तरक्की के लिए बेहतर सिस्टम जरुरी: बजरंग केडिया

IMG_20151107_195744बिलासपुर ( भास्कर मिश्र )।  कुछ गांवों को इंजेक्ट कर बिलासपुर बना दिया गया । बचपन से आज तक बिलासपुर में बहुत बदलाव हुआ है। वर्तमान स्वरूप देने में रेलवे का बहुत बड़ा योगदान है। रेलवे ने बिलासपुर को बहुआयामी संस्कृत का गढ़ बनाया है। अधिकारियों में अनिर्णय की स्थिति ने बिलासपुर को नुकसान पहुंचाया है। नेतृत्व समय के साथ मजबूत हुआ है..लेकिन प्रशासनिक तंत्र हमेशा की तरह गैर जिम्मेदार है। अधिकारी चाहें तो कलेक्टर मंडल की तरह शहर पर विशेष छाप छोड़ सकते हैं। अच्छे काम के लिए अधिकारी बैठक-बैठक खेलते हैं। रिएक्ट करने में एक पल की भी देरी नहीं करते। दिग्विजय के समय बिलासपुर का बहुत शोषण हुआ । बिजली हम बनाते थे..रोशन राधोगढ़ होता था। क्या- क्या कहें बिलासपुर के बारें में,..राज्य बना तो बिलासपुर का भाग्य जगा…यह बातें वरिष्ठ पत्रकार समाजसेवी बजरंग केडिया ने सीजी वाल से एक मुलाकात के दौरान कही।

