नगरीय निकाय चुनाव : मतदान तारीख पर अब तक छुट्टी का एलान नहीं…! क्या वोटिंग के दिन ड्यूटी करेंगे शिक्षक और कर्मचारी

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बिलासपुर। 21 दिसंबर को जब लगभग पूरे प्रदेश के नगरीय निकायों के मतदाता अपने मत का प्रयोग कर रहे होंगे तो दूसरी ओर प्रदेश के सरकारी स्कूल के शिक्षक व अन्य कर्मचारी जो नगरीय निकाय के मतदान को छोड़ कर आपनी डियूटी कर रहे होंगे। सिर्फ चुनाव कार्य मे लगे राज्य के कर्मचारियों को ही पोस्टल बैलेट से मतदान करने  का अवसर मिलेगा। क्योंकि इस दिन सार्वजनिक अवकाश के सम्बंध में चुनाव से ठीक तीन पूर्व तक शासन व निर्वाचन आयोग से कोई स्पस्ट निर्देश नही मिला है।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक कीजिए

देश मे कोई भी चुनाव हो मतदान के महत्व को मतदाताओं ने समझा है । जिसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में हमारे देश में मतदान के प्रतिशत में इजाफा हुआ है, इसे लेकर एक जागरूकता का दौर शुरू हुआ है। …. छत्तीसगढ़ में नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग अब तक  ऐसा कोई ठोस कदम नही उठा पाया है जिससे मतदान का प्रतिशत बढ़े ….। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण 21 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश पर अब तक कोई  निर्णय नहीं लेने से समझा जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग पर अब तक आस लागये बैठा है कि 21 दिसंबर को  आयोग छुट्टी घोषित कर देगा……..?  हालांकि मतदान होने में अभी तीन दिन बाकि है। लेकिन आयोग की ओर से अब तक 21 दिसंबर को सार्वजनिक अवकाश का निर्देश जारी हो जाना चाहिए था, पर ऐसा अब तक नही हो पाया है। न ही राज्य शासन की ओर से स्पस्ट निदेश दिए गए है। चूंकि राज्य स्तर पर चुनाव के लिए स्कूली भवनों का भी उपयोग बड़े पैमाने में होता इस दिन अवकाश नही होने से नगर निगम नगर पालिका , नगर पंचायत के क्षेत्रो के अधिकांश स्कुलो में चुनावी पोलिंग बूथो पर एक ओर स्कूल लगेगा और दूसरी ओर चुनावी कार्य होंगे।

 यह सर्व विदित है कि नगरी निकाय क्षेत्रों में शिक्षकों व कर्मचारियों का निवास सबसे अधिक है। कई शिक्षक  व अन्य शासकीय कर्मचारी नगरी निकाय के मतदाता होने के बावजूद पंचायत क्षेत्रों में अस्थाई निवास करते हैं। जिन शिक्षको व राज्यों व केंद्रीय कर्मचारियों  की चुनाव में ड्यूटी नहीं लगे रहती है, वे सार्वजनिक अवकाश होने पर वे अपने पोलिंग बूथ की ओर अपने मत का प्रयोग करने जरूर जाते है।

नगरीय निकायों के चुनावों में इस बार आशंका है कि वे अपने कार्य के कर्तव्यों को अचार सहिंता के नियमो से बंधे होने की वजह से इस बार अपने मत के प्रयोग करने से वंचित हो सकते है

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