पढ़िए…फूंक-फूंक कर रखे कदमों ने Bilaspur में कांग्रेस को कैसे दिलाई जीत ..?कैसे रुका BJP की जीत का सिलसिला….?

बिलासपुर।कांग्रेस ने आखिर बिलासपुर नगर निगम पर अपना कब्जा जमा लिया कांग्रेस के रामशरण यादव बिलासपुर नगर निगम के दसवें महापौर बन गए हैं।साथ ही कांग्रेस के ही शेख नजरुद्दीन सभापति चुन लिए गए हैं। नए साल की शुरुआत में कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है ।अपनी इस कामयाबी के जरिए कांग्रेस ने न केवल नगर निगम की राजनीति में अपनी शानदार वापसी की है ।बल्कि पिछले काफी समय से शहर की राजनीति में चल रहे मिथक को तोड़ा है ।इसका असर आने वाले दिनों में भी शहर की राजनीति में दिखाई देगा। बिलासपुर नगर निगम का चुनाव इस बार कई मायने में काफी अहम माना जा रहा था ।इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि नगर निगम सीमा के विस्तार के बाद यह छत्तीसगढ़ में दूसरा सबसे बड़ा नगर निगम क्षेत्र हो गया है । सीजीवालडॉटकॉम न्यूज़ के व्हाट्सएप् से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

साथ ही यह भी देखा जा रहा था कि पिछले विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस नगर निगम में भी वापसी कर पाएगी या नहीं ….? इस बार चुनाव की अहमियत को देखते हुए कांग्रेसमें भी फूंक- फूंक कर कदम रखे‌।पार्षद चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करते समय भी पार्टी ने बहुत सावधानी बरती। यह कोशिश भी नजर आई कि जमीन से जुड़े लोगों को आगे लाकर मौका दिया जाए। यही वजह है कि पार्षद टिकट को लेकर कांग्रेस में लंबी कवायद चली और आखिर प्रदेश नेतृत्व के फैसले के बाद बिलासपुर शहर के पार्षद उम्मीदवारों के नाम फाइनल हो सके ।

कांग्रेस की इस जमीनी तैयारी का असर चुनाव नतीजों पर भी दिखाई दिया जब 70 में से करीब आधे 35 पार्षद कांग्रेस की टिकट पर जीत कर आए। बाद में निर्दलीय जीतकर आए तीन पार्षद भी कांग्रेस में शामिल हो गए । इस चुनाव में उम्मीदवार रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेख गफ्फार का दुखद निधन होने के कारण उनकी जीत के बावजूद एक सीट कम हो गई ।शेख गफ्फार का निधन कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका था। यह बात पार्टी के लोग खुले तौर पर स्वीकार करते हैं कि शेख गफ्फार को महापौर बनाने के लिए ही पार्षद चुनाव मैदान में उतारा गया था ।लेकिन दुर्भाग्य से उनका निधन होने के कारण तस्वीर बदल गई। बहरहाल कांग्रेस ने महापौर चुनाव के समय भी पुख्ता रणनीति के साथ आगे कदम बढ़ाया और महापौर पद पर रामशरण यादव की जीत हुई। साथ ही शेख नजरुद्दीन को सभापति बनाकर कांग्रेस ने शहर में पार्टी की राजनीति का संतुलन कायम कर लिया ।

बिलासपुर नगर निगम में चुनाव का ऐलान होने के बाद से चल रही पूरी राजनीति के शिल्पकार प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अटल श्रीवास्तव कहते हैं कि कांग्रेस ने पार्षद से लेकर महापौर तक उम्मीदवार के चयन में पूरी पारदर्शिता बरती । पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार जमीनी स्तर पर सक्षम और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को पार्षद की टिकट दी गई ।जिससे पार्टी को बहुमत हासिल हुआ। इसी तरह महापौर के चुनाव में भी कांग्रेस के सभी पार्षदों की अलग-अलग राय ली गई ।साथ ही सामूहिक रूप से भी मंथन किया गया। जिसमें सभी स्तर के नेताओं की पूरी भागीदारी रही। कांग्रेस ने सभी की राय से महापौर का नाम तय किया ।अटल श्रीवास्तव यह भी कहते हैं कि कांग्रेस पर अब बड़ी जिम्मेदारी है ।शहर के लोगों ने शहर की तरक्की और बेहतरी के लिए यह मौका दिया है ।जन भावनाओं का पूरा सम्मान करते हुए कांग्रेस अब जन आकांक्षाओं को पूरा करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेगी।

सतह तक उभर आई खेमेबाजी भी कांग्रेस के लिए एक बक्षबड़ी चुनौती थी ।साथ ही बिलासपुर नगर निगम महापौर का पद सामान्य होने की वजह से दावेदारों की लंबी फेहरिस्त भी थी। लेकिन सभी के बीच तालमेल बिठाते हुए कांग्रेस ने फूंक फूंक कर सधे कदमों से अपना रास्ता तय किया। जिससे कामयाबी उसके हिस्से में आई । नए साल की शुरुआत में कांग्रेस ने नगर निगम में बड़ी कामयाबी हासिल कर शहर की राजनीति में पिछले करीब डेढ़ दो दशक से चल रहे मिथक को भी तोड़ा है। करीब पिछले दो दशक से शहर की राजनीति में बीजेपी एक तरफा हावी रही । इस बीच हुए सभी चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपना दबदबा कायम रखा था। जिससे वार्ड से लेकर ऊपर तक बीजेपी ही नजर आती रही है ।लेकिन कांग्रेस ने यह मिथक अब तोड़ दिया है ।देखना यह है कि इस कामयाबी का कांग्रेस की राजनीति पर कितना असर होगा और उस इससे शहर को कितना फायदा मिलेगा।

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