मंत्री अकबर से कांग्रेस वकीलों ने कहा.. भाजपा समर्थित वकीलों को हटाएं.. आपराधिक प्रकरण वाले भी कर रहे पैरवी

बिलासपुर–प्रदेश विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने सोमवार को रायपुर में विधि विधायी मंत्री मोहम्मद अखबर से मुलाकात कर भाजपा शासन काल में नियुक्त सरकारी वकीलों को तत्काल हटाए जाने की मांग की है। मुलाकात के दौरान लिखित में आवेदन कर कांग्रेस के विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने बताया कि कांग्रेस सरकार के एक साल पूरे होने के बाद भी अभी भी भाजपा के नियुक्त सरकारी वकील शासन की पैरवी कर रहे हैं। इन्हें ना केवल हटाए जाने की जरूरत है। बल्कि कांग्रेस समर्थित वकीलों को नियुक्त दिया किया जाना जरूरी है।

                   प्रदेश कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष संदीप दुबे की अगुवाई में विधि विधायी मंत्री मोहम्मद अकबर से मुलाकात की। इस दौरान विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने लिखित आवेदन कर बताया कि एक साल सत्ता होने के बाद भी आज भी सरकार की पैरवी भाजपा के नियुक्त वकील ही कर रहे हैं। इन्हें जल्द से जल्द हटाए जाने की जरूरत है। 

                   विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न न्यायालयों और शासकीय संगठनों में आज भी भाजपा के नियुक्त अधिवक्ता पैरवी कर रहे हैं। जबकि सत्ता परिवर्तन के बाद यहां कांग्रेस के वकीलों को होना चाहिए। इस दौरान कांग्रेस वकीलों ने विधि विधायी मंत्री को यह भी बताया कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें शासन की तरफ से पैरवी करने का अधिकार ही नहीं है। दरअसल ऐसे कुछ लोगों की नियुक्ति भी गलत है। कई ऐसे भी वकील नियुक्त हैं जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज है। जो सेवा शर्तों के खिलाफ है।बावजूद इसके हाईकोर्ट के निर्देशों को दरकिनार करते हुए पैरवी कर रहे हैं। दरअसल ऐसे लोगों ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों को छिपा दिया है। विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने मंत्री को बताया कि खासकर ऐसे लोगों को हटाया जाना बहुत ही जरूरी है।

                  बताते चलें कि सरकार की तरफ से प्रत्येक स्तर पर शासन की पैरवी करने वकीलों को नियुक्त किया जाता है। प्रदेश के प्रत्येक जिला सत्र न्यायालय में एक जीपी की नियुक्त शासन नियुक्त करता है। इसके अलावा जिला सत्र न्यायालय के प्रत्येक अतिरिक्त कोर्ट के लिए एजीपी की नियुक्ति शासन स्तर पर किया जाता है। जानकारी हो कि प्रत्येक जिला न्यायालय के लिए एजीपी की संख्या अतिरिक्त कोर्ट के अनुसार होती है। जैसे की बिलासपुर में 13 एजीपी की नियुक्ति है।

             इसके अलावा शासन के सभी बोर्ड निकाय, और अन्य कार्यालयों के लिए भी सरकार वकील नियुक्ति करती है। कुल मिलाकर यदि वकीलों की नियुक्ति किया जाए तो इनकी संख्या 15 सौ अधिक है। लेकिन कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के नेताओं का कहना है कि यहां या तो वकीलों की नियुक्तियां नहीं हुई है। यदि है भी तो वहां शासन की पैरवी भाजपा सरकार के काल में नियुक्त वकील कर रहे हैं। 

कांग्रेस नेताओं ने की नियुक्त करने की मांग  

   इन्ही तमाम बातों को लेकर कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के नेताओं ने कांग्रेस समर्थित वकीलों को विभिन्न संस्थानों में नियुक्त किए जाने की मांग विधि विधायी मंत्री से की है।इस दौरान अध्यक्ष विधि विभाग संदीप दुबे, महामंत्री मोहन निषाद, रायपुर जिलाध्यक्ष विजय राठौर,सचिव राजेश सिंह ठाकुर, सयुंक्त सचिव अरमान और शशि शर्मा समेत विधि विभाग के बहुत से अधिवक्ता मौजूद थे।

कैसे होती है वकीलों की नियुक्ति

               जानकारी के अनुसार वकीलों की नियुक्ति की एक प्रक्रिया होती है। विधि विभाग मामले की जानकारी जिला सत्र न्यायाधीश से मांगता है।मामले की जानकारी कलेक्टर तक पहुंचती है। कलेक्टर मामले की जांच करता है। इसके बाद विधि विभाग को देता है। फिर वकीलों की नियुक्ति की प्रक्रिया होती है।

नियमों को ताक पर रखकर हुई नियुक्ति

             कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के कुछ नेताओं ने बताया कि वकीलों की नियुक्ति की कुछ प्रक्रिया होती है। धारा 24 के तहत जिस वकील के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज है। उन्हें एजीपी या जीप नहीं बनाया जा सकता है। बावजूद इसके भाजपा शासन काल में ऐसे लोगों को शासकीय पैरवी के लिए नियुक्त किया गया। जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज है। यहां तक कि हाईकोर्ट ने अपराध दर्ज करने का निर्देश भी दिया है। बावजूद इसके ऐसे लोग पैरवी कर रहे हैं।

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