जो मिल गया..मुकद्दर समझ लिया..लोहिया

बिलासपुर—(भास्कर मिश्र)-अविभाज्य मध्यप्रदेश के समय बिलासपुर के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हुआ। रत्नगर्भा धरती के दोहन से मध्यभारत का विकास हुआ। राज्य बनने के बाद उन्नति तो हुई लेकिन बिलासपुर को विकास के पंख नहीं लगे। मेरा बचपन कस्बानुमा शहर में बीता। बिलासपुर अब शहर की सीमा को लांघकर महानगर की ओर बढ़ रहा है। बिलासपुर को जब भी कोई योजना मिली है तो रायपुर को तीन गुना फायदा हुआ है। हमने रायपुर की वृष्टि छाया में विकास किया है। हमें जो कुछ हासिल हुआ उसे मुकद्दर समझा। शहर के वरिष्ठ नागरिक जेडआरयूसीसी सदस्य बजरंग लोहिया ने सीजी वाल से एक मुलाकात के दौरान यह बातें कहीं।

                हम बहुत सीधे लोग हैं। जो मिला उसी को मुकद्दर समझ लिया। हम संघर्ष कम करते हैं। नसीब पर ज्यादा विश्वास करते हैं। विकास के लिए सिर्फ नेतृत्व को दोष देना ठीक नहीं । विकास सामुहिक प्रयास से होता है। बिलासपुर को ऐसा अवसर बहुत कम मिला। संघर्ष किया तो जोन और रेलवे बोर्ड मिला। न्यायधानी की सौगात मिली। लेकिन बहुत कुछ खोने के बाद। सामुहिक प्रयास होता तो बिलासपुर की तस्वीर कुछ अलग ही होती। पहली बार बिना संघर्ष के स्मार्ट सिटी का तोहफा मिला। इसमें नेतृत्व का योगदान है। अब सामुहिक प्रयास से इस योजना को सफल बनाने की हमारी जिम्मेदारी है।

           बिलासपुर रत्नगर्भा धरती है। ऐसा सौभाग्य बहुत कम धरती को हासिल है। हमें मिलना था 10 वां जोन मिला 16 वां। मुकद्दर के चक्कर में नहीं पड़ते तो यह अधिकार बहुत पहले हासिल हो जाता। लोहिया ने बताया कि धीमें विकास के लिए नेतृत्व से ज्यादा हम लोग जिम्मेदार हैं। सही मंच और सही समय पर अपनी बातों को रखना हमें आया ही नहीं। नेतृत्व और प्रशासन पर निर्भरता हमारी कमजोरी है। मिला तो मिला नहीं मिला तो नहीं मिला।

             हम न्यायधानी पाकर गद्-गद् हो गए। एम्स, आईआईटी, ट्रिपल आईटी, मेडिकल की बड़ी बड़ी सुविधाएं ना जाने क्या-क्या? सब कुछ रायपुर चला गया। हवाई पट्टी के बाद भी हमें हवाई यात्रा का दर्जा नहीं मिला। दरअसल रायपुर के कद्दावर नेताओ ने छत्तीसगढ़ का मतलब रायपुर मान लिया है। बिलासुपर, अंबिकापुर, कोरबा जगदलपुर और भी शहर हैं। लेकिन उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है। उनमें सम्यक दृष्टि का अभाव है। यही कारण है सारी योजनाओं पर रायपुर अपना हक समझता है। बिलासपुर प्रदेश के अन्य जिलों से जरा हटकर है। बावजूद इसके केन्द्र में रखकर कभी सोचा ही नहीं गया। स्थानीय नेतृत्व गंभीर है लेकिन सामुहिक प्रयास की कमी है।

             बिलासपुर के विकास में जोन का अहम योगदान है। यहां देश के कोने-कोने के लोग मिल जाएंगे। बावजूद इसके देश के 16 वें रेलवे जोन के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। बेशक यह देश का छोटा रेलवे जोन है। लेकिन कमाई में अन्य जोन से आगे है। आज तक वाजिब हक नहीं मिला है। बजट दर बजट घोषणा के बाद भी बिलासुपर को सुविधाओं के नाम पर सिफर-दर सिफर हासिल हुआ है। क्या.. हम एक बार फिर एक होकर सही मंच पर अपनी बात नहीं रख सकते। मैने बताया कि विकास केवल नेतृत्व से नहीं सामुहिक प्रयास से होता है। इसका परिणाम भी हासिल हुआ है।

