जैविक खाद उत्पान को 100 फीसदी सहायता..सांसद साव के सवाल पर बोले कृषि मंत्री..जागरूक होंगे किसान

बिलासपुर—जैविक खेती को बढ़ावा  देने केन्द्र सरकार ने प्रभावी कदम उठाए है। जैविक खाद का उत्पादन बढ़कर 3387 लाख मीट्रिक टन हो  गया है। बुधवार को संसद में बिलासपुर के सांसद अरूण साव के सवाल पर केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र तोमर ने लोकसभा को जानकारी दी है।
 
         रासायनिक खाद के मनमाने उपयोग से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। मिट्ची की उर्वरता में भी कमी आयी है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार के कृषि एवं कल्याण मंत्रालय ने रासायनिक की बजाय जैविक खाद का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं। जिसके कारण वर्ष 2013-14 में जैविक खाद का उत्पादन 2294 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर साल 2017-18 में 3387 लाख मीट्रिक टन हो गया है। जैविक  खाद के उत्पादन में वृद्धि का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है।
 
                          लोकसभा में बजट सत्र के दौरान क्षेत्रीय सांसद अरुण साव के अतारांकित प्रश्न पर यह जानकारी केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने दी। सवाल के जवाब में तोमर ने कहा कि रासायनिक मुक्त खेती से मृदा की उर्वरता और पर्यावरण में सुधार होता है। उत्पादन में भी वृद्धि होती है। यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।
 
              तोमर ने जानाकरी दिया कि  पिछले वर्षों में जैविक खाद का उत्पादन बढ़ा है। केन्द्र सरकार रासायनिक खाद के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में प्रदर्शनों, मेलों और प्रशिक्षणों के माध्यम से किसानों को शिक्षित कर रही है। साथ ही अकार्बनिक और कार्बनिक स्त्रोतों के संयोजन से संतुलित और समेकित पोषक तत्व प्रबंधन आधारित मृदा परीक्षण की सिफारिश की गई है। 
 
                            राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन के तहत् मशीनीकृत फलों और सब्जियों के बाजार अवशिष्ट और कृषि अवशिष्ट खाद उत्पादन इकाई स्थापना के लिए राज्य सरकारों, सरकारी एजेंसियों को 190 लाख प्रति यूनिट की अधिकतम सीमा तक सौ फीसदी वित्तीय सहायता दी जा रही है। निजी एजेंसियों और व्यक्तियों को 63 लाख रुपए प्रति यूनिट की परियोजना लागत का 30 प्रतिशत तक आर्थिक मदद दी जा रही है।
 
                          तोमर ने अरूण साव के सवाल पर कहा कि जैविक समावेशन, जैविक खाद उत्पादन समेत जैविक आदानों के लिए पीकेवीवाई के तहत सालाना 31 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसी तरह 3 वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर 75 सौ रुपए की मदद दी जा रही है। भारत सरकार, सिटी कम्पोस्ट की बिक्री के लिए उर्वरक कंपनियों को 15 सौ रुपए प्रति मीट्रिक टन की दर पर बाजार विकास सहायता दे रही है।
 
अवशिष्ट से खाद बनाने विकसित की तकनीक
 
                       सांसद साव ने जानकारी दी कि केंद्रीय कृषि मंत्री के लिखित जवाब में बताया गया है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने उपलब्ध ग्रामीण जैविक  अवशिष्ट का उपयोग करने लिए विभिन्न प्रकार की जैविक खादों जैसे- फास्फोकम्पोस्ट, वर्मीकम्पोस्ट, जैव समृद्ध खाद आदि तैयार करने के लिए तकनीक विकसित की है। आईसीएआर, कृषि में  एफवाईएम, वर्मिन कम्पोस्ट, समृद्ध खाद, बायोगैस मिश्रित खाद, हरी खाद, जैव उर्वरक आदि को तैयार करने और उपयोग के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी दे रहा है।

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