जोगी ने कहा..कोरोना के खिलाफ राजनीति नहीं..लेकिन दाग दिए 3 सवाल..पढ़िए जोगी ने क्या कहा..

बिलासपुर— जनता कांग्रेस नेता अमित जोगी ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि समय आरोप प्रत्यारोप का नहीं है। कोरोना के खिलाफ सभी को एक जुट होकर रहना होगा। क्षेत्रीय दल होने के कारण हम प्रदेशहित में छत्तीसगढ़ सरकार से उचित कार्रवाई और कदम उठाने की उम्मीद करते हैं। जोगी ने बताया कि हमने करोना वायरस को लेकर सरकार से तीन मुद्दों पर प्रकाश डालने का भी अनुरोध किया है।
 
               जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने प्रेस नोट जारी कर सरकार से करोना वायरस को लेकर तीन मुद्दों पर प्रकाश डालने को कहा है। जोगी ने कहा कि सियासी आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है। करोना महामारी के खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी है। छत्तीसगढ़ के एकमात्र क्षेत्रीय दल होने के कर्तव्य का निर्वहन करते हुए तीन मुद्दों पर हम प्रदेश हित में सरकार से उचित कार्यवाही की अपेक्षा करते हैं।
 
               अमित जोगी ने कहा कि कोरोनावायरस महामारी बन गया है । संक्रमित होने वाले अधिकांश लोगों में  कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसी वजह से कोरोना-परीक्षण प्रोटोकॉल के अनुसार संदिग्ध प्रकरण की 14 दिनों के दौरान कम से कम 3 बार (5+4+4) जाँच की जानी चाहिए। तीनों टेस्ट के नेगेटिव आने के बाद ही  कोरोना-मुक्त घोषित किया जाए।
 
           लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य नियंत्रण और कमांड सेंटर (Covid-19) ने  18 अप्रैल 2020 तक जारी डेटा के मुताबिक, AIIMS रायपुर ने 36 में से 25 कोरोना मरीज़ों को औसतन 5 दिनों से भी कम समय में ही ठीक कर दिया। जानकारी के मुताबिक़ उनके उपचार के दौरान इनमें से केवल एक मरीज को दो दिनों तक वेंटिलेटर-सपोर्ट पर रखा गया था। बाकी सभी को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, एजिथ्रोमाइसिन इत्यादि की खुराक दी गई थी।
 
               अमित जोगी ने कहा कि हम स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। WHO, ICMR और MoHFW को इसका संज्ञान लेकर देखना चाहिए कि कहीं कोई चिकित्सकीय लापरवाही तो नहीं हुई है?
 
             अमित जोगी ने बताया कि दूसरा प्रमुख मुद्दा करोना से बचाव को लेकर है। छत्तीसगढ़ के सभी नगर निगमों में सेनेटाइजिंग का अहम मुद्दा है। जोगी ने छत्तीसगढ़ शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से चलाए जा रहे सैनिटाइजेशन अभियान को अपूर्ण  बताया। सैनिटाइजेशन अभियान में छिड़काव के लिए WHO ने 75-80%- स्पिरिट (एथनॉल), 1.45%- ग्लिसरोल, 0.125%- हाइड्रोजन परॉक्सायड और शेष डिस्टिल्ड या उबला पानी का घोल निर्धारित किया है। लेकिन  अधिकांश निगमों ने तय मानक से अलग  50% से भी कम की स्पिरिट के घोल का छिड़काव किया  है। इससे संभवतः राज्य में 143 करोड़ का अपव्यय हुआ है। 
 
            अमित जोगी ने तीसरा प्रमुख मुद्दा उठाते हुए  कहा कि सरगुजा जैसे खनिज-सम्पन्न इलाक़ों को हॉटस्पॉट से बाहर रखने के लिए प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकांश संदिग्ध प्रकरणों, जिनमें 23 तबलीगी  भी शामिल हैं। पर्याप्त जाँच नहीं हुई है। 36 तबलीगियों को केवल 1 सैम्पल-रिपोर्ट के आधार पर 3 दिनों में ही नेगेटिव घोषित कर दिया गया। जबकि निर्धारित टेस्टिंग मापदंडों के अनुसार 14 दिनों में कम से कम 3 सैम्पल-रिपोर्ट के बाद ही ऐसा किया जाना था। ऐसा लगता है कि कुछ शक्तिशाली खनन-आधारित उद्योगपतियों के प्रभाव में ऐसा किया गया है । ताकि उनके उद्योग लॉकडाउन में भी चलते रहे।
         
               जोगी ने कहा कि तीन उदाहरणों से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ सरकार संभवतः प्रदेश वासियों में सुरक्षा की ग़लत भावना का अहसास करा रही है। भारत और राज्य सरकारों को इन तीनों मामलों का संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही करनी चाहिए। 
 
अमित जोगी, अध्यक्ष-JCCJ 

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