                 पिछले के पिछले बजट में बिलासपुर- बीकानेर, बिलासपुर-जोधपुर नियमित ट्रेन चलाने की बात हुई थी। तीन बजट के बाद नियमित गाड़ी को स्पेशल ट्रेन बनाकर चलाया जा रहा है। वह भी व्हाया नागपुर। मुकद्दर की सोच ने 350 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी को बढ़ा दिया है। गार्डन रिच से लेकर बिलासपुर तक कई बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर बिलासपुर की आवाज उठाई। हासिल कुछ नहीं हुआ। हमें मुकद्दर से निकलकर सामुहिक लड़ाई लड़ने की जरूरत है। तभी बिलासपुर को न्याय मिलेगा।

              यदि रेल व्यवस्था को दुरूस्त कर लिया जाए तो बिलासपुर के विकास को बहुत लाभ होगा। जेडआरयूसीसी की बैठकों में मैने कई बार कहा कि बिलासपुर से हावड़ा और मुम्बई के लिए ट्रेन चलायी जाए तो भीड़ कम होगी। लोगों को सीटें मिलेंगी। मैने बैठकों में हर बार कुछ ट्रेनों की दूरी बढ़ाने, कुछ को नियमित करने और कुछ को बंद करने को कहा। जिससे व्यवस्था सुगम होगी। लेकिन रेल प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। लड़ाई अब भी लड़ रहा हूं…लेकिन अकेले। जबलपुर से हावड़ा, मुम्बई और सोमनाथ के लिए ट्रेन हो सकती है लेकिन बिलासपुर से नहीं…..सोचने का विषय है। दुराव क्यों के प्रश्न पर लोहिया ने कहा कि इसकी मुख्य वजह सामुहिक प्रयास का नही होना है।

       इस समय केन्द्र और राज्य दोनों जगह एक ही सरकार है। सामुहिक प्रयास से उन्हें झुकाया जा सकता है। रायपुर के लोग यह काम कर रहे हैं…उन्हें सब कुछ हासिल भी हो रहा है।

         उस्लापुर के विकास को लेकर रेल प्रशासन हमेंशा से उदासीन रहा है। रेलवे प्रशासन का हमेशा से जवाब है कि वह ई ग्रेड का स्टेशन है। मैने कई बार कटनी से रायपुर जाने वाले और रायगढ़ से कटनी जाने वाले यात्रियों की परेशानी के बारे में बताया लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ। जनता मुखर हो जाए तो सब ठीक हो जाएगा। या फिर कोई बिलासपुर का रेल मंत्री बने…इसका इंतजार करना होगा।

             लोहिया ने बताया कि खुशी है कि रेलमंत्री लालू यादव के समय कई बार पत्र व्यवहार के बाद टिकट में डेस्टिनेशन का समय अंकित किया जाने लगा। इसके लिए कई बार बैठक में चर्चा हुई थी। अधिकारियों ने इसे अतार्किक माना था।

           बिलासपुर को 100 स्मार्ट सिटी में शामिल किया जाना खुशी की बात है। शहर सुन्दर बने किसी को एतराज नहीं होना चाहिए। विकास की अवधारणा में सारी जिम्मेदारी सरकार, नेता और प्रशासन की नहीं होती । हमारी भी कुछ जिम्मेदारी है। हमें अपना घर साफ कर पड़ोसी के सामने कचरा परोसने की आदत से बाज आना होगा। हमें इस अभियान में सहयोग करना चाहिए।

             अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता। सर…शहर को स्मार्ट बनाना और साफ रखना हमारी भी जिम्मेदारी है। अभियान को लेकर कुछ मतभेद हो सकते हैं..बैठकर दूर किया जा सकता है। पहली बार ऐसा हुआ है कि हमें अपना हक सही समय पर स्मार्ट सिटी रूप में परोसा हुआ मिला है। यदि नहीं मिलता तो हम सरकार, नेता और मुकद्दर को कोसते। पहली बार हमें रायपुर के बराबर दर्जा मिला है। स्मार्ट सिटी का स्वागत करना चाहिए। लेकिन शहर का कोई एक ही हिस्सा स्मार्ट हो शेष अछूता रहे। इसका हम विरोध करते हैं।

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