन विभाग की नहर पर बनायी सड़क से किया जा रहा है। जो पूरी तरह से गैर कानूनी है। भारी वाहनो से कोयला के परिवहन से जल संसाधन विभाग की टो सड़क जर्जर हो चुकी है। विभाग को काफी नुकसान पहुंचा है। नहर किनारे की फसल बरबाद हो रही है। खेतों में कोयला की पर्त जम गयी है। जिसके कारण फसलों को ना केवल नुकसान हो रहा है बल्कि खेत बंजर होते जा रहे हैं। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण विभाग ने  घुटकू स्थित फिल कोल वाशरी के सममस्त उत्पादन गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। 

                         बताते चलें कि फिल कोल वाशरी का क्षेत्र में लम्बे समय से किसान और ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। कोलवाशरी के खिलाफ घुटकू और लोखण्डी के किसान और ग्रामाीणों ने हाईकोर्ट में  यातिका दायर कर वाशरी को बन्द या हटाए जाने की मांग की है।

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