मानवता की दूत बनकर कार्य कर रही हैं बस्तर की महिलाएं :‘‘नो प्रॉफिट नो लॉस”पर बेच रही फल और सब्जियां

नारायणपुर।पूरी दुनिया सहित भारत देश में जहां कोराना वायरस की रोकथाम व नियंत्रण के लिए लोग एक जुटता के साथ खड़े है। वहीं नक्सल प्रभावित जिला नारायणपुर की ग्रामीण महिलाओं के साथ ही संतोषी स्वसहायता समूह की ग्राम बेनूर की सुश्री आसमती और छोटेडोंगर की रोशनी महिला स्व सहायता समूह की सुश्री पूर्णे आदिवासी महिलाएं ‘‘नो प्रॉफिट नो लॉस‘‘ पर फल और सब्जियां बेच रही हैं। ये महिलायें मानवता के दूत की तरह कार्य कर रही हैं। लॉकडाउन के कारण स्थानीय हॉट-बाजार बंद होने से ग्रामीणों को फल-सब्जी आदि की दिक्कत हो रही थी।सीजीवालडॉटकॉम के व्हाट्सएप (NEWS) ग्रुप से जुडने के लिए यहाँ क्लिक कीजिये

खासकर बुजुर्ग और अन्य रोग से पीड़ित व्यक्तियों को। नारायणपुर सहित बस्तर के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में जरूरी समान खरीदने का एक मात्र स्थान होता है। केवल साप्ताहिक हॉट-बाजार, जो कि अभी बंद है।इसके लिए स्थानीय स्वसहायता समूह की आदिवासी ग्रामीण महिलाएं आगे आयी। लोगों की रोजमर्रा की जरूरत की चीजें फल-सब्जी और किराना सामग्री के ठेले-दुकान खोलने की शुरूआत की।

इन हाथ ठेलों में तरबूज, सेब, अनार, अंगूर के साथ ही सब्जी भी ‘‘न लाभ-न हानि‘‘ के तर्ज पर बेचा जा रहा है। वहीं स्व-सहायता समूह की नारायणपुर में भी अबूझमाड़ बिहान मार्ट नाम से किराना दुकान संचालित है। जहां लोग अपनी-अपनी जरूरत के हिसाब से खरीदी कर रहे हैं और इनके सराहनीय कार्य की प्रशंसा भी कर रहे है। लॉकडाउन के समय महिलायें लोगों की मदद करने के लिए आगे आ रही है। विगत एक अप्रैल को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नाम चिठ्ठी लिखी थी। जिसमंे उन्होंने उनके काम की तारीफ की और संकट के इस समय में अधिक जिम्मेदारी निभाने और लोगों को जागरूक करने की अपील की थी ।

हाथ ठेला-दुकानों में सोशल डिस्टेन्सिग बरकरार है। इसका पूरा-पूरा ख्याल भी रखा जा रहा है। फल ठेला से दूरी पर सफेद चूना-पेन्ट से बाकायदा गोल घेरा बनाये गये हैं। जहां महिला-पुरूष ग्राहक अपनी बारी का इन्तजार करते हैं। साथ ही हाथ धोने के लिए पानी-साबुन का भी इन्तजाम किया गया है। उनका यह कार्य क्या बाकई सराहनीय नहीं, हां  बिल्कुल है। या कहिए कि इस कठिन दौर में ग्रामीण महिलाएं शहरी महिलाओं की तुलना में तेजी से जागरूक और लोगों की मददगार साबित हो रही है।

चाहें अबूझमाड़ का भीतरी इलाका हो या नगरीय क्षेत्र । दोनों जगहों पर ग्रामीण महिलाओं के साथ ही महिला स्वास्थ्य अमला, आगंनबाड़ी कार्यकर्ता या फिर महिला पंच-सरंपच सब कोरोना से इस लड़ाई में मजबूती के साथ खड़ी दिखाई दे रही है।

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