हवाई सेवा आंदोलन…नेताओं की आदत नीबू और गन्ने जैसी… अब दबाव बनाना जरूरी..वक्ताओं ने कहा.. हाईकोर्ट को सरकार ने दिया धोखा

बिलासपुर—हवाई सेवा आंदोलन के 72 वें दिन जन संघर्ष समिति का धरना स्थल पहुंचकर विशेष रूप से कर्मवीर सामाजिक संस्था ने पुरजोर समर्थन किया। और जन संघर्ष समिति के सदस्य धरना आंदोलन में बैठे। समिति के लोगों ने बताया कि आंदोलन के 73 वें दिन शनिचरी बाजार सदस्य धरना आंदोलन को समर्थन देने का एलान किया है। 
 
    हवाई सेवा आंदोलन के के 72 वें दिन धरना स्थल पहुंचकर कर्मवीर संस्था ने समर्थन किया। संस्था के सदस्य मनोज देवांगन ने दुहराया कि हजारों करोड़ों का राजस्व बिलासपुर क्षेत्र से केंद्र और राज्य सरकार को मिलता है। बावजूद इसके सर्व सुविधा युक्त हवाई अड्डा नही दिया जाना दुखद है। समिति के वरिष्ठ सदस्य मनोज तिवारी ने कहा कि जिस तरह हाई कोर्ट और रेलवे जोन के लिए जन आंदोलन हुआ। स्थिति कुछ ऐसी बन रही है कि इतिहास को दुहराया जाए। सीएमडी कॉलेज के पूर्व छात्र नेता और तखतपुर क्षेत्र के समाजसेवी सुनील शुक्ला और श्याम मूरत कौशिक ने कहा कि नेता और सरकार की फिरत कुछ नींबू या गन्ने की तरह होती है। जब तक इन पर दबाव नहीं पड़ता तब तक रस देने को तैयार नहीं होते हैं। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार को केवल 100 करोड रुपए देना है। यह रकम बिलासपुर क्षेत्र से मिल रहे राजस्व के मुकाबले कुछ भी नहीं है।
 
            वक्ताओं ने बताया कि बिलासपुर हवाई अड्डे से 1988 में वायुदूत की सेवा भोपाल के लिए थी। 1994 में अर्चना एयरवेज ने उड़ान भरना भी शुरू किया। लेकिन राज्य बनते ही बिलासपुर हवाई सेवा की तरफ से केंद्र और राज्य सरकारों ने नजरें फेर ली। यह जानते हुए भी बिलासपुर छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे प्रमुख शहर है।  इस बीच जगदलपुर जैसी जगहों पर हवाई अड्डों का विकास पर तो ध्यान दिया गया। लेैकिन बिलासपुर के साथ हमेशा की तरह सौतेला व्यवहार किया गया। यहां तक कि हाई कोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को फटकारा।  आश्वासन के बाद भी हवाई सेवा प्रारंभ नहीं किया गया।
 
                     वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में मौजूद 15 सौ मीटर का रनवे पर जबलपुर की तरह 78 सीटर विमान संचालन किया जा सकता है। लेकिन हवाई अड्डे की सही विकास के लिए रनवे और टर्मिनल का विस्तार किया जाना जरूरी हैं। सभा को संबोधित करते हुए महेश दुबे और जिला आटो संघ के मनोज श्रीवास ने कहा कि क्षेत्रीय सांसदों को 72 दिन पुराने आंदोलन में स्वयं होकर भाग लेना चाहिए। शिक्षाविद तरु तिवारी ने कहा कि प्रजातंत्र में जवाबदेही का जो सिद्धांत है वह इसी पर आधारित है कि जनता के बीच खुद होकर जनप्रतिनिधि जाएं। सभा को सुशांत शुक्ला और धर्मेंद्र चंद्राकर ने संबोधित किया।
 
                      धरना में रोहित तिवारी, रघुराज सिंह, शेख  फाजु, केशव गोरख ,देवदत्त शर्मा, संतोष पीपलवा, राजेश दुआ,अभिषेक सिंह,राघवेंद्र सिंह,पुरुदास दास मानिकपुरी,पप्पू तिवारी, दीपक कश्यप, सुदीप श्रीवास्तव ,अशोक भंडारी ,देवेंद्र सिंह, कमल सिंह ठाकुर, शरद यादव, राजकुमार तिवारी, विकास दुबे, संजय पिल्ले ,अमित नागदेव ,अवधेश दुबे, मनीष सक्सेना, यतीश गोयल, संतोष साहू विशेष रूप से मौजूद थे।

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