            रेलवे ने बिलासपुर को बहुआयामी सांस्कृतिक केन्द्र बनाया। बिलासपुर का वर्तमान स्वरूप बीडीए ने तैयार किया है। फिलहाल बिलासपुर को इन दिनों नया स्वरूप दिये जाने का प्रयास किया जा रहा है।
          बिलासपुर रेलवे जोन 28 किलोमीटर के दायरे में बसा है। रेलवे में काम करने वालों ने बिलासपुर को मिनी भारत बनाया । जो यहां आया..फिर यहीं का होकर रह गया। टिकरापारा, तारबाहर, मोपका देवरीखुर्द,रेलवे पार क्षेत्र रेलवे कर्मचारियों ने बसाया है।
       रेलवे कर्मचारियों की जिन्दगी टुकड़ा में बटी होती है। नौकरी करने के बाद लोग अपने जड़ से उखड़ चुके होते हैं। बिलासपुर ही उनका घर बन जाता है।
          राज्य बनने के पहले बिलासपुर का विकास..कम सुधार और संशोधन ज्यादा हुआ। विकास राज्य बनने के बाद शुरू हुआ। बिलासपुर का नेतृत्व हमेशा से क्षमतावान रहा। मथुरा प्रसाद दुबे, राघवेन्द्र राव, रामगोपाल तिवारी. डॉ.चतरू. राजेन्द्र शुक्ला मजबूत नेता थे। अर्जुन सिंह ने बिलासपुर को राजनीति का केन्द्र बनाया । बी,आर.यादव को आगे लाया। इसके बाद अमर अग्रवाल का जमाना आया। मजबूत नेता हैं। काम भी कर रहे हैं।
                IMG_20151107_195739बजरंग केडिया ने सीजी वाल को बताया कि मैने बिलासपुर में बहुत कम दृढ़ इच्छाशक्ति वाले अधिकारियों को देखा। ऐसा क्यों है..इस पर कुछ नहीं कहूंगा। एक अधिकारी राजेश मण्डल भी थे। वर्तमान बिलासपुर का नया स्वरूप उन्हीं ने दिया है। वर्तमान में जो कुछ भी व्यवस्थित दिखाई दे रहा है।  उन्हीं की बदौलत है।
             बजरंग केडिया ने बताया कि भ्रष्टाचार सिर चढ़कर बोल रहा है। नेता योजनाओं को लाते हैं…लेकिन अफसर…..(लंबी सांस लेते हुए…)…कुछ नहीं कहूंगा। अधिकारियों ने अपने को भगवान समझ लिया है। कम ही लोग हैं जो जनता से रूबरू होते हैं। डरवाने का काम इंस्पेक्टर करता है।
               सीवरेज की समस्या बिलासपुर के लिए नई नहीं है। 1982 में भी सिवरेज जैसा ही कुछ काम हुआ है। दो साल तक गोलबाजार और सदर बाजार की मुख्य सड़क को ओपेन हार्ट सर्जरी कर छोड़ दिया गया। बड़ी नारकीय जिन्दगी थी…। वर्तमान सिवरेज से कहीं ज्यादा।
           सीवरेज योजना को सबसे ज्यादा नुकसान भ्रष्ट अधिकारियों से हुआ है। बिलासपुर में भ्रष्टाचार सिर चढ़कर भ्रष्टाचार बोल रहा है। तुर्काडीह पूल भ्रष्टाचार का जीवन्त नमूना है। विकास की बात आती है तो हमारे अधिकारी मीटिंग मीटिंग खेलने लगते हैं। लेकिन रिएक्ट करने में समय नहीं लगाते। बिलासपुर का दुर्भाग्य है कि उसके पास बहुत कम उर्जावान अधिकारी हैं। नेता करेगा क्या। काम तो अफसरों को करना है। लेकिन लापरवाही में काफी हद तक नेता भी जिम्मेदार हैं। 
           दिग्विजय के समय बिलासपुर ने बहुत कष्ट भोगा। बिलासपुर का जमकर शोषण हुआ। बिजली हम बनाते थे…रोशनी राधोगढ़ में होती थी। 23 साल तक दर्री घाट पर टोल टैक्स वसूला गया।
          वर्तमान विधायक ताकतवर है। लेकिन अफसर सुस्त हैं। उनमें खौफ नहीं है, बेलगाम और गैर जिम्मेदार हैं। सिवरेज जैसा काम कारपोरेट जगत में होता तो कब का बनकर तैयार हो जाता। बिलासपुर की तस्वीर रातों रात बदल जाती।
       वर्तमान नेतृत्व अच्छा हो सकता है…लेकिन बिना सिस्टम बदले बिलासपुर का बेहतर विकास संभव नहीं है।
            स्मार्ट सिटी के प्रश्न पर बजरंग केडिया कहते हैं कि शहर में वसंत बिहार, इंदिरा विहार, नेहरू शताब्दी नगर,रेलवे की कालोनियां बहुत पहले से ही स्मार्ट सिटी के रूप में हैं। यहां सारी सुविधाएं हैं। जिनकी इन दिनों चर्चा चल रही है।
        केडिया ने बताया कि पुरानी दिल्ली, आगरा बाजार, मथुरा, वृन्दावन बनारस की बसाहट को बदला नहीं जा सकता। इसी तरह गोलबाजार सदर बाजार और अन्य एतिहासिक निर्माणों से छेड़छाड़ ठीक नहीं। उन्हें बस जीर्णोद्धार की जरूरत है। लेकिन स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नए स्थान को ही चयन करना होगा। इससे हमारी विरासत भी बनी रहेगी और नया शहर भी बन जाएगा।
              बिलासपुर पर कितना खर्च हुआ यह मतलब नहीं रखता। मतलब रखता है कि बिलासपुर का कितना विकास हुआ। हम पाते हैं कि अधिकारियों ने रायपुर को आगे बढ़ाने में बिलासपुर का सहयोग दिया है।
          बीडीए की आवश्यकता पर बजरंग केडिया ने कहा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग क्या कर रहा है।नकारा लोग कर भी क्या कर सकते हैं। समझ होती तो मास्टर प्लान फ्लाफ नहीं होता। शहर का पानी बीचो बीच बह रही अरपा तक तो ले जाना है। कंट्री प्लानिंग के अधिकारियों ने सरल काम को भी कठिन बना दिया है।

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